बॉलीवुड की सबसे बेरहम खलनायिका... मिलती थीं भर-भरकर गालियां, शादी के बाद फिल्मों में आकर बन गईं वैम्प
एक अदाकारा जो बॉलीवुड में हीरोइन बनने आई थीं, वो भी शादी के बाद। उन्होंने अपनी शादी की बात छुपाई, ...और पढ़ें

खलनायिकी के लिए इस एक्ट्रेस को मिलती थीं गालियां। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। खलनायिकी के मामले में सिर्फ एक्टर्स ही नहीं, बल्कि एक्ट्रेसेस भी काफी आगे रहीं। कुछ एक्ट्रेसेस ने बड़े पर्दे पर इतनी जबरदस्त खलनायिकी दिखाई कि असल जिंदगी में उन्हें भर-भरकर गालियां मिलीं।
आज हम आपको एक ऐसी ही अदाकारा के बारे में बताने जा रहे हैं जो इंडस्ट्री में हीरोइन बनने आई थीं, लेकिन खलनायिका बन गईं और फिर पर्दे पर ऐसी दहशत फैलाई कि लेखक फिल्म में उनका कैरेक्टर नहीं बल्कि नाम ही लिख दिया करते थे। वह छोटे से छोटे रोल्स में दर्शकों का ध्यान खींचने में आगे रहती हैं।
राजेश खन्ना संग काम कर चुकीं एक्ट्रेस
इस अदाकारा ने फिल्मों में शादी के बाद एंट्री की थी। खूबसूरती में उनका कोई जवाब नहीं था और अभिनय में तो वह अव्वल थी हीं। उन्होंने राजेश खन्ना (Rajesh Khanna), देव आनंद, अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सितारों के साथ ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम कर चुकी हैं। 70 के दशक में लगभग ज्यादातर फिल्मों में वह अपनी छोटी सी भूमिका निभाकर भी प्रभाव छोड़ जाती थीं।
शादी के बाद फिल्मों में आईं अदाकारा
यह अदाकारा कोई और नहीं बल्कि बिंदू (Actress Bindu) हैं। वह सिर्फ 18 साल की थीं, जब उन्होंने चंपकलाल जावेरी से शादी कर ली थी। उन्हें हमेशा से ही फिल्मों में एक्टिंग का शौक था और उनके पति ने भी उन्हें सपोर्ट किया। साल 1962 में बिंदू ने फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर शुरू किया और उस वक्त वह 21 साल की थीं। तब किसी को नहीं पता था कि बिंदू शादीशुदा हैं। चंपकलाल ने भी हमेशा बिंदू का साथ दिया।
मोना डार्लिंग बन छाईं एक्ट्रेस
बिंदू फिल्मी दुनिया में हीरोइन बनने आई थीं, लेकिन किस्मत ने उन्हें वैम्प बना दिया। जंजीर मूवी में मोना डार्लिंग का किरदार सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ था और इसके बाद उन्होंने कटी पतंग, दो रास्ते, इत्तेफाक, हवस और दास्तां जैसी फिल्मों में वैम्प के रोल से शोहरत हासिल की।
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अवॉर्ड की जगह मिलीं सिर्फ गालियां
एक बार बिंदू ने कहा था कि उन्हें कभी अवॉर्ड्स भले ही न मिले हों, लेकिन गालियां भर-भरकर मिलीं और यही उनके अवॉर्ड्स थे। फिल्मफेयर के मुताबिक, एक इंटरव्यू में बिंदू ने कहा था-
वैम्प की छाप मुझ पर बनी रही क्योंकि मैंने शादी के बाद अपना करियर शुरू किया था, इसलिए जो भी मेरे सामने आया, मैंने उसे पकड़ लिया। मैं पैसे और शोहरत दोनों कमा रही थी। जल्द ही मैं हीरोइन बनने के बारे में भूल गई। मुझे हीरोइन जितनी ही शोहरत मिली और कुछ गालियां भी। वो गालियां मेरे अवॉर्ड थे। जब राइटर कहानी लिखते थे, तो वे कैरेक्टर के नाम की जगह मेरा नाम लिख देते थे। यह एक तारीफ थी।
84 साल की बिंदू अब फिल्मी दुनिया से दूर हैं। आखिरी बार एक्ट्रेस को फिल्म महबूबा (2008) और ओम शांति ओम (2007) में देखा गया था।
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