'जब कोई तैयार नहीं था, तब पत्नी ने'...'Srikanth' को नेशनल अवॉर्ड मिलने पर भावुक हुए तुषार हीरानंदानी
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में राजकुमार राव की फिल्म 'श्रीकांत' को बेस्ट हिंदी फिल्म का अवॉर्ड मिला। निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने इस जीत पर खुशी जाहिर ...और पढ़ें
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स (National Film Award) की घोषणा 18 जुलाई को कर दी गई। इस दौरान कई चौंकाने वाले नतीजे देखने को मिले। राजकुमार राव (Rajkumaar Rao) की फिल्म 'श्रीकांत' (Srikanth) ने भारत के सबसे बड़े अवॉर्ड समारोह में बेस्ट हिंदी फिल्म का अवॉर्ड जीता।
तुषार हीरानंदानी के निर्देशन में बनी इस फिल्म के अवॉर्ड जीतने पर डायरेक्टर ने अपनी खुशी जाहिर की। एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने कहा,"मैं अभी से जश्न मना रहा हूं। दो दिन पहले ही मेरा जन्मदिन था, इसलिए यह मेरे लिए जन्मदिन का सबसे अच्छा तोहफा है।"
तुषार हीरानंदानी को नहीं हो रहा यकीन
तुषार हीरानंदानी को अभी भी इस जीत पर यकीन नहीं हो रहा है, लेकिन डायरेक्टर का कहना है कि इसने उनकी मेहनत और फिल्म के मकसद, दोनों को सही साबित किया है। वे कहते हैं,'यह सब किसी सपने जैसा लग रहा है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूं। मुझे किसी और अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट नहीं किया गया था, इसलिए देश का सबसे बड़ा अवॉर्ड जीतना और वह भी बेस्ट फिल्म के लिए बहुत सही और संतोषजनक लग रहा है। यह सब कुछ बयां करता है। मैं बहुत खुश और उत्साहित हूं।"

निर्देशक ने पत्नी को कहा शुक्रिया
तुषार अपनी पत्नी का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया और 'श्रीकांत' फिल्म को तब सपोर्ट किया जब इसकी कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी। तुषार ने भावुक होकर कहा,'मैं अपनी पत्नी निधि परमार का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिन्होंने तब इस फिल्म को प्रोड्यूस किया जब कोई और इसे प्रोड्यूस करने को तैयार नहीं था। मैं यह अवॉर्ड अपने सास-ससुर को समर्पित करता हूं, जिनका 'श्रीकांत' फिल्म देखने से पहले ही निधन हो गया था।'
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क्या थी श्रीकांत की कहानी?
'श्रीकांत' 2024 में आई एक बायोपिक फिल्म है, जो दृष्टिबाधित उद्योगपति और 'बोलेंट इंडस्ट्रीज' के संस्थापक श्रीकांत बोला की जिंदगी पर आधारित है। इसमें राजकुमार राव ने श्रीकांत बोला का किरदार निभाया है, जबकि ज्योतिका ने उनकी टीचर और अलाया एफ ने उनकी प्रेमिका की भूमिका निभाई है। चूंकि यह कहानी एक असल व्यक्ति पर आधारित है, इसलिए तुषार का मानना है कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिलना इस बात का सबूत है कि वे लोगों को प्रेरित करने और फिल्म के जरिए जो संदेश पहुंचाना चाहते थे, उसे पहुंचाने में वो कामयाब रहे।
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