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    'मैं रीटेक नहीं दूंगा...' रिकॉर्डिंग के बाद Rafi ने क्यों 53 साल पहले भूखे- प्यासे रहकर दोबारा गाया था ये गाना

    Updated: Fri, 03 Apr 2026 07:44 PM (IST)

    साल 1973 की फिल्म 'जंजीर' के मशहूर गीत 'दीवाने हैं दीवानों को' की रिकॉर्डिंग से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है। लता मंगेशकर अपनी परफॉर्मेंस से स ...और पढ़ें

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। साल 1973 में अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) की एक फिल्म आई थी नाम था 'जंजीर' (Zanjeer)। इस मूवी में उनके साथ जया बच्चन, प्राण, इफ्तेखार और ओम प्रकाश जैसे कलाकार नजर आए। इस फिल्म का एक गाना है 'दीवाने हैं दीवानों को' जोकि खूब पॉपुलर हुआ था।

    इस गाने के बोल गुलशन बावरा ने लिखे थे और संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने दिया है। लेकिन क्या आपको पता है 53 साल पुराना ये गीत जो आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है इसकी रिकॉर्डिंग के बाद लता जी ने जो किया उसने सभी को चौंका दिया।

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    कैसे बदली गाने की किस्मत?

    साल 1972 में मुंबई के तारदेव स्टूडियो में जब रफी (Mohammad Rafi) और लता ने ये गाना गाया तो संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी को लगा यही अब फाइनल है। लेकिन लता जी को ये उतना पसंद नहीं आया और उन्हें अधूरा सा महसूस हुआ। फिर जो हुआ वो इस गाने की किस्मत बदल देने वाला था। चलिए जानते हैं इस गीत के पीछे की असली कहानी।

    Rafi (3)

    लता को अच्छा नहीं लगा अपना पार्ट

    जब लता जी ने अपना पार्ट इस गाने के लिए गाया तो रफी जी के साथ-साथ सभी को ये पसंद आया लेकिन लता दोबारा रीटेक चाहती थीं। रफी साहब ने कहा कि लता जी आपने ये गाने बहुत ही अच्छा गाया है इसे दोबारा गाने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन लता मंगेशकर सिर्फ एक गायिका नहीं थी वो हर चीज को परफेक्ट करने पर विश्वास रखती थीं। वो अड़ गईं कि उन्हें एक और रीटेक चाहिए। अचानक से स्टूडियो में माहौल शांत हो गया। सामने खड़े दिग्गज संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी ने उन्हें इसकी मंजूरी दे दी।

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    इसके लिए रफी साहब को भी बुलाया गया क्योंकि गाना फिर से रिकॉर्ड होना था। जिस दिन ये अमर गीत रिकॉर्ड हो रहा था उस समय रमजान का महीना चल रहा था और रफी साहब ने रोजा रखा था। सुबह से पानी की एक बूंद भी नहीं पी थी और वो भूखे-प्यासे रहकर गाना रिकॉर्ड कर रहे थे। गाना दोबारा रिकॉर्ड हुआ और ओके होने के बाद रफी साहब घर निकल लिए। लेकिन वो घर पहुंचे ही थे कि फिर लता जी ने कहा कि माफ कीजिए मुझे एक बार फिर गाना है।

    Rafi (2)

    बेहद थके हुए थे रफी

    हर कोई चौंक गया लेकिन संगीतकार लता को निराश नहीं करना चाहते थे इसलिए मान गए। रफी साहब बेहत थके हुए थे और एक और रीटेक के लिए तैयार नहीं थे। सबकुछ ठीक है तो एक रिटेक क्यों? रफी के ये बोल उस समय निकले क्योंकि वो गाना फिर से रिकॉर्ड करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे। रफी ने साफ कह दिया - अब मैं कोई रीटेक नहीं दूंगा और स्टूडियो के गेट की तरफ बढ़ गए।

    गुलशन बावरा ने पलट दी कहानी

    रफी साहब स्टूडियो से बाहर निकल रहे थे, तभी उन्हें गीतकार गुलशन बावरा दिखाई दिए। गुलशन बावरा उनकी तरफ दौड़कर पहुंचे और खुश होकर बोले, ‘रफी भाई आपको पता है फिल्म में यह गाना मैं कह रहा हूं.’ गुलशन की बात सुनकर रफी साहब हैरान हो गए। उन्होंने ये गाना अमिताभ बच्चन को दिमाग में रखकर गाया था। ये सुनते ही रफी को यकीन नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने पूरा गाना अमिताभ के हाव भाव और चेहरे को सोचकर गाया था।

    रफी ये सब सोचकर वापस स्टूडियो आ गए और गाना लता जी के साथ फिर रिकॉर्ड हुआ। इस गाने के जरिए दर्शकों ने पहली बार गुलशन बावरा को स्क्रीन पर परफॉर्म करते देखा और लगा मानों वहीं इसे गा रहे हों।

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