Rekha की वो फिल्म जिसमें 'मगरमच्छ' ने लूट ली थी पूरी लाइमलाइट, 38 साल पहले आई थ्रिलर का क्लाईमैक्स था दमदार
38 साल पहले आई रेखा की एक फिल्म में मगरमच्छ ने पूरी लाइमलाइट चुरा ली थी। फिल्म का मेन सस्पेंस भी मगरमच्छ से शुरू होता है और क्लाईमैक्स भी इसी पर खत्म ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'मगरमच्छ' से फिल्मों का कनेक्शन कोई नया नहीं है। शनाया कपूर और आदर्श गौरव की लेटेस्ट फिल्म 'तू या मैं' के अलावा कई फिल्मों में 'मगरमच्छ' को दिखाया गया और दिलचस्प बात यह है कि 2-3 घंटों की फिल्म में चंद मिनटों के सीन्स में मगरमच्छ लाइमलाइट बटोर चुके हैं। 38 साल पहले आई एक फिल्म में कुछ ऐसा ही हुआ था।
यह फिल्म रेखा की थी जिसमें मगरमच्छ का सीन काफी हाइलाइट किया गया था। इस फिल्म का मेन थ्रिल भी मगरमच्छ से शुरू हुआ और क्लाईमैक्स भी मगरमच्छ के साथ खत्म हुआ। इस फिल्म को इतना पसंद किया गया कि यह बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही।
रेखा की सुपरहिट फिल्म
यह फिल्म थी 1988 में रिलीज हुई 'खून भरी मांग' (Khoon Bhari Maang)। रेखा ने अकेले दम पर इस फिल्म को सुपरहिट कराया था। फिल्म में रेखा के अलावा कबीर बेदी, सोनी वालिया और कादर खान मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म का निर्देशन राकेश रोशन (Rakesh Roshan) ने किया था।
रेखा की फिल्म में मगरमच्छ का खौफ
फिल्म की कहानी एक अमीर घराने से ताल्लुक रखने वाली विधवा आरती (Rekha) की है जिसके पति की कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी और उसके पिता का भी कत्ल हो गया। इसके बाद वह अपने बच्चों और पेट डॉग्स के साथ अकेले सर्वाइव करने की कोशिश करती है। तभी हीरालाल (कादर खान) जो आरती के पिता का दोस्त होता है, वह उसका फादर फिगर बनने की कोशिश करता है।
खबरें और भी
वह आरती की जिंदगी में अपने भतीजे संजय को लाता है, ताकि वह आरती की जायदाद पर कब्जा कर सके। आरती की दोस्त नंदिनी (सोनू वालिया) भी संजय से मिली हुई है। सब मिलकर आरती को संजय से दोबारा शादी के लिए मनाते हैं और जब आरती की संजय से शादी हो जाती है तो असली ड्रामा शुरू होता है। नंदिनी और संजय आरती को एक ट्रिप पर ले जाते हैं और उन्हें मगरमच्छ से भरे पानी में धकेल देते हैं।
यह भी पढ़ें- Tu Yaa Main Trailer: मगरमच्छ के बीच फंसे शनाया कपूर और आदर्श गौरव, जान पर बन आई बात
मगरमच्छ का क्लाईमैक्स में बड़ा रोल
संजय और नंदिनी को लगता है कि आरती मर गई है, लेकिन मगरमच्छ से घायल होने के बाद आरती किसी तरह बच जाती है और प्लास्टिक सर्जरी से अपना चेहरा ठीक करा लेती है। इसके बाद बदले की कहानी शुरू होती है। वह धीरे-धीरे नंदिनी, संजय और हीरालाल की जिंदगी बर्बाद कर देती है। वह अपने दुश्मनों के साथ वैसा ही करती है, जैसे उसके साथ किया गया था। वह उन्हें भी मगरमच्छ के हवाले कर देती है।