बहादुरगढ़ में नवजातों की तस्करी करने वालों ने 10 राज्यों में 50 से ज्यादा बेचे बच्चे, कोख में ही कर देते थे सौदा
बहादुरगढ़ में नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यह गिरोह 10 राज्यों में 50 से अधिक बच्चों को बेच चुका है, जिनमें से 4 ...और पढ़ें

अभी तक की जांच में देश के 10 राज्यों के अंदर इस गिरोह द्वारा 50 से अधिक बच्चों को बेचने के मामलों का पता चल चुका है।

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जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़। नवजात बच्चों को खरीदने और लाखों रुपये में बेचने वाले गिरोह की हर दिन नई परतें खुल रही हैं। अभी तक की जांच में देश के 10 राज्यों के अंदर इस गिरोह द्वारा 50 से अधिक बच्चों को बेचने के मामलों का पता चल चुका है। गिरोह के सरगना के पकड़े जाने के बाद संख्या इससे भी ज्यादा मिल सकती है। हालांकि, पुलिस ने अभी तस्करी किए गए बच्चों की संख्या 40 ही पुष्टि की है।
गिरोह के पांच और सदस्यों की अभी तलाश
इनमें से दो बच्चे बरामद हो चुके हैं। उनको रेवाड़ी भेजा गया है। दो अन्य बच्चों के परिवार की पहचान हो चुकी है। पंजाब से लेकर हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ में बच्चों की खरीद-फरोख्त का यह काला कारोबार गोद दिलाने के नाम पर चल रहा था। इस मामले में अभी तक पुलिस ने नौ लोगों की गिरफ्तारी की है। इनमें सात तो गिरोह के सदस्य हैं और दो वह दंपती है, जिन्होंने सवा दो लाख में अपना बच्चा बेच दिया था। गिरोह के पांच और सदस्यों की अभी तलाश है। इनमें सरगना भी है।
डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर बना गिरोह
इस गिरोह का सरगना पंजाब का रहने वाला करीब 31 वर्षीय परगट सिंह उर्फ लाडी नाम का शख्स बताया जा रहा है। वही असली मास्टरमाइंड है और फरार है। इस गिरोह के तीन सदस्यों को बहादुरगढ़ में बाइपास से दबाेचा और 1 अप्रैल को न्यायालय में पेश किया गया था। उनके पास से तीन दिन का नवजात बच्चा बरामद हुआ था। पकड़े गए सदस्यों में गाजियाबाद के रहने वाले सलीम अहमद और आकिल मलिक के अलावा पंजाब के मुक्तसर की रहने वाली बेअंत कौर शामिल हैं। इनके पास दाे गाड़ी बरामद हुई। दूसरी गाड़ी में गिरोह का सरगना और एक सदस्य थे, जो भाग निकले थे।
साल 2022 से सक्रिय है गिरोह
पुलिस काे गाड़ी सी कुछ दस्तावेज मिले, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ी तो पता लगा कि वर्ष 2022 से यह गिरोह काम कर रहा था। अब तक इस गिरोह ने कुल कितने बच्चों का सौदा किया है, इसका सटीक आंकड़ा तो अभी पुलिस के पास भी नहीं है, लेकिन जितने मामलों का पता लगा है उनकी संख्या रोजाना बढ़ रही है। गिरोह के तीन मुख्य सदस्य 10 अप्रैल तक रिमांड पर हैं। उनसे पूछताछ में ही यह जानकारी मिल रही है।
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ग्राहक तलाशने वाले चार आरोपित गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने राजफाश के पांच दिन बाद चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनमें फरीदाबाद के बल्ल्भगढ़ की भगत सिंह कालाेनी का संदीप पवार, छत्तीसगढ़ के रायपुर के सेक्टर-27 का रुद्रा प्रताप, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पंचशील ग्रीन-2 का विजय और दिल्ली के शाहदरा के अशोक नगर का मोहन पांचाल शामिल है। मोहन हाल में गाजियाबाद में रहता है। ये सभी नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त के नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। सप्लाई चेन को मजबूत करने, ग्राहकों से संपर्क और सौदे को अंतिम रूप देते थे। इनको पांच दिन के रिमांड पर लिया गया।
नवजात को बेचने वाले माता-पिता भी हुए गिरफ्तार
जिस बच्चे के साथ गिरोह पकड़ा गया था उसको बेचने वाले दंपती को पुलिस ने पंजाब से गिरफ्तार किया था। दोनों पति-पत्नी को पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ चल रही है। इनमें पंजाब के फरीदकोट के रहने वाले कुलविंदर व उसकी पत्नी परमजीत है। इन्हें अबोहर से पकड़ा गया। आरोपित दंपती के पास पहले से दो बच्चे हैं। तीसरा बच्चा बेटा हुआ तो उसे गिरोह काे सवा दो लाख में बेच दिया था। इनसे पूछताछ में और खुलासे की संभावना है। बच्चा बेचने वाले और खरीदने वाले जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उन्हें पुलिस गिरफ्तार करेगी। कई टीमें जांच में जुटी हैं।
डिजिटल प्लेटफाॅर्म से लेकर अस्पतालों तक बिछाया जाल
यह गिरोह डिजिटल प्लेटफॉर्म से लेकर अस्पतालाें तक अपना जाल बिछाए हुए था। इंटरनेट पर गिरोह के सदस्य आपस में संपर्क में रहते थे। इंटरनेट पर ही निसंतान दंपती के रूप में अपने ग्राहकों को तलाशते थे। सौदा होने के बाद बच्चे की डिलीवरी देते थे। पैसा कैश में लेते थे, ताकि कोई सुबूत न रहे।
आखिरी बार डिलीवरी के लिए जाते समय ही यह गिरोह बहादुरगढ़ में पकड़ा गया था। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह के सरगना परगट सिंह की पत्नी नर्स है। उसकी पत्नी के साथ ही साली की संलिप्तता भी सामने आई है।
वहीं, गिरोह की गिरफ्तार सदस्य महिला बेअंत कौर की बेटी भी नर्स है। पुलिस को जानकारी मिली है कि इनके जरिये ही यह गिरोह अस्पतालों से नवजात बच्चों और उनके माता-पिता के बारे में जानकारी जुटाता था। फिर वहीं से बच्चों को खरीदने-बेचने का खेल शुरू होता था।
कोख में ही कर देते थे सौदा
यह गिरोह केवल डिलीवरी के बाद ही बच्चों को नहीं खरीदता था, बल्कि काफी बच्चों का सौदा इस गिरोह ने कोख में ही कर दिया था। कई बार अस्प्तपाल में ऐसे दंपती आते थे, जिनको पहले से दो या तीन बच्चे होते थे और उनको गर्भ ठहर जाता था। फिर वे उसे अनचाहे बच्चे के गर्भपात के लिए आते थे। ऐसे दंपती से यह गिरोह अपने नेटवर्क के जरिये संपर्क करता था।
अस्पतालों तक नर्स और अन्य के जरिये इस गिरोह ने जाल फैला रखा था। ऐसे दंपती को यह पहले ही बच्चे को दो-तीन लाख में खरीदने का ऑफर देते थे। ऐसे में दंपती भी गर्भपात की बजाय बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार हो जाता था।
इतना ही नहीं बच्चे की डिलीवरी तक गर्भवती महिला की निगरानी रखते थे। उसके लिए खाने-पीने की चीजें भिजवाते थे, ताकि बच्चा स्वस्थ हो। फिर अपनी तय की गई जगह पर डिलीवरी करवाते थे। इस तरह से यह गिरोह काम कर रहा था।
पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि जितने भी बच्चों का सौदा हुआ है, उसमें बेचने और खरीदने वाले सभी लोग गिरफ्तार होंगे, क्योंकि अवैध तरीके से बच्चा लेना जुर्म है।
दो दिन से लेकर 21 दिन तक के बच्चों का किया सौदा
जितने सौदाें का पुलिस को पता चला है, उनकी जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने दो दिन से लेकर 21 दिन तक के नवजात शिशु का सौदा किया। चूंकि गिरोह का नेटवर्क 10 राज्यों में फैला है और 50 से ज्यादा मामलों का पता चला है कि सभी जगहों पर छापेमारी के लिए पुलिस टीमें निकली हुई हैं। पकड़े गए आरोपितों के बैंक खातों और प्रापर्टी की जांच की जा रही है कि अब तक उन्होंने इस अवैध धंधे से जुटाई काली कमाई से क्या-क्या खरीदा है।
दस्तावेज भी बनाकर देता था गिरोह
अभी तक 40 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हुई है। संख्या इससे ज्यादा मिलने से अभी इनकार नहीं किया जा सकता। इस गिरोह के सरगना के पकड़े जाने पर ही सटीक तौर पर पता चलेगा कि कुल कितने बच्चों का सौदा किया। अभी तक नौ आरोपित पकड़े गए हैं। पांच और ऐसे हैं, जिनकी तलाश चल रही है। आरोपितों की संख्या बढ़ सकती है। गिरोह का सरगना गुरु कृपा नाम से बच्चों को गोद दिलाने की एजेंसी चलाता था। कुछ लोगों को बच्चा बेचने के बाद उनको कुछ दस्तावेज भी दिए गए। इन दस्तावेजों की बरामदगी के बाद पता चलेगा कि किस तरह के कागजात तैयार किए गए। जहां तक बच्चों को गोद लेने का सवाल है तो उसकी एक कानूनी प्रक्रिया है और सक्षम अधिकारी के सामने केवल बच्चा देने वाले और गोद लेने वाले उपस्थित होते हैं। कानूनी दस्तावेज तैयार होते हैं। इस प्रक्रिया में कोई बिचौलिया नहीं होता। बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में पैसे का लेन-देन अवैध होता है।
-मयंक मिश्रा, डीसीपी, बहादुरगढ़।
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