Mardaani 3 Review: खौफनाक खेल, फिर जरूरी सवाल... रानी मुखर्जी की 'मर्दानी 3' पिछली फिल्मों से ज्यादा खतरनाक?
Mardaani 3 Review: रानी मुखर्जी अभिनीत 'मर्दानी 3' (Mardaani 3) आखिरकार सिनेमाघरों में आ चुकी है और फिल्म इस बार गंभीर मुद्दे पर बनी है जो वाकई में झक ...और पढ़ें

'मर्दानी 3' में रानी शानदार, फिर कहां चूक गई फिल्म?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
फिल्म – मर्दानी 3
मुख्य कलाकार – रानी मुखर्जी, जानकी बोडीवाला, मल्लिका प्रसाद, प्रजेश कश्यप, जीशू सेनगुप्ता
निर्देशक – अभिराज मिनावाला
समय – दो घंटा 10 मिनट
रेटिंग – तीन
प्रियंका सिंह, नई दिल्ली। हर बार लड़कियां ही क्यों? यह सवाल जब रानी मुखर्जी (Rani Mukerji) का पात्र एसएसपी शिवानी शिवाजी राय पर्दे पर पूछती हैं, तो दिमाग और दिल सोचने पर मजबूर हो जाता है, आखिर क्यों? साल 2014 में रिलीज हुई मर्दानी का सफर, मर्दानी 2 (2019) से होते हुए अब मर्दानी 3 (Mardaani 3 Review) तक पहुंच गया है।
कहानी है शुरू होती है राष्ट्रपति पदक से सम्मानित शिवानी शिवाजी राय (रानी मुखर्जी) से, जो मानव तस्करी को रोकने के लिए लगातार काम कर रही है। इस बार उस पर बुंदेल शहर आए तुर्कीए के भारतीय राजदूत की लापता बेटी को ढूंढने का जिम्मा सौंपा जाता है। राजदूत की बेटी के साथ उसके घरेलू सहायक की बेटी भी होती है। शिवानी खोजबीन शुरू करती है, जिसमें पता चलता है कि इसके पीछे भीख मंगवाने वाले माफिया की मुखिया अम्मा (मल्लिका प्रसाद) है। शिवानी अपने तेज-तर्रार तरीके से जांच शुरू करती है।
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फिल्म की कहानी आयुष गुप्ता, दीपक किंगरानी और बलजीत सिंह मारवाह ने मिलकर लिखी है। क्या कहानी इस फ्रेंचाइज के पहले दोनों फिल्मों के मुकाबले मजबूत है? तो इसका जवाब ना में होगा। लेकिन एक बार फिर मुद्दा मजबूत और झकझोरने वाला है। गरीब बच्चियों की तस्करी केवल भीख मांगने और देह व्यापार करवाने तक नहीं, बल्कि दवाओं के प्रयोग के लिए भी एक बॉडी की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
फिर भले ही वो उस प्रयोग के दौरान मर जाएं। 'लवयात्रि' फिल्म के निर्देशन करने वाले अभिराज का निर्देशन रानी के कंधों पर ज्यादा टिका हुआ नजर आया, क्योंकि रानी इस फ्रेंचाइज और शिवानी के शेरनी अंदाज से वाकिफ हैं।
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हालांकि अभिराज ने इस बात का ख्याल जरूर रखा है कि वह शिवानी को सिंघम न बनाएं और वास्तविकता के करीब रखें। पिछली मर्दानी की तरह क्लाइमेक्स में दमदार गाने की जरुरत महसूस होती है, जो इसमें नहीं है।
कई जगहों पर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगे क्या होने वाला है, कौन पुलिस से मिला हुआ है, कौन अम्मा से। इस बार कहानी शिवानी की निजी जिंदगी को कम छूती है।
बच्चियों को अगवा करने वाले और उन पर दवाओं के प्रयोग करने वाले दृश्य विचलित करते हैं। यशा जयदेव रामचन्दानी की एडिटिंग ने फिल्म की अवधि को नियंत्रण में रखा है। आर्तुर जुराव्स्की के कैमरे में कैद दृश्य कई बार बिना संवादों के बोलते हैं।
रानी मुखर्जी ने शिवानी शिवाजी राय को आत्मसात कर लिया है। वह शिवानी के तेजतर्रार दिमाग, उसके काम करने के तरीकों को समझती हैं। पहले ही सीन से रानी साल 2019 वाली मर्दानी के पास आसानी से ले जाती हैं।
सनकी अम्मा के रोल में मल्लिका प्रसाद (Mallika Prasad) अभिनय के मामले में रानी को बराबर की टक्कर देती हैं। प्रजेश कश्यप फिल्म में नए विलेन के रोल में ताजगी लाते हैं। जानकी बोडीवाला संक्षिप्त रोल में अपनी जगह बनाती हैं। जीशू सेनगुप्ता को और सीन दिए जाने चाहिए थे। वह मेहमान भूमिका तक सिमट जाते हैं।यह भी पढ़ें- Mardaani 3 X Review: क्राइम को खत्म करने आईं Rani Mukerji क्या कहानी के साथ कर पाईं न्याय? दर्शकों का आया फैसला