ईएसआईसी फरीदाबाद अस्पताल में इलाज में लापरवाही से मौतें, परिजनों ने मांगा जवाब और मुआवजा
फरीदाबाद के ईएसआईसी अस्पताल में इलाज न मिलने के कारण हुई मौतों के मामले गंभीर हो रहे हैं, जहां मृतकों के परिजनों ने डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उ ...और पढ़ें
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ईएसआइसी अस्पताल फरीदाबाद। (फाइल फोटो)
HighLights
ईएसआईसी अस्पताल फरीदाबाद में इलाज न मिलने से मौतें।
परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजा मांगा।
अस्पताल प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की, सुधार का आश्वासन।
अनिल बेताब, फरीदाबाद। ईएसआइसी अस्पताल में इलाज न मिलने के कारण हुई मौतोंं के मामले अब गंभीर रूप ले रहे हैं। मृतकों के स्वजन लापरवाह डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। साथ ही मुआवजे की भी मांग की जा रही है। समय पर इलाज न मिलने के कारण कई सामाजिक संगठनों में भी ईएसआइसी अस्पताल प्रबंधन के प्रति रोष है।
गाजीपुर निवासी श्याम बिहारी गिरि की कूल्हे की हड्डी टूटने पर सामान की कमी का हवाला देते हुए आपरेशन टाल दिया गया था, बाद में उनकी मौत हो गई । अब स्वजन की ओर से मामले की जांच के साथ ही 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की गई है।
अधिवक्ता के माध्यम से ईएसआइसी मेडिकल कालेज व अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजा गया है। ऐसे ही पर्वतीय कालोनी निवासी जितेंद्र यादव और उनकी पत्नी बबली की पांच माह की बेटी की भी इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई थी। इस मामले में हरियाणा मानव अधिकार आयोग में शिकायत की गई है।
केस स्टडी-01
22 फरवरी को गाजीपुर गांव निवासी श्याम बिहारी अपने घर में गिर गए थे। इस दौरान उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। स्वजन उन्हें ईएसआइसी अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर आ गए। उनकी जांच की गई और वार्ड में भर्ती कर लिया गया। कई दिन भर्ती करने के बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ ने उन्हें कहा है कि घर चले जाओ, आराम करो, आपरेशन का सामान आ जाएगा तो आगे इलाज शुरू करेंगे।
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श्याम बिहारी के स्वजन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों को तकलीफ भी बयान की है, पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई दिनों बाद श्याम बिहारी को भर्ती करके आपरेशन किया गया, मगर तब तक उनकी स्थिति बिगड़ती गई। स्वजन ने देरी से इलाज शुरू किए जाने पर उनकी मौत के मामले में अस्पताल को नोटिस भेजा है और 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।
केस स्टडी-02
दो अस्पतालों में भटके, नहीं मिला इलाज
कपड़ा कालोनी निवासी जितेंद्र यादव और बबली देवी 17 मई को अपनी पांच माह की बेटी को तीन नंबर ईएसआइसी अस्पताल लेकर गए थे। बेटी कई दिनों से दूध नहीं पी पा रही थी। जितेंद्र यादव के अनुसार शुगर, बीपी और फेफड़ों में पानी होने के चलते बच्ची की तबीयत बिगड़ रही थी। मगर ईएसआइसी अस्पताल के डाक्टरों ने नागरिक अस्पताल भेज दिया। वहां गए तो इलाज नहीं मिला। सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। दिल्ली जाते हुए रास्ते में ही बच्ची की मौत हो गई।
बिगड़ रही हैं स्वास्थ्य सेवाएं
ईएसआइ अस्पताल और मेडिकल कालेज से जुड़े रहे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा. जसवंत सिंह कहते हैं कि गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों को अगर समय पर इलाज नहीं मिलता तो आगे स्थिति बिगड़ जाती है। दोनों मामलों में ही कुछ ऐसा ही हुआ है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन को सुधार की जरूरत है।
चार प्रतिशत जमा कराने पर नहीं मिल रहा इलाज
वासी-प्रवासी कल्याण एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष यादव कहते हैं कि जिन श्रमिकों का मासिक वेतन 21 हजार रुपये है। उनका ईएसआइ कार्ड बना हुआ है। ऐसे श्रमिकों के वेतन में से 0.75 प्रतिशत और 3.25 प्रतिशत कंपनी का ईएसआइ कारपोरेशन के खाते में जमा होता है। चार प्रतिशत अंशदान की एवज में श्रमिक को ईएसआइ डिस्पेंसरी और अस्पताल में इलाज मिलना चाहिए। मगर कई बार बिगड़े सिस्टम के कारण श्रमिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
हमारे पास शिकायत और नोटिस आया है । हमने मामले की गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी बना दी है।
वैसे हम प्रयास करते हैं कि किसी भी मरीज को कोई परेशानी न हो। - डॉ. संदीप कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, ईएसआइसी अस्पताल
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