गुरुग्राम एनकाउंटर: कारोबारी चुप, न्याय प्रणाली कमजोर... गैंग्सटरों की वसूली का केंद्र बनी साइबर सिटी
गुरुग्राम साइबर सिटी कमजोर आपराधिक न्याय प्रणाली के कारण गैंगस्टरों की वसूली का केंद्र बन रही है, जहां कारोबारी बदनामी के डर से पुलिस को शिकायत करने क ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
कमजोर न्याय प्रणाली से गुरुग्राम में गैंगस्टरों की वसूली बढ़ी।
कारोबारी बदनामी के डर से पुलिस को शिकायत नहीं करते।
देश के बाहर बैठे गैंगस्टर पुलिस की कमजोर कड़ी का फायदा उठा रहे।
आदित्य राज, गुरुग्राम। आइटी, टेलीकाम, गारमेंट, आटोमोबाइल से लेकर मेडिकल सेक्टर के हब के रूप में पहचान बनाने वाली साइबर सिटी गैंग्सटरों के लिए वसूली का केंद्र भी बनती जा रही है। सुरक्षा की चिंता में कारोबारी पुलिस को रंगदारी मांगने सूचना देने की जगह सीधे गैंग्सटरों से डील कर लेते हैं।
यही वजह है कि रंगदारी मांगने के अधिकतर मामले सामने नहीं आते हैं। मामले तब सामने आते हैं जब समय पर रंगदारी नहीं दी जाती है या फिर रंगदारी में कटौती करने पर डराया-धमकाया जाता है।
इसके ऊपर रोक तभी लगेगी जब आपराधिक न्याय प्रणाली को सख्त किया जाएगा। बदमाशों के भीतर डर पैदा होगा। डर न होने से वे कहीं भी बैठकर अपने गुर्गों के माध्यम से वसूली करते रहते हैं।
बदनामी के डर से संकोच करते हैं कारोबारी
हरियाणा के सीआइडी प्रमुख रहे सेवानिवृत अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) रेशम सिंह का कहना है कि आज से नहीं बल्कि शुरू से ही ऐसा रहा है कि बड़े कारोबारी किसी भी प्रकार की शिकायत देने में संकोच करते हैं। वे बदनामी से डरते हैं। इसका फायदा बदमाश उठाते हैं।
बदमाशों को पता होता है कि अमूक कारोबारी को धमकी देने पर आसानी से रंगदारी मिल सकती है। वे सीधे फोन करते हैं या फिर अपने गुर्गों के माध्यम से रंगदारी देने का संदेश देते हैं। अधिकतर कारोबारी संदेश मिलते ही डील कर लेते हैं।
इस डील के बारे में पुलिस को पता नहीं होता है क्योंकि पुलिस को शिकायत नहीं दी जाती है। इससे धीरे-धीरे बदमाशों का मनोबल बढ़ता चला जाता है और धीरे-धीरे वह वसूली का साम्राज्य स्थापित कर लेते हैं। इस साम्राज्य में जब कोई दूसरा बदमाश घुसने का प्रयास करता है तो फिर गैंगवार शुरू होता है।
खबरें और भी
गैंगवार शुरू होने पर पुलिस को पता चलता है कि वसूली को लेकर दो गैंग के बीच जंग है। मुंबई के बाद साइबर सिटी भी देश की आर्थिक राजधानी बन चुकी है। इस वजह से बदमाशों की नजर इस शहर पर है।
अपनी बादशाहत जमाने के लिए बदमाश रंगदारी न मिलने पर दो-तीन जगह अंधाधुंध फायरिंग कराते हैं। इसके बाद उनकी आपराधिक जमीन तैयार हो जाती है। यही कुछ समय से साइबर सिटी में चल रहा है। बदमाश कुछ चर्चित लोगों को निशाना बना रहे हैं।
उनके घर, कार्यालय या कार पर फायरिंग कर दहशत पैदा करने का काम कर रहे हैं। इस स्थिति को खत्म करने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करना होगा। जब तक प्रणाली मजबूत नहीं होगी तब तक लोगों का खाकी के ऊपर भरोसा मजबूत नहीं होगा। कारोबारियों को लगता है कि आज नहीं तो कल बदमाश जेल से बाहर आ जाएंगेे। आखिर पुलिस कब तक उनकी सुरक्षा करेगी।
बाहर बैठे गैंग्सटर पुलिस की कमजोर कड़ी
सेवानिवृत अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) रेशम सिंह कहते हैं कि गिनती के गैंग्सटर देश से बाहर बैठे हैं। वे बाहर बैठकर अपना साम्राज्य चला रहे हैं। यह पुलिस की कमजोरी है। क्या गैंग्सटरों का नेटवर्क पुलिस से अधिक मजबूत है कि वे पकड़ में नहीं आ रहे हैं।
गैंग्सटरों पर नजर नहीं होने की वजह से ही वे देश से बाहर जाने में कामयाब होते हैं। यदि वे चले भी जाते हैं तो उन्हें कुछ ही दिनों के भीतर आने के लिए मजबूर कर दिया जाए।
एक बार गिरफ्त में आने के बाद उसे जमानत न मिले और यदि जमानत मिल जाए तो फिर आगे से बदमाशी करने की हिम्मत न करे, ऐसी अपराधिक न्याय प्रणाली विकसित करने पर जोर देना होगा।
यह भी पढ़ें- गुरुग्राम एनकाउंटर: 10 करोड़ की रंगदारी के लिए तीन महीने गैंगस्टर के निशाने पर था कारोबारी
यह भी पढ़ें- गुरुग्राम एनकाउंटर: लग्जरी लाइफ का लालच, फिर अपराध का दलदल... ऐसे गैंग्सटरों के जाल में फंस रहे गरीब युवा