150 साल पहले जन्मी वो करोड़पति तवायफ, अंग्रेजों को चलानी पड़ी स्पेशल ट्रेन; गजब हैं इनकी रईसी की ठसक के किस्से
गौहर जान, जिन्हें भारत की पहली करोड़पति तवायफ और रिकॉर्डिंग सुपरस्टार माना जाता है, अपनी असाधारण गायकी और अमीरी के लिए प्रसिद्ध थीं। ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। गौहर जान (Gauhar Khan)..ये नाम शायद बहुत ही कम लोगों ने सुना होगा लेकिन जिसने भी इनके बारे में जाना उनके बीच इनकी रईसी के किस्से आम हैं। आज से 150 साल पहले गौहर जान का वो जलवा था जो आज के समय में बड़े से बड़ा अरबपति खरबपति सोच भी नहीं सकता।
ये वो शख्स थीं जिन्होंने करोड़पति शब्द का इजात किया। आज के किस्से में बात गौहर खान की जो पेशे से एक तवायफ थीं, लेकिन कमाल की गायिका कहलाईं। उन्हें भारतीय संगीत का नक्शा बदलने के लिए जाना जाता है। गौहर खान को इसके लिए पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार का खिताब भी मिल चुका है।
गाने के लिए लेती थीं 3 हजार रुपये
देश में जब सोना 20 रुपए तोला बिकता था, तब ये एक गाना गाने की फीस 3000 रुपए लेती थीं। गौहर अपने जमाने की सबसे रईस तवायफ थीं। उनकी अमीरी का रुतबा इतना गजब का था कि महात्मा गांधी ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में इनसे आर्थिक मदद मांगी थी।
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यूपी के आजमगढ़ में हुआ था जन्म
गौहर जान का जन्म 26 जून 1873 को आजमगढ़ में हुआ था। गौहर जान का असली नाम एंजेलीना था। उनके परिवार में अलग-अलग धर्मों के लोग थे। इनके नाना ब्रिटिश मूल के थे जबकि नानी भारतीय मूल की थीं। मां का नाम विक्टोरिया हैमिंग था और पिता अमेरिकन क्रिशिचियन थे। उनका नाम विलियम था। लेकिन जब एंजेलीना 8 साल की थीं तब इनका तलाक हो गया।
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इसके बाद उनकी मां विक्टोरिया ने इस्लाम कुबूल कर लिया और अपना नाम मल्लिका जान कर लिया। उन्हीं ने उनका नाम एंजेलीना से बदलकर गौहर जान रख दिया और बेटी को लेकर बनारस आ गईं। मल्लिका जान को संगीत में शुरू से रुचि थी इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को भी संगीत की शिक्षा दी और क्लासिकल म्यूजिक में एक्सपर्ट बनाया।

कहलाई जानें लगीं कोलकाता की डांसिंग गर्ल
गौहर ने डांस और म्यूजिक की सारी ट्रेनिंग यहीं से ली और 1887 में अपनी पहली परफॉर्मेंस दी। तब इनकी खूब तारीफ हुई। 1896 में जब इन्होंने कलकत्ता में परफॉर्म किया कि लोग इनके मुरीद हो गए। इन्हें कोलकाता की डांसिंग गर्ल कहा जाने लगा। अपनी परफॉर्मेंस से दरभंगा के महाराजा को इम्प्रेस कर ये उनकी सभा की गायिका बन गईं।
महफिल में आते थे राजा-महाराजा
महफिल में इनके गाने सुनने वाले राजा-महाराजा अपने कीमती जेवर नजराने में दे दिया करते थे। ये इतनी स्वाभिमानी थीं कि उस जमाने में कभी इन्होंने 1 हजार से कम नजराना नहीं लिया। नतीजन ये अपने जमाने की सबसे मशहूर और रईस गायिका थीं। उस समय ग्रामोफोन कंपनी भारत में अपना बिजनेस बढ़ाना चाहती थी। जब कंपनी ने देखा कि गौहर जान के गाने सुनने के लिए भीड़ उमड़ती है, लेकिन वो आम जनता के लिए नहीं थे तो उन्होंने इसे अवसर के तौर पर इस्तेमाल किया।
उन्होंने गौहर जान से गाने रिकॉर्ड करने की रिक्वेस्ट की। गौहर जान ने एक गाने के लिए 3 हजार रुपए फीस की डिमांड की और वो मान गए। कोलकाता के एक होटल में दो कमरों में स्टूडियो तैयार किया गया और रिकॉर्डिंग हुई।
गौहर जान की फीस उस जमाने में इतनी ज्यादा थी कि ब्रिटिश सरकार ने भी इन्हें फीस कम करने का नोटिस भी भेजा। इसके बावजूद गौहर ने हमेशा अपनी शर्तों पर काम किया। उन्होंने कभी अपनी फीस कम नहीं की। गौहर ने 1902 से 20 तक 20 भाषाओं में करीब 600 गाने रिकॉर्ड किए। 10 जनवरी 1930 को लंबी बीमारी से लड़ते हुए उनका निधन हो गया।