प्रदूषण फैलाकर बटोरे करोड़ों, अब पाई-पाई की वसूली! गुरुग्राम के 31 आरएमसी प्लांटों की रुकी धड़कनें
गुरुग्राम में 31 अवैध आरएमसी प्लांटों पर लगाया गया 24.77 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा चार साल बाद भी वसूल नहीं हो पाया है। ...और पढ़ें

31 अवैध आरएमसी प्लांटों पर 24.77 करोड़ का मुआवजा बकाया। इमेज एआई
संदीप रतन, गुरुग्राम। गुरुग्राम में अवैध रूप से संचालित 31 रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांटों पर लगाए गए 24.77 करोड़ (24 करोड़ 77 लाख 40 हजार 626) रुपये के पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली चार वर्ष बाद भी नहीं हो पाईहै। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने 2022 से 2026 के बीच विभिन्न मामलों में यह पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था, लेकिन अधिकांश इकाइयों ने अब तक राशि जमा नहीं कराई।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिकार्ड के अनुसार ज्यादातर आरएमसी प्लांटों पर दिसंबर 2022, वर्ष 2023, वर्ष 2024 तथा जनवरी 2026 के दौरान पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया। जांच में कई इकाइयों के बिना कंसेंट टू एस्टैब्लिश (सीटीई) और कंसेंट टू आपरेट (सीटीओ) के संचालन, प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं करने तथा आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित नहीं करने जैसे गंभीर उल्लंघन सामने आए।
इन्हीं आधारों पर करोड़ों रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा निर्धारित किया गया। अब बोर्ड ने सख्ती दिखाते हुए नगर निगम आयुक्त को पत्र भेजकर संबंधित आरएमसी प्लांटों का कोई भी लंबित अथवा भविष्य का भुगतान रोकने और उसी राशि से पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने के निर्देश दिए हैं।
85.59 लाख से 91.30 लाख तक का मुआवजा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार 31 अवैध आरएमसी प्लांटों पर कुल 24 करोड़ 77 लाख 40 हजार 626 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा बकाया है। ज्यादातर इकाइयों पर करीब 85.59 लाख से 91.30 लाख तक का मुआवजा लगाया गया है, जबकि कुछ मामलों में उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग राशि निर्धारित की गई। वर्षों बीतने के बावजूद इन मामलों में पूरी राशि की वसूली नहीं हो सकी है।
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निगम सहित अन्य विभागों को आपूर्ति करते हैं प्लांट
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जीएसटी रिकार्ड की जांच में पाया कि सूची में शामिल कई आरएमसी प्लांट नगर निगम के विभिन्न निर्माण कार्यों से जुड़े हुए हैं और निर्माण सामग्री की आपूर्ति करते हैं। इसके बाद बोर्ड ने निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन इकाइयों का कोई भी लंबित या भविष्य का भुगतान जारी न किया जाए। पहले पर्यावरणीय मुआवजे की राशि बोर्ड के खाते में जमा कराई जाएगी, उसके बाद ही अन्य भुगतान पर विचार किया जाएगा।
उपायुक्त के समक्ष भी लंबित है वसूली का मामला
बोर्ड ने अपने पत्र में कहा है कि पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली का मामला पहले से ही हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 के तहत उपायुक्त गुरुग्राम के समक्ष लंबित है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि अब नगर निगम के माध्यम से भुगतान रोकने की समानांतर प्रक्रिया शुरू कर वसूली में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वर्षों से लंबित करोड़ों रुपये की राशि वसूल की जा सके।
सील तोड़कर दोबारा संचालन, निगमों पर जिम्मेदारी टाल रहे बोर्ड के अधिकारी
दस्तावेजों के अनुसार कुछ आरएमसी प्लांटों ने कार्रवाई के बाद सील तोड़कर दोबारा संचालन शुरू कर दिया था। ऐसे मामलों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अतिरिक्त पर्यावरणीय मुआवजा भी लगाया। इसके बावजूद संबंधित इकाइयों से पूरी राशि की वसूली अब तक नहीं हो सकी है। वहीं, गुरुग्राम और मानेसर सहित जिले में कई आएमसी प्लांट बिना अनुमति के संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी आरएमसी प्लांटों पर स्वयं कार्रवाई न करके गुरुग्राम और मानेसर नगर निगम पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं।
अवैध प्लांटों पर बकाया पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली के लिए नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखा गया है। अगर कहीं पर भी अवैध रूप से आरएमसी प्लांट चालू पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-आकांक्षा तंवर, क्षेत्रीय अधिकारी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (गुरुग्राम उत्तर)
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