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    पार्ट-2: हर साल के बजट के बाद भी फरीदाबाद के स्कूल क्यों बदहाल? अंधेरी कक्षाएं, टूटे टॉयलेट और गंदी पानी की टंकी

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 07:02 PM (IST)

    सरकारी स्कूलों में शिक्षा के दावों के बावजूद फरीदाबाद के कई विद्यालयों में अंधेरी कक्षाएं, टूटे शौचालय और गंदी पानी की टंकियां बदहाली बयां कर रही हैं। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों में अंधेरी कक्षाएं और टूटे शौचालय।

    2. पानी की टंकी गंदी, स्वच्छ पेयजल का अभाव।

    3. बजट के बावजूद मूलभूत सुविधाओं की कमी चिंताजनक।

    निभा रजक, फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों की स्थिति आज भी चिंता का विषय बनी हुई है। स्कूलों में छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कई विद्यालयों में कक्षाएं अंधेरे में संचालित हो रही हैं। कहीं बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं है तो कहीं पर्याप्त रोशनी के अभाव में विद्यार्थियों को पढ़ाई करनी पड़ रही है। स्कूल परिसर में लगी पानी की टंकी भी बदहाल है। टंकी की नियमित साफ-सफाई और रखरखाव नहीं होने से छात्रों को स्वच्छ पेयजल मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    शौचालय तक उपयोग के योग्य नहीं

    गर्मी के मौसम में यही टंकी सैकड़ों विद्यार्थियों की प्यास बुझाने का एकमात्र साधन है, लेकिन इसकी स्थिति देखकर अभिभावकों में भी चिंता बढ़ रही है। सबसे खराब हाल शौचालयों का है। कई शौचालय जर्जर होकर कंडम घोषित होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। कहीं दरवाजे टूटे हुए हैं तो कहीं पानी की व्यवस्था नहीं है। कई शौचालय उपयोग के लायक नहीं बचे हैं, जिससे छात्र-छात्राओं, विशेषकर बालिकाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    हर साल का बजट कहां है?

    स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी मानकों की भी खुलेआम अनदेखी हो रही है। 'दैनिक जागरण' की ओर से अभियान 'साल बदला लेकिन स्कूलों की स्थिति नहीं' की तीसरी कड़ी में मंगलवार को शहर के सरकारी स्कूलों की पड़ताल की गई। स्कूलों की स्थिति ने शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार के दावों को हवा हवाई साबित कर दिया। साथ ही शौचालयों की मरम्मत, पानी की व्यवस्था तथा साफ-सफाई के नाम पर हर वर्ष जारी होने वाले बजट पर भी सवाल खड़ा कर दिया।

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    पानी की टंकी पर पसरी गंदगी

    दैनिक जागरण संवाददाता दोपहर करीब 12 बजे राहुल कालोनी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला पहुंची। स्कूल में विद्यार्थियों के पीने के पानी की टंकी पर गंदगी नजर आई। शौचालयों के दरवाजे भी नीचे से टूटे हुए थे। सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 170 है। यहां परिसर में जलभराव दिखाई दिया। स्कूल के प्रवेश द्वार पर गंदगी पसरी थी। सरकारी स्कूल की इस तरह की स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

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    कक्षाओं में अंधेरा, कैसे हा पढ़ाई?

    जागरण टीम दोपहर डेढ़ बजे एनआईटी तीन स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में पहुंची। यह स्कूल दो शिफ्टों में संचालित होता है। पहली शिफ्ट में छठी से बारहवीं और दूसरी शिफ्ट में प्राइमरी विंग के विद्यार्थी पढ़ते हैं। यहां शिक्षा विभाग की ओर से करीब दस साल पहले लगाया गया जनरेटर कंडम हो गया है।

    स्कूल में बिजली के बैकअप की व्यवस्था नहीं होने के कारण बिजली जाने के बाद कक्षाओं में अंधेरा छा जाता है। मंगलवार को भी यही स्थिति दिखाई दी। उमसभरी गर्मी में विद्यार्थी परेशान नजर आये।

    यह स्थिति जिले के अधिकांश स्कूलों की है। स्कूलों में लगाए गए एक-एक जनरेटर की लागत डेढ़ से दो लाख है, लेकिन डीजल के पैसे नहीं मिलने के कारण जेनरेटर का इस्तेमाल नहीं हो सका और अब कंडम हो गए हैं।

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    वाटर कूलर में नहीं आ रहा था ठंडा पानी

    करीब दो बजे एनआईटी एक स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआइटी एक पहुंची। यहां स्कूल में शौचालय की स्थित ठीकठाक दिखाई दी। पानी की भी उचित व्यवस्था थी। एक वाटर कूलर में ठंडा पानी आ रहा था, लेकिन दूसरे में गर्म पानी था। टीम द्वारा पूछने पर स्कूल में तर्क दिया कि वर्षा के कारण छात्राओं के स्वास्थ्य को देखते हुए कनेक्शन हटाया गया है। इस स्कूल में छात्राओं की संख्या एक हजार से अधिक है। इस स्कूल में भी बिजली का बैकअप नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से लगाया गया जनरेटर कंडम हो गया है।

    "किसी भी सूरत में बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। शौचालयों की सफाई, पानी की टंकी की साफ-सफाई और वाटर कूलर को ठीक कराने के आदेश कर दिए जाएंगे। यदि लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही स्कूल मुखिया से जवाब मांगा जाएगा।"

    -बसंत कुमार ढिल्लो, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।

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