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    'ये केवल धोखाधड़ी नहीं, पूरे हेल्थ सिस्टम पर हमला', गुरुग्राम के फर्जी मेडिक्लेम केस में कोर्ट सख्त; जमानत से इनकार

    By Mahaveer YadavEdited By: Kushagra Mishra
    Updated: Wed, 13 May 2026 10:21 AM (IST)

    गुरुग्राम में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने एक बड़े फर्जी मेडिक्लेम रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें गैलेक्सी वन अस्पताल शामिल था। अदालत ने आरोपित पार्थ क ...और पढ़ें

    फर्जी मेडिक्लेम केस में कोर्ट का जमानत देने से इनकार। फोटो: सांकेतिक

    फर्जी मेडिक्लेम केस में कोर्ट का जमानत देने से इनकार। फोटो: सांकेतिक

    HighLights

    1. मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने फर्जी मेडिक्लेम रैकेट का पर्दाफाश किया

    2. गैलेक्सी वन अस्पताल में 28 फर्जी मरीज दिखाए गए थे

    3. अदालत ने आरोपित पार्थ की जमानत याचिका खारिज कर दी

    महावीर यादव, बादशाहपुर। फर्जीवाड़ा कर मेडिक्लेम कंपनियों से क्लेम वसूली का खेल बड़े स्तर पर चल रहा है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में कई आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। कई आरोपितों की गिरफ्तारी बाकी है।

    अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश यशविंदर पाल सिंह की अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए एक आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी का नहीं बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य बीमा प्रणाली से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े का है।

    फर्जी मेडिकल बिल कर रहे थे तैयार 

    22 मई 2025 को मुख्यमंत्री उड़न दस्ता ने बजघेड़ा थाना क्षेत्र में गैलेक्सी वन अस्पताल पर छापा मारा था। जांच में अस्पताल के आईपीडी रजिस्टर में 28 मरीजों के नाम दर्ज मिले। जबकि कई लोग कथित इलाज के दौरान अपने घरों या कार्यालयों में पाए गए। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने फर्जी मेडिकल फाइलें और बिल तैयार कर विभिन्न बीमा कंपनियों से लाखों रुपये के मेडिक्लेम पास करवाए।

    जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों ने अस्पताल की मिलीभगत से फर्जी इलाज दिखाकर बीमा राशि प्राप्त की। पुलिस ने अस्पताल से 55 कथित फर्जी मेडिक्लेम फाइलें, रजिस्टर, कंप्यूटर, स्टांप, डीवीआर और अन्य दस्तावेज बरामद किए। मोबाइल फोन की जांच में भी बड़ी संख्या में फर्जी क्लेम फाइलें मिलने का दावा किया गया।

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    डॉक्टर का बेटा भी था षड्यंत्र में शामिल

    यूपी के औरेया जिला के गांव उदयपुरा का पार्थ को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि वह अस्पताल संचालक डाॅ. अंगद सिंह का बेटा होने के साथ-साथ पूरे षड्यंत्र में सक्रिय रूप से शामिल था और दस्तावेज जुटाने का काम करता था। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पार्थ केवल अस्पताल का कर्मचारी था।

    उसकी उम्र 20 वर्ष है और उसे केवल पिता के कारण मामले में फंसाया गया है। यह भी कहा गया कि चालान पेश हो चुका है और आगे उसकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए कहा कि आरोपित की हिरासत अवधि इतनी लंबी नहीं हुई है कि केवल इसी आधार पर जमानत दी जाए। इसके साथ ही अदालत ने पार्थ की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।

    गिरफ्तारी और चार्जशीट की स्थिति

    पुलिस जांच के दौरान अब तक गौरव कुमार, सपना, वर्षा, डाॅ. अंगद सिंह, पार्थ, राज सिंह, रोहित शर्मा, सोनू शर्मा, मुकेश और मोनू शर्मा की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें डाॅ. अंगद सिंह को कथित फर्जी मेडिक्लेम रैकेट का मुख्य आरोपित बताया गया है।

    अमरनाथ, गिरिराज, विनय, नरबीर, सतेंद्र और प्रवेश शर्मा की गिरफ्तारी अभी लंबित है तथा इनके खिलाफ पूरक चालान पेश किया जाना बाकी है। पुलिस ने 7 मई को सपना, वर्षा, गौरव, अंगद, पार्थ, राज सिंह, सोनू शर्मा और रोहित शर्मा के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। मामले की आगे की जांच अभी जारी है।

    2023 में भी एक अस्पताल को पकड़ा गया था

    अप्रैल 2023 में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर बजघेड़ा में अवैध तरीके से चलाए जा रहे आनंद नामक अस्पताल का पर्दाफाश किया था। अस्पताल संचालक मध्यप्रदेश के भिंड जिला के गांव लक्ष्मणपुर का रहने वाला रामवीर इसमें मास्टरमाइंड बताया गया।

    रामवीर ने ही अपने साथ तीन अन्य लोगों कापसहेड़ा के नंदकिशोर, सीतापुर के मंहू गांव के विकास भारद्वाज और झारखंड के हजारीबाग के मंटू कुमार पांडे को अपने साथ शामिल कर रखा था। रामवीर ने पुलिस को पूछताछ में दसवीं पास बताया। इसके साथ ही विकास भी 12वीं पास है।

    अस्पताल को पूरी तरह से सुसज्जित कर आपरेशन थिएटर और बेड आदि का इंतजाम कर चलाया जा रहा था। मुख्यमंत्री उड़न दस्ता की टीम ने उस समय 12 कुरियर पैकेट बरामद किए थे। जिनको मेडिक्लेम कंपनियों को भेजा जाना था।

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