मोहम्मद रफी का ऐसा अपमान! जब एक जिद्दी एक्टर ने उनकी आवाज में गाना गाने से किया था साफ मना
भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक समय ऐसा भी आया था जब अभिनेता विनोद खन्ना ने मोहम्मद रफी की आवाज पर गाना गाने से इनकार कर दिया था। ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप सोच सकते हैं कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा भी दिन आया था जब एक उभरते हुए सुपरस्टार ने मोहम्मद रफी (Mohammad Rafi) की आवाज पर होंठ हिलाने से मना कर दिया था? कौन था वो जिद्दी सुपरस्टार और किसने उसके अहंकार को किया चकनाचूर? आज के किस्से में जानेंगे।
ये 70 के दशक के उस सुनहरे दौर की एक सच्ची घटना है जब हमारा बॉलीवुड अपनी रोमांटिक छवि को त्यागकर मारधाड़ और एक्शन की ओर बढ़ रहा था। 1970 ये वो दौर था जब 50 और 60 के दशक की वह मीठा मेलोडी और पेड़ो के इर्द-गिर्द गाते हुए एक्टर्स का युग अपनी आखिरी सांसे गिन रहा था।
बदल रहा था संगीत की दुनिया का मिजाज
सलीम जावेद जैसे दिग्गज लेखक ने 'जंजीर' (Zanjeer) जैसी फिल्मों से बॉलीवुड को एंग्री यंग मैन और अंडरवर्ल्ड का ऐसा दौर शुरू कर दिया था जिसने दर्शकों की पसंद को रातों-रात बदल दिया था। ये मार संगीत की दुनिया पर भी पड़ी थी। साल 1969 में जब आर डी बर्मन (RD Burman) के संगीत से सजी फिल्म आराधना रिलीज हुई तो इसमें एक गाना था 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू' (Mere Sapno ki Rani Kab Aayegi Tu)। जिसे किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने गाया था। इसने एक झटके में पूरे बॉलीवुड को अपनी दीवाना बना लिया था।

विनोद खन्ना ने क्यों किया रिजेक्ट?
हर निर्माता-निर्देशक को ये लगने लगा कि उनके लिए अगर किशोर कुमार गाना गाएंगे तो वो जरूर हिट होगा। ये एक तरीके से मोहम्मद रफी के लिए सीधी चुनौती थी। यही चीज विनोद खन्ना के दिमाग पर सवार हो गई। अपनी फिल्म हाथ की सफाई में जब उन्हें पता चला कि 'वादा करले साजना' रफी गाने वाले हैं तो उन्हें लगा कि रफी साहब की नर्म और मखमली आवाज उनके रफ एंड टफ कैरेक्टर पर सूट नहीं करेगी। इसलिए उन्होंने इसपर होंठ हिलाने से मना कर दिया।
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इसके बोल लिखे थे गुलशन बावरा (Gulshan Bawara) ने और कल्याण जी-आनंद (KalyanJi- Anand) की जोड़ी ने संगीत दिया था। इस म्यूजिक जोड़ी को यकीन था कि इस गाने में जो दर्द, ठहराव और कशिश चाहिए वो रफी से बेहतर और कोई नहीं दे सकता। इस वजह से विनोद खन्ना को उन्होंने कड़े शब्दों में समझाया और इस गाने की रिकॉर्डिंग महबूब स्टूडियों में की गई। रफी की आवाज में ये गाना आज भी उस समय के सबसे खूबसूरत और एवरग्रीन गानों में से एक माना जाता है।