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    गुरुग्राम नगर निगम का NGT के सामने बड़ा कबूलनामा- हर रोज अरावली के जंगलों में घुल रहा बंधवाड़ी का जहरीला पानी

    Updated: Wed, 08 Jul 2026 07:25 PM (IST)

    गुरुग्राम नगर निगम ने एनजीटी के सामने स्वीकार किया है कि बंधवाड़ी लैंडफिल से जहरीला लीचेट भारी बारिश में अरावली के वन क्षेत्र में बह रहा है। एनजीटी ने ...और पढ़ें

    एनजीटी में निगम ने खुद मानी गलती और कहा कि बंधवाड़ी का लीचेट बहकर बर्बाद कर रहा अरावली। जागरण

    एनजीटी में निगम ने खुद मानी गलती और कहा कि बंधवाड़ी का लीचेट बहकर बर्बाद कर रहा अरावली। जागरण

    HighLights

    1. निगम ने अरावली में लीचेट बहने की बात स्वीकारी।

    2. एनजीटी ने बंधवाड़ी में ताजा कूड़ा डालने पर रोक लगाई।

    3. अरावली सुरक्षा को बफर जोन बनाने की तैयारी।

    जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। बंधवाड़ी लैंडफिल साइट को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में हुई सुनवाई के दौरान दाखिल अपने हलफनामे में निगम ने स्वीकार किया कि लगातार और भारी वर्षा के दौरान लैंडफिल के पिछले हिस्से से निकलने वाला वर्षा का पानी और कचरे से बनने वाला जहरीला लीचेट बहकर अरावली के निचले वन क्षेत्र तक पहुंच रहा है।

    निगम ने यह भी माना कि मौजूदा ड्रेनेज व्यवस्था इस दूषित पानी को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने ताजा कूड़ा लैंडफिल में डालने पर रोक लगाने के निर्देश दिए, जबकि निगम ने अपने जवाब में कहा कि ताजा कूड़े के निस्तारण के लिए तीन वैकल्पिक स्थान चिह्नित कर लिए गए हैं। बता दें कि लैंडफिल पर फिलहाल 17 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा पड़ा हुआ है।

    रोजाना 200 किलो लीटर निकलता है जहरीला लीचेट

    हलफनामे के अनुसार बंधवाड़ी लैंडफिल साइट से सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 200 किलो लीटर (केएलडी) लीचेट निकलता है। मानसून और लगातार वर्षा के दौरान कचरे में नमी बढ़ने से इसकी मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। निगम ने बताया कि लीचेट के संग्रहण के लिए 20 हजार किलो लीटर क्षमता वाले चार तालाब बनाए गए हैं। यहां जमा पानी को टैंकरों के माध्यम से बहरामपुर स्थित एसटीपी भेजकर उपचार किया जाता है, लेकिन अधिक वर्षा होने पर पूरा सिस्टम ओवरफ्लो हो जाता है और दूषित पानी जंगलों की ओर बहने लगता है।

    अरावली की सुरक्षा के लिए अब बनाया जाएगा बफर जोन

    हलफनामे में निगम ने बताया कि जंगल की ओर दूषित पानी के बहाव को रोकने के लिए साइट पर दो ट्रामल मशीनें लगाई जा रही हैं। इनके माध्यम से उस हिस्से का कचरा हटाकर एक से दो एकड़ का खाली बफर जोन तैयार किया जाएगा। इस क्षेत्र के भीतर बड़े नाले विकसित किए जाएंगे, ताकि वर्षा का पानी और लीचेट जंगल की ओर जाने के बजाय लैंडफिल परिसर के भीतर बने तालाबों की ओर मोड़ा जा सके। वहां से इसे टैंकरों के जरिए उठाकर शोधन संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा।

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    पर्यावरणविदों की आशंकाओं पर लगी आधिकारिक मुहर

    अरावली में लीचेट पहुंचने का मुद्दा पर्यावरणविद लंबे समय से उठा रहे थे और इसे लेकर एनजीटी में लगातार शिकायतें की जा रही थीं। अब नगर निगम की ओर से हलफनामे में इस स्थिति को स्वीकार किए जाने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। इससे साफ है कि भारी वर्षा के दौरान मौजूदा व्यवस्था पर्यावरणीय नुकसान रोकने में सक्षम नहीं है।

    एनजीटी की सख्ती, ताजा कूड़ा डालने पर रोक

    सुनवाई के दौरान एनजीटी ने बंधवाड़ी लैंडफिल पर ताजा कूड़ा डालने पर रोक लगाने के निर्देश दिए। इसके जवाब में नगर निगम ने कहा कि ताजा कूड़े के निस्तारण के लिए तीन वैकल्पिक स्थानों की पहचान कर ली गई है और आगे की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। अब अगली सुनवाई में निगम की ओर से इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कदमों का विस्तृत ब्योरा पेश किया जाएगा।

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