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    एक धुन, तीन दिग्गज गायक... 55 साल पहले क्यों Rafi Sahab और आशा भोसले के बाद किशोर दा को बुलाना पड़ा स्टूडियो!

    Updated: Sat, 30 May 2026 01:40 PM (IST)

    आज हम आपको 55 साल पहले आए उस कालजयी गीत के बारे में बताएंगे जिसकी धुन सुनते ही ये गानी सीधे जुबान पर चल जाता है। Gen Z इसे आज भी सुनना पसंद करते हैं। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. फिल्म 'अंदाज' का गाना हो रहा वायरल

    2. रफी और आशा भोसले के बाद किशोर कुमार ने इसे गाया

    3. किशोर कुमार का वर्जन सबसे लोकप्रिय हुआ

    एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। कुछ धुनें सिर्फ कानों को सुकून नहीं देतीं, बल्कि वो सफर का हमसफर बन जाती हैं। साल 1971 में सिल्वर स्क्रीन पर गूंजी एक ऐसी ही जादुई आवाज ने हमें भी गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया था।

    क्या है इस लाजवाब धुन के पीछे की कहानी?

    आज हम जिस गाने की बात कर रहे हैं उस मास्टरपीस को एक नहीं बल्कि तीन अलग-अलग आवाजों में रिकॉर्ड किया गया था। एक आवाज थी बेफ्रिकी और जिंदादिली की तो वहीं दूसरी थी प्यार का चुलबुला अहसास। सिनेमा के इतिहास में ऐसा बहुत कम होता है जब एक ही ट्रैक पर संगीत के तीन अलग-अलग लेजेंड्स अपनी रूह उड़ेल दें। चलिए अब आपको इस लाजवाब धुन के पीछे की कहानी बताते हैं।

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    हम बात कर रहे हैं फिल्म 'अंदाज' (Andaaz) के गाने 'जिंदगी एक सफर है सुहाना'(Zindagi EK Safar Hai Suhana) की। इसे रफी (Mohammad Rafi), आशा भोसले (Asha Bhosle) और किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने गाया है लेकिन किशोर कुमार का वर्जन सबसे ज्यादा हिट हुआ था। उनकी खास 'यूडलिंग'और मोटरबाइक पर घूमते राजेश खन्ना का अंदाज आज भी लोगों के जहन में ताजा है।

    राजेश खन्ना और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गीत 

    जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना राजेश खन्ना और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया है। इस गाने को सबसे पहले रफी साहब और आशा भोसले से रिकॉर्ड करवाया गया। लेकिन अभी भी इस गाने में वो जान नहीं आई जिसकी जरूरत थी। इसके बाद ये गाना किशोर कुमार के पास गया और हंसते-गाते हुए उन्हें बिना किसी खास प्रैक्टिस के जिस तरह से इसे गा दिया ये उनके तजुर्बे के ओर इशारा करता है।

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    किशोर कुमार को दिलाया फिल्मफेयर अवॉर्ड

    इस गाने के संगीतकार शंकर-जयकिशन थे और गीतकार हसरत जयपुरी ने इसे तैयार किया था। गीत के बोलों में जिंदगी के फलसफे को इतनी सादगी और खूबसूरती से पिरोने के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट लिरिसिस्ट अवॉर्ड भी मिला था। शंकर-जयकिशन की शानदार धुन और हसरत जयपुरी के शब्दों के इसी तालमेल ने इस गाने को हमेशा के लिए अमर बना दिया।

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