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    गुरुग्राम में बढ़ती गर्मी से किसानों की चिंता, गेहूं की पैदावार में आएगी कमी

    Updated: Fri, 13 Mar 2026 03:51 PM (IST)

    मार्च की शुरुआत से बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल पर 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार में कमी आ सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने 'पाउड ...और पढ़ें

    मार्च की शुरुआत से बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल पर 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' का खतरा बढ़ गया है। इमेज एआई जेनरेटेड

    मार्च की शुरुआत से बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल पर 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' का खतरा बढ़ गया है। इमेज एआई जेनरेटेड

    संदीप रतन, गुरुग्राम। मार्च महीने की शुरुआत से ही तापमान तेज़ी से बढ़ने लगा है, जिससे खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पर इसके संभावित असर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर तापमान इसी गति से बढ़ता रहा, तो गेहूं की फसल पर "टर्मिनल हीट स्ट्रेस" (अंतिम चरण में गर्मी का अत्यधिक दबाव) का खतरा बढ़ जाएगा।

    यह स्थिति फसल चक्र के अंतिम चरणों में दानों के विकास की प्रक्रिया को बाधित करती है, जिससे कुल पैदावार में कमी आ सकती है।

    कृषि विज्ञान केंद्र (Agricultural Science Center), शिकोहपुर के मौसम विशेषज्ञ डॉ. मंजीत के अनुसार, मौजूदा मौसम की स्थितियां गेहूं की फसल के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि बढ़ते तापमान से फसल में लगने वाली विभिन्न बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे बाद में फसल की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

    पाउडरी मिल्ड्यू रोग का खतरा

    डॉ. मंजीत ने बताया कि जैसे-जैसे मौसम गर्म होता है, गेहूं की फसलों में 'पाउडरी मिल्ड्यू' (Powdery Mildew) रोग का प्रकोप भी देखने को मिल सकता है। यह एक फंगल (कवक जनित) रोग है, जिसमें फसल की पत्तियों और बालियों पर सफेद रंग की पाउडर जैसी परत जम जाती है।

    यह रोग पौधे की प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे पौधे का विकास रुक जाता है और दानों के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए और इसे नियंत्रित न किया जाए, तो इसका परिणाम पैदावार में कमी के रूप में सामने आ सकता है।

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    समय से पहले पक सकती है फसल 

    डॉ. मंजीत ने आगे बताया कि लगातार उच्च तापमान के कारण गेहूं की फसल अपने सामान्य समय से पहले ही पकना शुरू हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में, दानों को पूरी तरह से विकसित होने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है। परिणामस्वरूप, दाने पूरी तरह से भर नहीं पाते, जिससे दानों का वज़न कम हो जाता है। इसका किसानों की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है और कुल उत्पादन में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है।

    समय पर सिंचाई करना जरूरी

    मौसम विशेषज्ञ ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसलों की नियमित रूप से निगरानी करें और अपने खेतों में समय पर सिंचाई सुनिश्चित करें। गेहूं की फसल के विकास चक्र के अंतिम चरणों के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस नाजुक दौर में खेतों में नमी की कमी होने से दानों के भरने की प्रक्रिया पर सीधा और बुरा असर पड़ता है। समय पर सिंचाई करके, फसल को गर्मी के हानिकारक प्रभावों से काफी हद तक बचाया जा सकता है। --

    तापमान में लगातार बढ़ोतरी

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में अधिकतम तापमान लगभग 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जबकि न्यूनतम तापमान लगभग 18.8 डिग्री सेल्सियस है। आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसलिए, किसानों को संभावित नुकसान को कम करने के लिए—मौजूदा मौसम की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए—फसल प्रबंधन और सिंचाई पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

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