क्या फरीदाबाद मेट्रो में सुरक्षित हैं यात्री? क्यों बेअसर साबित हो रहे हैं मेट्रो स्टेशनों पर लगे CCTV कैमरे
फरीदाबाद के मेट्रो स्टेशनों पर पुराने सीसीटीवी कैमरों के कारण यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है, जिससे संदिग्धों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। पुलिस ...और पढ़ें

फरीदाबाद के मेट्रो स्टेशनों पर पुराने सीसीटीवी कैमरों के कारण यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है। इमेज एआई
HighLights
मेट्रो स्टेशनों पर पुराने कैमरे दे रहे धुंधली तस्वीरें।
पुलिस को संदिग्धों की पहचान में हो रही मुश्किल।
आधुनिक हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाने की तत्काल आवश्यकता है।
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। शहर के मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ चल रहा है। कई स्टेशनों पर प्रवेश द्वार, एस्केलेटर और सीढ़ियों पर लगे सीसीटीवी कैमरे पुरानी तकनीक के होने के कारण स्पष्ट तस्वीर देने में सक्षम नहीं हैं।
ऐसे में किसी घटना या अपराध की जांच के दौरान संदिग्धों की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती बन रहा है। जिला पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों की जांच के दौरान मेट्रो के सीसीटीवी कंट्रोल रूम में फुटेज खंगालने पर कैमरों की वास्तविक स्थिति सामने आ रही है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, कई कैमरों की वीडियो गुणवत्ता इतनी कमजोर है कि चेहरों की स्पष्ट पहचान नहीं हो पाती। विशेष रूप से प्रवेश और निकास द्वारों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग अपेक्षित स्तर की नहीं मिली।
बता दें, सेक्टर-23, संजय कालाेनी से भागी दो किशोरियों के बारे में जांच के दौरान पता चला कि वे बल्लभगढ़ या वाइएमसीए मेट्रो स्टेशन से दिल्ली की ओर गई हैं।इस इनपुट के बाद जब चौकी के पुलिसकर्मी दोनों मेट्रो स्टेशनों पर सीसीटीवी फुटेज चेेक करने पहुंचे तो पता चला कि कैमरों की स्पष्टता बेहद कमजोर थी।
कपड़ों के कलर सही नहीं दिख रहे थे। चेहरे पर सफेदी ज्यादा दिख रही थी। इसीलिए पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा था। लिहाजा पुलिस निराश होकर लौट गई।
पूर्व पुलिस अधिकारी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यात्रियाें की बढ़ती संख्या और बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आधुनिक एआई आधारित और हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी सिस्टम की जरूरत है।
इससे अपराधों की रोकथाम के साथ-साथ जांच एजेंसियों को भी समय पर सटीक साक्ष्य उपलब्ध हो सकेंगे। यात्रियों का भी मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुराने कैमरों को जल्द बदलना आवश्यक है।
मेट्रो प्रशासन के जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। समय-समय पर कैमरों का रखरखाव और तकनीकी परीक्षण कराया जाता है। जहां आवश्यकता होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से पुराने कैमरों को अत्याधुनिक हाई-डेफिनिशन कैमरों से बदला जाएगा, ताकि निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सके।