शिव पर बनी फिल्म में ये खास किरदार निभाना चाहते हैं Ravi Kishan, बोले- 'मैंने 34 साल जहर पिया'
महादेव के प्रति गहरी आस्था रखने वाले अभिनेता और गोरखपुर से सांसद रवि किशन के लिए आध्यात्मिकता जीवन जीने की एक ऐसी शक्ति है, जिसने उन्हें बनाए रखा संतु ...और पढ़ें

रवि किशन की आने वाली फिल्में (फोटो-इंस्टाग्राम)

समय कम है?
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स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। महादेव के प्रति गहरी आस्था रखने वाले अभिनेता और गोरखपुर से सांसद रवि किशन के लिए आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक ऐसी शक्ति है जिसने उन्हें लंबे संघर्ष, असफलताओं और चुनौतियों के बीच भी संतुलित बनाए रखा। वे मानते हैं कि फिल्म उद्योग हो या कोई अन्य क्षेत्र, निरंतर दबाव और प्रतिस्पर्धा के कारण लोग जल्दी टूट जाते हैं, लेकिन आध्यात्मिक आधार व्यक्ति को धैर्य और स्थिरता देता है। महाशिवरात्री के मौके पर रवि कहते हैं कि लोग लंबे संघर्ष से परेशान हो जाते हैं, जबकि मैंने 34 साल इंतजार किया। अब मुझे पुरस्कार और सम्मान मिल रहे हैं। अगर आध्यात्म नहीं होता, तो लोग सुसाइड करने तक की सोचने लगते हैं या अल्कोलिक हो जाते हैं। भगवद्गीता का संदेश है कर्म करो, फल की चिंता मत करो। मैं इसमें यकीन करता हूं।
पिता थे पुजारी
रवि किशन के पिता पुजारी थे और बचपन से ही धार्मिक वातावरण में उनका पालन-पोषण हुआ। सुबह जल्दी उठना, पूजा-अर्चना करना और ध्यान लगाना उनकी पारिवारिक दिनचर्या का हिस्सा था। वह कहते हैं कि आज भी ध्यान मेरे जीवन का अभिन्न अंग है। ध्यान केवल बैठकर आंखें बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर कार्य में सजगता और ईश्वर स्मरण बनाए रखना ही सच्चा ध्यान है।
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भगवान ने दी दुख झेलने की शक्ति
महादेव के नीलकंठ स्वरूप को रवि किशन अपने जीवन का प्रतीक मानते हैं। जैसे भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर उसे गले में रोक लिया था, वैसे ही उन्होंने अपने जीवन के अपमान, संघर्ष और कठिनाइयों को सहते हुए उन्हें अपने भीतर शक्ति में बदला। आगे रवि किशन कहते हैं कि कठिनाइयों को भीतर इस तरह रोकना चाहिए कि वे हमें मजबूत बनाएं, लेकिन हमारे व्यवहार या व्यक्तित्व को विषाक्त न करें। दुख तो जीवन में आना ही है। लेकिन उससे उबरना ही जीवन है।

अपमान और तिरस्कार को भी झेला
रवि ने महादेव का गोरखपुर फिल्म बनाई थी। महादेव से अपने लगाव को लेकर वह कहते हैं गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ भी शिव का ही स्वरूप हैं। कृपा देखिए शिव ने मुझे वहां भी बुला लिया। मोदी जी भी शिव के भक्त हैं, योगी जी भी शिव के भक्त हैं। अगर मुझे शिव भगवान आधारित किसी फिल्म में काम करने का मौका मिले, तो नीलकंठ वाला किरदार ही निभाना चाहूंगा। 33 साल के संघर्ष को वह नीलकंठ की तरह जहर पीने को मानते हैं। वह कहते हैं महादेव ने सारा जहर पिया और गले में रोक लिया। उसे शरीर में नहीं जाने दिया, खुद जहर नहीं बने। मुझे यह बहुत दिलचस्प लगता है। मेरे साथ भी 35 साल यही हुआ। अपमान, तिरस्कार जो भी हुआ, मैंने सब अपने भीतर रखा। अपना अच्छा समय आने पर मैंने उसे समाज को लौटाया नहीं। मैंने उसे अपना हिस्सा माना कि वह जहर मुझे मजबूत बनाने आया था।
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संसार को मृत्यु लोक मानते हैं एक्टर
जीवन के प्रति रवि किशन का दृष्टिकोण भी काफी व्यावहारिक है। वे कहते हैं कि यह संसार ‘मृत्यु-लोक’ है, जहां सुख-दुख, सम्मान-अपमान और सफलता-असफलता सब आते-जाते रहते हैं। यदि व्यक्ति हर समय केवल प्रशंसा या सुख की अपेक्षा करेगा, तो निराशा ही हाथ लगेगी। रोज फूल बरसने की उम्मीद मत रखिए। जैसे मोदी जी से पूछा गया कि आप इतने फिट कैसे रहते हैं? उन्होंने कहा मैं रोज सुबह दो किलो गालियां खाता हूं। तो ठीक है यही मृत्यु-लोक है। जब आप मान लेते हैं कि आप मृत्यु-लोक में हैं, तो ज्यादा उम्मीद मत रखिए। यह भी नहीं कि 35 साल बाद अब मैं इस मुकाम पर हूं, पैसे हैं, शक्ति है तो अब जीवन में परेशानी नहीं आएगी। नहीं, यह बदल जाएगा।
हमेशा नए प्रयोग करने में रखते हैं विश्वास
रवि किशन लगातार नए प्रयोगों और भूमिकाओं को लेकर उत्साहित रहते हैं। उनकी वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’ के पहले सीजन को दर्शकों ने खूब सराहा और दूसरे सीजन को लेकर वे विशेष रूप से आशान्वित हैं। रवि कहते हैं यह भी महादेव की कृपा से बहुत ऐतिहासिक होगा। मेरा पात्र बी.डी. त्यागी अब जज बन गए हैं, इसलिए उनका रूप बेहद प्रभावशाली है। वह आपका मनोरंजन भी करेंगे और रुलाएंगे भी।
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अलग देखना चाहते हैं दर्शक
आजकल फिल्म के शीर्षक भी बहस का विषय बन जाते हैं। लोगों के फिल्म देखने से पहले प्रतिक्रिया देने को लेकर वह कहते हैं कि दर्शक कुछ नया और अलग देखना चाहते हैं, इसलिए फिल्म और वेब कंटेंट में प्रयोग जरूरी हैं। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि नवीनता की खोज में किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए। मनोरंजन का उद्देश्य आनंद देना है, विवाद पैदा करना नहीं।
एक्टर की आने वाली फिल्में
फिल्म मां बहन में वह माधुरी दीक्षित के साथ नजर आएंगे। उनके साथ काम करने को लेकर रवि कहते हैं कि तेजाब फिल्म के समय से ही मैं उनका प्रशंसक हूं। वह मेरी दो पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक रही हैं। पहली पसंद श्रीदेवी रही हैं, साल 1994 में मैंने उनके साथ आर्मी फिल्म में काम किया था। अब माधुरी जी के साथ मौका मिला बहुत मजा आया। वह बेहद प्रोफेशनल और बहुत विनम्र महिला हैं। वह वर्तमान में जीती हैं। शायद इसी वजह से वह आज भी काम कर रही हैं।