'महिलाओं की इच्छाओं पर सिर्फ पुरुष...', Toxic की आलोचना पर Yash ने तोड़ी चुप्पी
टॉक्सिक (Toxic) को लेकर मिल रही आलोचनाओं पर यश (Yash) ने बात की है। साथ ही कहा है कि यह फिल्म बच्चों के लिए नहीं है।

टॉक्सिक की आलोचना पर यश की दो टूक। फोटो क्रेडिट- एक्स

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स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। इस साल आठ जनवरी को अभिनेता यश की 40वीं जन्मतिथि पर फिल्म ‘टाक्सिक: इंट्रोड्यूसिंग राया’ का टीजर जारी होने के साथ ही फिल्म विवादों में घिर गई।
टीजर में कब्रिस्तान के पास कार में यश के किरदार राया और एक महिला के बीच अंतरंग दृश्य से शुरू हुई बहस निर्देशक गीतू मोहनदास के जवाब, आम आदमी पार्टी की महिला शाखा द्वारा कर्नाटक राज्य महिला आयोग में शिकायत और फिर जुलाई में जारी ‘लेडीज एंड लेडीज’ प्रचार वीडियो लगातार सुर्खियों में रहे।
फिल्म की आलोचना पर बोले यश
इन विवादों पर हाल ही में यश (Yash) ने स्पष्ट किया कि शीर्षक की टैगलाइन (ए फेरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स ) से बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि यह फिल्म बच्चों या बच्चों जैसी सोच रखने वाले वयस्कों के लिए नहीं है। वहीं आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि फिल्म देखने के बाद तमाम आलोचनाओं, सवालों और विवादों के जवाब खुद मिल जाएंगे।

उन्होंने कहा कि जब लोग फिल्म देखेंगे, तब वे समझेंगे कि महिलाओं के लिए अपनी इच्छाओं के बारे में बात करना एक तरह से वर्जित विषय बन गया है। ऐसी चीजों पर चर्चा करने का अधिकार सिर्फ पुरुषों को ही क्यों हो? ‘टाक्सिक’ (Toxic) की निर्देशक एक महिला हैं और उनका मानना है कि महिलाओं की अपनी इच्छाएं और कल्पनाएं भी उनका अधिकार हैं।
अगर कोई महिला अपनी इच्छाओं को जाहिर करने से डरती है, तो यह भी गलत है। उन्होंने आगे कहा कि इन दृश्यों के पीछे की मंशा बिल्कुल स्पष्ट है। इन्हें किसी दिखावे या सनसनी के लिए नहीं, बल्कि सार्थक सवाल उठाने के लिए रखा गया है।
गीतू मोहनदास सेट करेंगी नया ट्रेंड?
बहरहाल, ‘टाक्सिक’ को सिर्फ गैंगस्टर और एक्शन फिल्म के तौर पर देखना इसकी पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। फिल्म का एक अहम पहलू यह भी है कि गीतू मोहनदास ने महिला निर्देशक के तौर पर इतने बड़े बजट और बड़े सितारों वाले मास सिनेमा की कमान संभाली है। यह उनके लिए सिर्फ एक व्यावसायिक फिल्म नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मक दृष्टि को उस सिनेमा के बीच स्थापित करने की चुनौती भी है, जिस पर लंबे समय से पुरुष निर्देशकों का दबदबा रहा है।
मास सिनेमा में बदलेगा नजरिया
यश के साथ इस साझेदारी को लेकर गीतू ने कहा था कि यश ने मेरे सपने पर विश्वास किया और उसे अपने कंधों पर उठाया। जब हर कोई मुझ पर संदेह कर रहा था, तब उन्होंने मुझे एक मौका दिया। ऐसे में ‘टॉक्सिक’ एक दिलचस्प सवाल खड़ा करती है कि क्या महिला निर्देशक की मौजूदगी सिर्फ बड़े बजट के मास सिनेमा की भाषा, उसके किरदारों और महिलाओं को देखने के नजरिए में भी कोई वास्तविक बदलाव ला सकती है?
टॉक्सिक का बजट
इस संदर्भ में फिल्म वितरक राज बसंल कहते हैं कि 500 करोड़ रुपये का दांव किसी महिला निर्देशक पर लगाना इसके लिए बड़े साहस की जरूरत है। कहीं न कहीं यश को यकीन रहा होगा तभी उन्होंने ऐसा किया। यश अभिनेता होने के साथ निर्माता भी हैं। उन्हें कहानी पर यकीन रहा होगा तभी गीतू को इतने बड़े बजट की फिल्म सौंपी।
अभी तक के विजुअल्स शानदार हैं। वह दर्शकों पर अपना प्रभाव बनाने में कामयाब रही हैं। हिंदी डब में फिल्म को करीब बीस करोड़ की ओपनिंग मिलने की संभावना है। अगर यह फिल्म सफल होती है तो इस धारणा को बल मिलेगा कि महिला निर्देशक गैंगस्टर, सेक्स, हिंसा, बड़े एक्शन वाली फिल्म भी बेहतर बना सकती है। वह कई महिला निर्देशकों के लिए भविष्य में दरवाजा खोलेंगी।
क्या चीज टॉक्सिक को बनाती है अलग?
एक ही फिल्म में पांच लोकप्रिय अभिनेत्रियों नयनतारा (Nayanthara), कियारा आडवाणी (Kiara Advani), हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत का एक साथ आना ‘टाक्सिक’ को बाकी बड़ी फिल्मों से अलग बनाता है। खास बात यह है कि ये सभी अपने-अपने सिनेमा और दर्शक वर्ग में मजबूत पहचान रखती हैं।

ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन कहते हैं कि मुझे लगता है कि ऐसा कॉम्बिनेशन कभी आया नहीं है। कुछ फिल्मों में तीन हीरोइन रही हैं लेकिन उनके हीरो भी अलग होते थे। इस बार एक हीरो पांच नामचीन अभिनेत्रियां है। यह सिर्फ फिल्म की शोभा बढ़ाने वाले नाम नहीं हैं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्र में व्यावसायिक सिनेमा की मजबूत कलाकार हैं।
अलग-अलग सिनेमा से आईं अभिनेत्रियां
नयनतारा दक्षिण की बड़ी स्टार हैं, कियारा और हुमा हिंदी सिनेमा में लोकप्रिय हैं, तारा की युवा दर्शकों के बीच पहचान है और रुक्मिणी वसंत कन्नड़ सिनेमा का जाना-पहचाना नाम हैं। यह बहुत अलग पैकेजिंग की गई है। केजीएफ के बाद रॉकी भाई (केजीएफ फिल्म में यश के पात्र का नाम) की लोकप्रियता अलग स्तर पर हैं। हमारे यहां ओपनिंग के लिए ड्राइविंग फोर्स हीरो ही रहा है, लेकिन इन अभिनेत्रियों की मौजूदगी भी बॉक्स ऑफिस को सब जगह फायदा जरूर देगी।
आजकल हीरोइनों के दम पर भी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर चल रही हैं। वहीं टॉक्सिक की सफलता के मायने को लेकर अतुल कहते हैं कि टॉक्सिक चलेगी तो नया बेंचमार्क स्थापित करेगी। हर सफल फिल्म आपको एक ट्रेंड देती है। अगर टॉक्सिक सफलता के नए आयाम छूती है तो यह भी नया ट्रेंड देगी कि ऐसा भी सिनेमा हो सकता है।
फिल्मों से जुड़े दिलचस्प तथ्य...
- यश इसमें डबल रोल में नजर आएंगे
- फिल्म की शूटिंग करीब 200 दिन चली
- बेंगलुरु, मुंबई, गोवा, जयपुर और तूतीकोरिन में हुई शूटिंग
- कियारा आडवाणी ने सात महीने की प्रेग्नेंसी में किया शूट।
- फिल्म का बजट लगभग 700 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, हालांकि मेकर्स ने आधिकारिक बजट घोषित नहीं किया है।
- फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट मिला है, यानी सिर्फ वयस्क देख सकेंगे।
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