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भारत में क्यों 'बैन' हुई दिलजीत दोसांझ की Satluj मूवी? सीबीएफसी से लेकर OTT से हटाने तक, क्या है पूरा विवाद?

Published: Mon, 06 Jul 2026 11:33 AM (IST)

Zee5 ने भारत में दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को रिलीज करने के कुछ ही दिनों बाद अपने प्लेटफॉर्म से ...और पढ़ें

भारत में बैन हुई सतलुज मूवी

भारत में बैन हुई सतलुज मूवी

HighLights

  1. भारत में बैन हुई सतलुज मूवी

  2. क्या है इसके पीछे की वजह?

  3. क्यों ओटीटी से हटाई गई दिलजीत की फिल्म?

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। तीन साल पहले दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' मूवी को सीबीएफसी का सर्टिफिकेट ना मिलने की वजह से रिलीज नहीं किया जा सका। लेकिन उम्मीद की थोड़ी रोशनी अब दिखी थी जब जी5 पर इसे रिलीज किया गया। हालांकि यह रोशनी भी ज्यादा देर तक नहीं जल सकी क्योंकि दो दिन के अंदर ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।

आखिर क्यों दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की सतलुज मूवी को लेकर इतना विवाद हो रहा है? क्यों इसे भारत में देखने पर प्रतिबंधित किया जा रहा है? आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।

भारत में क्यों नहीं देखी जा सकती सतलुज?

सतलुज (Satluj) का पहले नाम पंजाब 95 (Punjab 95) रखा गया था। फिल्म की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है, जिन्होंने 80-90 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौर में हजारों अज्ञात शवों के कथित तौर पर गैर-कानूनी रूप से अंतिम संस्कार किए जाने का मामला उजागर किया था।

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खालरा ने ऐसे सबूत जुटाए थे जिनसे पता चलता था कि पुलिस ने बिना संबंधित परिवारों को बताए  चुपचाप उन शवों का अंतिम संस्कार किया था।

खालरा का अपहरण और हत्या

खालरा की जांच ने पंजाब के सबसे अशांत दौर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। 1995 में खालरा का अपहरण कर लिया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। बाद में उनके अपहरण और हत्या के मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया।

सीधे तौर पर राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय होने के कारण, फिल्म को सर्टिफिकेशन हासिल करने में परेशानी हुई। तीन साल पहले सीबीएफसी (CBFC) ने इस फिल्म में 127 कट लगाने के लिए कहा था वहीं फिल्ममेकर्स का कहना था कि उनकी मांगे इन कट्स से कहीं ज्यादा थी। मेकर्स के अनुसार सीबीएफसी ने खालरा के नाम तक को बदलने की मांग की थी।

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ओटीटी से क्यों हटाई गई फिल्म?

ZEE5 पर यह फिल्म 3 जुलाई को रिलीज हुई और दो दिन बाद ही 5 जुलाई को इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। हालांकि जी5 ने इसके पीछे की वजह साफ तौर पर ना बताते हुए सिर्फ वर्तमान हालात का हवाला दिया है। प्लेटफॉर्म का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए इसे रोका गया है।

Zee5 ने कहा कि वह फिल्म और उसके मेकर्स के साथ खड़ा है, हालांकि उसने इसे हटाने की वजह नहीं बताई। ओटीटी पर यह फिल्म बिना किसी कट के रिलीज हुई थी। जी5 ने एक बयान जारी कर लिखा, 'रिलीज के बाद से 'सतलुज' को जो रिस्पॉन्स मिला है, वह वाकई जबरदस्त रहा है। हम हर उस दर्शक के बहुत आभारी हैं जिसने फिल्म को सब्सक्राइब किया, देखा और उसे सपोर्ट किया। आपका प्यार और सपोर्ट हमारे लिए और उन सभी लोगों के लिए बहुत मायने रखता है जिन्होंने इस कहानी को साकार किया'।

वो 5 कारण जो फिल्म को बनाते हैं विवादित

1. लोकतंत्र की कमजोरी दर्शाती है फिल्म- जहां एक तरफ भारत में लोकतंत्र ही संविधान का स्तंभ माना है वहीं यह फिल्म दिखाती है कि कैसे 80-90 के दशक में पंजाब में इसी प्रजातंत्र को सिस्टम के नीचे दबाने की कोशिश की गई थी। 

2. मानवाधिकारों के उल्लंघन का पर्दाफाश: फिल्म में खालरा ने मानवाधिकारों के उल्लंघन का पर्दाफाश किया था। जिसमें प्रशासन ने शवों का बिना उनके परिवार को बताए अंतिम संस्कार किया गया था।

3. प्रशासन के फर्जी एनकाउंटर का मुद्दा: फिल्म में प्रशासन द्वारा 25 फर्जी एनकाउंटर का मुद्दा दिखाया गया है जिसने खोखले सिस्टम की पोल खोली है।  

4. पंजाब के इतिहास का काला सच: 80-90 के दशक को अगर पंजाब के इतिहास का काला चैप्टर बोलें तो गलत नहीं होगा क्योंकि लोकतंत्र के साथ-साथ लोगों के इमोशन, अधिकार यहां तक की उनके जीने के हक को भी मारा गया था।

5. पॉलीटिकल सिस्टम की खोलती पोल: यह फिल्म देश की पॉलीटिक्स में गहराई से जमे भ्रष्टाचार की पोल खोलती है। 

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प्लेटफॉर्म दी ये वजह

Zee5 ने यह बताए बिना कि फिल्म अब भारत में क्यों स्ट्रीम नहीं हो रही है, कहा, 'मौजूदा हालात को देखते हुए, 'सतलुज' फिल्म अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं होगी। हम सही प्रक्रिया अपनाकर हर उचित तरीका आजमाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि जल्द से जल्द इस फिल्म को अपने दर्शकों तक वापस लाया जा सके'।

हालांकि Zee5 ने आधिकारिक तौर पर फिल्म को हटाए जाने का संबंध इसके पहले हुए सर्टिफिकेशन विवाद या किसी कानूनी निर्देश से नहीं जोड़ा है, लेकिन इस कदम ने 'सतलुज' के मुश्किल सफर पर फिर से लोगों का ध्यान खींचा है।

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सतलुज के बारे में

'सतलुज', हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित एक दमदार बायोपिक ड्रामा फिल्म है। इसमें दिलजीत दोसांझ, अर्जुन रामपाल (Arjun Rampal) और सुविंदर विक्की की मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra) की असल जिंदगी की उस मुहिम को दिखाती है, जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में सरकारी संरक्षण में हुई गैर-न्यायिक हत्याओं और बड़े पैमाने पर गुप्त रूप से किए गए अंतिम संस्कारों का पर्दाफाश किया था।

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