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    Do Deewane Seher Mein Review: न कहानी में रवानगी है, न गानों में दीवानगी... फिल्म देखने से पहले पढ़ लें रिव्यू

    By priyanka singhEdited By: Rinki Tiwari
    Updated: Fri, 20 Feb 2026 03:28 PM (GMT+05:30)

    Do Deewane Seher Mein Movie Review: मृणाल ठाकुर और सिद्धांत चतुर्वेदी की रोमांटिक ड्रामा 'दो दीवाने सहर में' को थिएटर में देखने से पहले इसका रिव्यू पढ ...और पढ़ें

    दो दीवाने सहर में मूवी का रिव्यू। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

    दो दीवाने सहर में मूवी का रिव्यू। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

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    प्रियंका सिंह, मुंबई। क्या है ये ब्यूटी स्टैंडर्ट्स, उनमें फिट होना जरूरी है? बी द वे यू आर यानी तुम जैसी हो, खूबसूरत हो, काफी हो। मृणाल ठाकुर का पात्र फिल्म में जब यह डायलॉग फिल्म 'दो दिवाने सहर' में कहती हैं, तो आज की फिल्टर वाली दुनिया में यह सवाल सही तो लगते हैं, लेकिन मुद्दा न तो नया है और न ही उसे उस तरह से दिखाया है, जैसे दिखाने की जरुरत थी।

    क्या है फिल्म की कहानी?

    कहानी पटना से मुंबई आकर मार्केटिंग में काम कर रहे शशांक शर्मा (सिद्धांत चतुर्वेदी) की है, जिसमें श को स बोलने के कारण आत्मविश्वास की कमी है, वह मीटिंग रूम में प्रेजेंटेशन देने से बचता है, उसे लगता है, लोग मजाक बनाएंगे।

    वहीं मुंबई की ही रहने वाली कंटेंट क्रिएटर रोशनी श्रीवास्तव (मृणाल ठाकुर) खुद को चश्मे के पीछे छुपाती है, क्योंकि उसे लगता है कि वह अपनी बड़ी बहन (संदीपा धर) की तरह सुंदर नहीं।

    Do Deewane Seher Mein Movie

    रिश्ते में आने से डरती है, क्योंकि उसे लगता है कि वह खूबसूरत नहीं है, इसलिए शायद लड़का उसे छोड़ दे। इन दोनों का परिवार इन्हें शादी के लिए मिलवाता है और आगे क्या होता है, उसके लिए फिल्म देखनी होगी।

    रवि उद्यावर का निर्देशन कैसा है?

    साल 1977 में रिलीज हुई फिल्म घरौंदा के गाने दो दिवाने शहर में... से प्रभावित इस फिल्म के शीर्षक की तरह इस फिल्म के शहर में दिवानगी कम है। 'मॉम' जैसी प्रभावशाली फिल्म बना चुके रवि उद्यावर इस पुराने मुद्दे को आज के इंटरनेट मीडिया के जमाने में दूसरों को देखकर खुद को बेहतर बनने या कम आंकने की समस्या को नए तरीके से नहीं दिखा पाए हैं।

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    कहां डगमगाई 'दो दीवाने सहर में'?

    फिल्म की कहानी, पटकथा और संवाद लिखने वाली अभिरुचि चांद श को स बोलने वाली दिक्कत की गहराई में नहीं जाती है। शशांक को लोगों के सामने बात करने में डर लगता है, लेकिन वह डर कब, कहां से पैदा हुआ उसे दर्शाने वाला एक भी सीन नहीं है।

    वहीं रोशनी का चश्मे के पीछे छिपने का कारण भी नाकाफी लगता, क्योंकि वह एक आधुनिक परिवार से है, जहां उसे डेटिंग ऐप पर लड़के ढूंढने की भी इजाजत है। जिसका असर उस पर इतने लंबे समय तक है। फिल्म में शशांक और रोशनी के दूसरे शहर घूमने जाने वाले सीन गैरजरूरी लगते हैं। गाने ऐसे नहीं रहे जो याद रहें। यह सब बिना कारण फिल्म की लंबाई बढ़ाते हैं।

    Mrunal Siddhant Movie

    खैर, इन सबके बीच सिद्धांत और मृणाल की जोड़ी फ्रेश लगती है। इंटरवल के बाद कहानी फिल्म के असली मुद्दे तक पहुंचती है और उस सार को दिखाती है कि जैसे हो, वैसे बेहतर हो, लेकिन तरीका असरदार नहीं।

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    कैसी है कलाकारों की कलाकारी?

    अभिनय की बात करें तो सिद्धांत चतुर्वेदी की मेहनत उनके रोल में दिखती है। कमजोर लाइनों को भी वह पूरी शिद्दत से कहते हैं। मृणाल ठाकुर रोशनी के रोल में ठीक लगी हैं, ऐसे रोल उनके लिए नए नहीं हैं। संदीपा धर को अपने लिए बेहतर रोल चुनने चाहिए।

    Do Deewane Seher Mein

    रोशली की माडर्न सोच वाली नानी और मां के रोल में इला अरुण और आयशा रजा याद रह जाते हैं। हालांकि इन्हें और स्क्रीनस्पेस मिलना चाहिए था।

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