मानसून में अरावली के 10 सीक्रेट स्पॉट बना रहे NCR वालों को दीवाना; दिल्ली के पास छिपे हैं झरने, झील और रहस्यमयी जंगल
अरावली पर्वत श्रृंखला मानसून में दिल्ली-एनसीआर के लिए एक वरदान बन जाती है। गुरुग्राम और फरीदाबाद के पास स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क, दमदमा झील, मांगरबन ...और पढ़ें

एमजी रोड स्थित बायोडायवसिर्टी पार्क में भ्रमण करते पर्यटक। जागरण
HighLights
मानसून में अरावली की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली चरम पर होती है।
दिल्ली-एनसीआर के पास कई झरने, झीलें और रहस्यमयी जंगल हैं।
गुरुग्राम-फरीदाबाद में बायोडायवर्सिटी पार्क, दमदमा झील प्रमुख आकर्षण हैं।
प्रियंका दुबे मेहता, गुरुग्राम। अरावली का इलाका दिल्ली एनसीआर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। विकास के तारों-जालों से निकलकर प्रकृति की शीतल गोद में पहुंचाती पर्वत श्रृंखला का यह हिस्सा जो दिल्ली एनसीआर का ग्रीन लंग कहा जाता है वह ऐसे ही नहीं है।
मानसून में इसका रूप और निखर आता है। इसकी हरियाली और बढ़ जाती है और इसका वातावरण और शांत और सुकून भरा हो जाता है। अरावली के सौंदर्य के बारे में, इसकी महत्ता के बारे में कई कहानियां, किंवदंतियां, पौराणिक कथाएं और इतिहास मौजूद हैं।
सभ्यताओं की शुरुआत और विकास की गवाह रही दिल्ली एनसीआर की अरावली पर्वत श्रृंखला का रूप जितना मानसून में निखरता है उतना पूरे साल नहीं मिलता। अरावली में बने पर्यटन स्थल लोगों के लिए नए पिकनिक स्पॉट बन गए हैं।
इस बरसात में लोग निकल पड़ते हैं नए रोमांच की तलाश में, झरनें की कलकल कोलाहल, पत्तों पर गिरते बरसात की पानी की तरंगों, बरसात की सुबहों की उन खामोशियों के बीच पत्तों की ओट लिए बैठे पक्षियों की सरसराहट, उनकी चहचहाहट सुनते, नैसर्गिक खूबसूरती के हर एक आयाम को महसूस करते। आज सबरंग के इस अंक में हम अरावली के इन पर्यटन स्थलों की यात्रा पर निकलते हैं।
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रोमांच जगाता सफर
पिछले डेढ़ दशकों में अरावली की महत्ता, इसकी खूबसूरती में चार चांद लग गए हैं, इसके पर्यटन स्थलों की वजह से। कहीं लंबी वॉक के लिए बने ट्रैक, कहीं से गिरते झरने, दूर किसी चट्टान से उतरता पानी, ऊंचाई पर बने मंदिरों से आती घंटियों की मधुर ध्वनियां, जंगलों के बीच चलते हुए अचानक दिखाई पड़ते ऐडवेंचर स्थल और खानपान की दुकानें सचमुच हैरत में डालती हैं। जितना अरावली की गोद में उतरते हैं उतने ही रोमांच से भर देती है।
माहाभारत काल से जुड़ा है नाता
पौराणिक कथा में वर्णित है कि महाभारत काल में युधिष्ठिर ने तीर मारा तो अरावली की सूखी चट्टानों से जलधारा फूट पड़ी थी। पहाड़ी इलाके ने हरियाली की धानी चादर ओढ़ ली थी, इस पौराणिक कथा को मानो मानसून में जीवंतता मिल जाती है। मानसून में इसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्यों इसका प्राकृतिक सौंदर्य हर कालखंड में आकर्षण का केंद्र रहा है, क्यों यहां की चट्टानों की परतों से सभ्यताओं के विकास की कहानियां निकल आती हैं।

मानसून के साथ ही आ जाती है रौनक
मानसून की पहली बारिश के बाद गुरुग्राम और फरीदाबाद की अरावली अचानक बदलने लगती है। धूल से ढकी पहाड़ियां मानो धानी चादर तान लेती हैं। सूखी झाड़ियां नई पत्तियों से भर उठती हैं, चट्टानों के बीच उगी घास हवा के साथ लहराने लगती है और वर्षों से शांत पड़े प्राकृतिक जल स्रोतों में फिर से पानी की हलचल दिखाई देने लगती है।
यही वह मौसम है जब दिल्ली-एनसीआर के हजारों लोग सप्ताहांत में अरावली की ओर निकल पड़ते हैं। कोई सूर्योदय देखने आता है, कोई ट्रैकिंग के लिए, कोई पक्षियों की तस्वीरें लेने और कोई सिर्फ शहर के शोर से कुछ घंटे दूर रहने के लिए। पिछले एक दशक में तस्वीर तेजी से बदली है।
सोशल मीडिया, साइक्लिंग समूहों, ट्रेकिंग क्लबों और नेचर वॉक ने गुरुग्राम और फरीदाबाद की अरावली को वीकेंड पर्यटन का नया केंद्र बना दिया है। मानसून सीजन में अरावली से अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग उद्देश्य के लिए जाया जा सकता है।

सुहानी मॉर्निंग वॉक के लिए बायोडायवर्सिटी पार्क
अगर शहर के बाहर नहीं जाना हो तो गुरुग्राम के बीचोबीच स्थित ऑक्सीजन चेंबर यानी कि अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क की ओर रुख किया जा सकता है, खासतौर पर जब आप एक सुखद मॉर्निंग वॉक का लुत्फ लेना चाहते हों। आइ एम गुड़गांव की संस्थापक और इस पार्क को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली लतिका ठुकराल के मुताबिक 380 से 700 एकड़ में फैले इस पार्क में हर वो चीज मिलेगी जो एक प्रकृति प्रेमी को चाहिए।
इसका मीलों लंबा ट्रैक, यहां की दुर्लभ वनस्पतियां, खूबसूरत पक्षी और कभी-कभी दिखते जंगली जानवर और सुकून भरी सैर। मानसून के दौरान इसकी पगडंडियां और प्राकृतिक वनस्पति इसे शहर के भीतर एक अलग दुनिया का अहसास कराती हैं।
सुबह छह बजे से ही मॉर्निंग वॉकर, बर्ड वॉचर, प्रकृति प्रेमी, फोटोग्राफर और ट्रेकिंग समूह यहां पहुंचने लगते हैं। अच्छी बात यह है कि इस पार्क में प्रवेश पूरी तरह निश्शुल्क है, इसलिए यह दिल्ली-एनसीआर के सबसे सुलभ इको-टूरिज्म स्थलों में गिना जाता है।

ड्राइविंग या साइकिलिंग के लिए लेपर्ड ट्रेल
अगर आप साइकिलिंग करना चाहते हैं या पहाड़ियों में ड्राइविंग का लुत्फ लेना चाहते हैं तो आपके लिए है अरावली में बना लेपर्ड ट्रेल। नाम के मुताबिक अभी भली ही विकसित न हो सका हो लेकिन यह पहाड़ियों के बीच से गुजरने वाला एक सुंदर ड्राइविंग और साइक्लिंग रूट है।
हालांकि, मॉनसून में कुछ पाबंदियां और नियम भी होते हैं ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके। सुबह-सुबह यहां बड़ी संख्या में साइकिल चालक दिखाई देते हैं। बायोडायवर्सिटी पार्क से इतर यहां केवल सुकून और रोमांच ही नहीं, खानपान और मनोरंजन का भी आनंद मिलता है।
शाम के समय कैफे और व्यू-पॉइंट लोगों से भर जाते हैं। बरसात के मौसम में सड़क के दोनों ओर हरियाली बढ़ जाने से इसका आकर्षण कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि वन विभाग बार-बार अपील करता है कि पर्यटक निर्धारित मार्ग से बाहर न जाएं, क्योंकि यह क्षेत्र वन्यजीवों का भी आवास है। तेंदुए, लकड़बग्घे, सियार और कई अन्य वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण कॉरिडोर भी है।

अरावली को प्रतिबिंबित करती दमदमा झील
एक झील है जिसमें अरावली का प्रतिबिंब दिखता है, सोचिए कितना सुरम्य होगा वो नजारा। अरावली की पहाड़ियों के बीच लगभग तीन हजार एकड़ क्षेत्र में फैली दमदमा झील मानसून के दौरान अपने सबसे सुंदर रूप में दिखाई देती है।
दक्षिणी हरियाणा की बारिश और आसपास की पहाड़ियों से आने वाले पानी के कारण झील का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे इसका विशाल जलक्षेत्र और भी आकर्षक हो उठता है। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ियों पर छाए बादल और शांत वातावरण इसे दिल्ली-एनसीआर के सबसे लोकप्रिय मानसूनी पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।
यहां बोटिंग, प्रकृति भ्रमण, बर्ड वाचिंग और फोटोग्राफी जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं। सर्दियों में यहां कई प्रवासी पक्षी भी आते हैं, जबकि मानसून में झील के आसपास की वनस्पति और जैव विविधता अपने चरम पर होती है। हालांकि, भारी बारिश के दौरान जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए झील के किनारों और पानी में उतरते समय प्रशासन की सलाह और सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

भारत यात्रा केंद्र तक की प्राकृतिक यात्रा
शहर के बिलकुल नजदीक अगर अरावली के भीतर की लंभी यात्रा और चढ़ाई करनी हो तो भारत यात्रा केंद्र जाया जा सकता है। इसके भीतर जाने के बाद आप अंदाजा ही नहीं लगा सकते कि बाहर साइबर सिटी है, उसकी भागमभाग है।
अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित भारत यात्रा केंद्र की स्थापना 1983 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की ऐतिहासिक भारत यात्रा के बाद की गई थी। कन्याकुमारी से दिल्ली तक हुई इस पदयात्रा के अनुभवों के आधार पर देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे केंद्र विकसित किए गए, ताकि ग्रामीण विकास, सामाजिक जागरूकता और जनसंवाद को बढ़ावा दिया जा सके।
समय के साथ भोंडसी स्थित इस परिसर का एक हिस्सा हरियाणा वन विभाग के अधीन आ गया और बाद में इसे प्रकृति संरक्षण तथा इको-टूरिज्म के लिए विकसित किया गया। आज मानसून में यह क्षेत्र घनी हरियाली, अरावली की पहाड़ियों और शांत प्राकृतिक वातावरण के कारण प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। यहां नेचर ट्रेल, पर्यावरण शिक्षा और कैंपिंग जैसी गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है।

पौराणिक जिज्ञासा जगाती मांगरबनी और धौंज
अगर किसी एक जगह को अरावली का सबसे संवेदनशील और सबसे खूबसूरत प्राकृतिक क्षेत्र कहा जाए तो वह मंागरबनी है। सदियों से संरक्षित इस प्राकृतिक वन क्षेत्र में ऐडवेंचर है, प्राकृतिक सुंदरता है और साथ ही रहस्य हैं, इतिहास है और पौराणिक कथाएं हैं। ट्रीज ऑफ देल्ही में प्रदीप कृष्ण लिखते हैं कि यहां के बाबा की मान्यता की वजह से पहाड़ी का यह हिस्सा हराभरा बना रहा।
मानसून में यहां की हरियाली, विशाल देशी पेड़ और प्राकृतिक शांति लोगों को आकर्षित करती है, एक पहाड़ी पर खड़े होकर दूर दूरी पहाड़ी का नजारा लिया जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग की लोकप्रियता बढ़ी है। लेकिन यही लोकप्रियता चिंता का कारण भी बनी है।
विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अनियंत्रित पर्यटन, अवैध रास्ते और अतिक्रमण इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ा रहे हैं। इसी वजह से वन विभाग ने निगरानी मजबूत करने के लिए मंगर और धौज क्षेत्र में वॉच टावर तथा कैमरा ट्रैप जैसी व्यवस्थाएं शुरू की हैं, ताकि पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सके।
कुछ इतिहासकारों के प्रयासों से यहां पाषाण काल के औजारों और शैलचित्रों के प्रमाण भी मिले हैं जिससे पता चलता है कि यहां पर सभ्यताएं विकसित हुई हैं। इतिहास का अध्ययन कर रहे शैलेश बैसला के मुताबिक अभी इस इलाके में सभ्यताओं के विकास के बहुत से प्रमाण छिपे हैं जिसपर काम किया जाना चाहिए।

फोटोग्राफी के लिए धौंज-कोट-पाली है खास
फरीदाबाद की अरावली में मानसून अपने साथ एक ऐसा आकर्षण भी लेकर आता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। पाली गांव की पहाड़ियों में स्थित झरना मंदिर के पास अच्छी बारिश के बाद प्राकृतिक झरना फूट पड़ता है। सालभर सूखी रहने वाली चट्टानों से गिरता पानी कुछ दिनों के लिए पूरे इलाके को जीवंत बना देता है।
यही वजह है कि बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में लोग इस छिपे हुए प्राकृतिक झरने को देखने पहुंचते हैं। हालांकि यह स्थायी झरना नहीं है, पूरी तरह मानसून पर निर्भर मौसमी जलप्रपात है। धौज और कोट गांव की अरावली पहाड़ियों में मानसून के दौरान कई छोटे-छोटे मौसमी झरने सक्रिय हो जाते हैं।

रॉक क्लाइम्बर्स की बनी पसंद
अरावली की विशाल चट्टानों पर रॉक क्लाइम्बिंग भी होती है। हालांकि, विशेषज्ञ फिसलन और सुरक्षा कारणों से सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहां एडवेंचर कैंप, ट्रेकिंग और आउटडोर गतिविधियों की संख्या बढ़ी है, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी नया आधार मिला है।
फरीदाबाद की ओर बढ़ने पर अरावली का स्वरूप थोड़ा बदल जाता है। यहां प्राकृतिक पहाड़ियों के साथ इतिहास भी जुड़ जाता है। सूरजकुंड का नाम सुनते ही अधिकतर लोगों के मन में अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले की छवि उभरती है, लेकिन मानसून में यह इलाका एक अलग ही अनुभव देता है।
प्राचीन जलाशय, उसके चारों ओर फैली पहाड़ियां और बारिश के बाद हरियाली इस पूरे क्षेत्र को बेहद आकर्षक बना देती हैं। हरियाणा पर्यटन भी इसे जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।

प्रकृति और इतिहास का संगम सूरजकुंड-अनंगपुर
दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के लोगों के बीच सूरजकुंड और अनंगपुर पसंदीदा स्थल बना हुआ है। हालांकि विशेषज्ञ लगातार आगाह करते हैं कि यहां आने वाले अधिकांश पर्यटक बिना किसी गाइड के पहाड़ियों में प्रवेश कर जाते हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा तो बढ़ता ही है, वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित होता है।
ऐतिहासिक अनंगपुर बांध इसी इलाके में स्थित है। इसे देखने आने वाले पर्यटकों को इतिहास, इंजीनियरिंग और अरावली की प्राकृतिक घाटी का आकर्षण अनुभव मिलता है। बरसात के दौरान जब आसपास के कैचमेंट क्षेत्र से पानी यहां पहुंचता है तो पूरा इलाका जीवंत दिखाई देता है।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में विशेषज्ञों ने यह चिंता जताई है कि बांध तक पानी पहुंचाने वाले पारंपरिक जलमार्गों पर बढ़ते अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों ने इसकी जलग्रहण क्षमता को प्रभावित किया है। यही कारण है कि पहले जैसा जलभराव अब कम दिखाई देता है और इसका असर पूरे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है।

खूबसूरती लौटने की राह देखती बड़खल झील
फरीदाबाद का एक और चर्चित नाम है बड़खल झील। कभी यह दिल्ली-एनसीआर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिनी जाती थी। नौकायन, पिकनिक और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे। लेकिन भूजल स्तर में गिरावट, खनन और कैचमेंट क्षेत्र के क्षरण के कारण झील लगभग सूख गई।
इसके बाद वर्षों तक यह पर्यटन मानचित्र से लगभग गायब रही। अब सरकार और विभिन्न एजेंसियां इसके पुनर्जीवन पर काम कर रही हैं। मानसून के दौरान आसपास का अरावली क्षेत्र फिर से हरियाली से भर उठता है, इसलिए आज भी बड़ी संख्या में लोग यहां प्रकृति का आनंद लेने पहुंचते हैं।
हालांकि, झील अभी भी अपने पुराने स्वरूप में पूरी तरह वापस नहीं आ सकी है लेकिन लोग यहां बरसात में प्राकृितिक छटा का नजारा लेने पहुंचते हैं।

फोटोग्राफी ग्रुप और वीकेंड ट्रेकिंग कम्युनिटी तेजी से बढ़ी
दिल्ली-एनसीआर के पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम और फरीदाबाद की अरावली की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यहां पहुंचने के लिए लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ती।
कुछ ही मिनटों में कंक्रीट के जंगल से निकलकर लोग प्राकृतिक वातावरण में पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में यहां साइकिलिंग क्लब, ट्रेल रनिंग ग्रुप, बर्ड वॉचिंग सोसाइटी, नेचर फोटोग्राफी ग्रुप और वीकेंड ट्रेकिंग कम्युनिटी तेजी से बढ़ी हैं।
मानसून की हर बारिश के साथ गुरुग्राम और फरीदाबाद की अरावली एक बार फिर यह याद दिलाती है कि शहर की चहल-पहल और भागदौड़ के बीच प्रकृति ने अभी भी अपने लिए कुछ जगह बचाकर रखी है जहां हरियाली, मौसम और उस विरासत का संगम मिलता है जिसने सदियों से इस क्षेत्र की जल, जंगल और जमीन की रक्षा की है।
'लोगों को रहता है वीकेंड का इंतजार'
"हम वैसे भी स्वास्थ्य और फिटनेस को प्रकृति से जोड़कर बेहतरीन रिजल्ट पाने की उम्मीद करते हैं। दिल्ली एनसीआर खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद के लिए अरावली एक हिडन जेम है। अगर आप ट्रेडमिल पर वॉक करें और अरावली की वादियों में बने ट्रैक पर लोगों के साथ चलें तो अंतर खुद महसूस कर सकते हैं। ऑक्सीजन, एक जैसे जज्बे के लोगों का साथ और हरियाली अपने आप में स्वस्थ मन और स्वस्थ तन के लिए बेहतरीन कॉम्बीनेशन है। हम कभी अकेले तो कभी ग्रुप के लोगों के साथ वहां जाते हैं। वीकेंड पर कॉरपोरेट वॉक्स होती हैं, लोगों को उसका इंतजार रहता है।"
-मनु कालरा, रनर, सह संस्थापक, कोच, फिटनेस की पाठशाला।
'बरसात के मौसम का अपना ही है मजा'
"अरावली हमारा दूसरा घर है, उस वक्त का ठिकाना है जब काम की भागदौड़ से कुछ सुकून के पल चुराने हों। बायोडायवर्सिटी पार्क से लेकर लेपर्ड ट्रेल तक हर जगह एक अलग अहसास मिलता है। अब बरसात के मौसम में किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती अरावली की वादियां, किलोमीटर्स लंबी ट्रैक्स और आसपास के इलाकों में ताजा हवा। कई जगह झरने भी बहने लगते हैं। हर मौसम में तो सुबह जाते हैं लेकिन बरसात के मौसम में किसी भी समय जाने का अपना ही मजा है।"
-वीना गुप्ता, कार रेसर और सुरक्षा विशेषज्ञ।
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