मानेसर में खौफ का सन्नाटा: कंपनियों के गेट पर पुलिस का पहरा, सड़क पर बिखरे चप्पल-जूते बयां कर रहे हिंसा की कहानी
मानेसर में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर श्रमिकों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। होंडा के वेतन बढ़ाने के बाद अन्य कंपनियों के कर्मचारियों ने भी मांग की। पुलि ...और पढ़ें

प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के बाद सड़क पर बिखरी चप्पलें और कंपनियों के गेट पर तैनात पुलिसकर्मी।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम (मानेसर)। आईएमटी मानेसर स्थित रिचा एक्सपोर्ट और मॉडलेमा समेत कई कंपनियों में चल रही मजदूरों की हड़ताल के तीसरे दिन गुरुवार सुबह पुलिस और कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हैं। हड़ताली मजदूरों पर लाठीचार्ज किया गया और कई मजदूरों को हिरासत में लिया गया।
इसके बाद हर समय प्रोडक्शन का दबाव देखने वाले आईएमटी मानेसर की सड़कों पर गुरुवार को हंगामे के बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद सन्नाटा पसर गया। देखते ही देखते सड़क पर टूटी-छूटी चप्पलें बिखर गईं।
कंपनियों के गेट पर गार्ड की जगह बड़ी संख्या में पुलिस तैनात हो गई। इस पूरे विवाद की शुरुआत अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही हो गई थी।
मानेसर में अचानक क्याें भड़के श्रमिक?
साइबर सिटी की आईएमटी मानेसर में सैकड़ों छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थित हैं। यहां हर पल चहल-पहल बनी रहती है। कंपनियों के अंदर जहां मशीनों का शोर गूंजता रहता है, वहीं बाहर सड़कों पर श्रमिकों का आना-जाना। मगर अप्रैल की शुरुआत होते ही यहां का माहौल प्रदर्शन के लिए तैयार होने लगा।

एक कंपनी होंडा ने अपने कर्मचारियों का वेतन 11 हजार से बढ़ाकर 16 हजार कर दिया। होंडा के कर्मचारी अपने वेतन की बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। बस, फिर क्या था देखते ही देखते दर्जनों कंपनियों के कर्मचारियों ने जिद पकड़ ली।
नतीजतन, गुरुवार को प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने कड़ाई दिखाते हुए पूरे उग्र भीड़ को शांत करके बैरंग लौटा दिया। मगर यूनियन के लोग अभी शांत नहीं होना चाहते। वे अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।

प्रदर्शन बंद कर काम पर जाने की सलाह दी
बीते तीन दिनों से अपनी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों को दोबारा काम पर लाने के लिए विभिन्न कंपनियों के प्रशासन के अधिकारियों ने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस ने श्रमिकों को प्रदर्शन बंद कर काम पर जाने की सलाह दी।
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श्रमिक यूनियन का कहना है कि पुलिस ने आग्रह करने के बजाय जबरन काम करने के लिए बाध्य किया। श्रमिक उग्र होने लगे। मामला बिगड़ता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
इसमें बताया जा रहा है कि करीब 50 से ज्यादा श्रमिकों को चोट आई। वहीं, पुलिस का कहना है श्रमिकों की ओर से किए गए पथराव में 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए।

20 हजार से अधिक कर्मचारी कर रहे थे प्रदर्शन
दरअसल, लाठीचार्ज के बाद उग्र श्रमिकों ने पुलिस की एक बाइक को आग के हवाले कर दिया। साथ ही, इस पूरे मामले में रिचा ग्लोबल कंपनी की सम्पत्ति को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कारण, उक्त क्षेत्र में इस कंपनी की आधा दर्जन से अधिक शाखाएं हैं।

इन सभी शाखाओं में 20 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यह कंपनी यूएसए, यूके एवं खाड़ी देशों में अपना माल एक्सपोर्ट करती है। कंपनी के कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कंपनी पर पत्थरबाजी भी की। इसमें कैम्पस के अंदर खड़ी दो गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। खिड़कियों के शीशे चटक गए।

फिलहाल क्षेत्र में पसरा सन्नाटा
अंतत: पुलिस की बढ़ती संख्या को देखते हुए श्रमिक वहां से चले गए। हालांकि, इसी बीच आईएमटी मानेसर के सेक्टर 4 में डायमंड इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के सामने कर्मचारियों ने पुलिस की ईआरवी गाड़ी को पत्थरबाजी कर तोड़ दिया।
इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को भी चोट आई। पड़ोस में स्थित मोडेलामा कंपनी पर भी कर्मचारियों ने पथराव किया। इस दौरान उसके भी शीशे टूट गए। मामले की सूचना मिलने के बाद जायजा लेने के लिए मानेसर डीसीपी प्रवीणा भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं।
फिलहाल, काफी हंगामे के बाद वहां शांति कायम है। नाराज श्रमिक अपने घर जा चुके हैं। यूनियन अगली रणनीति पर है और कंपनियों की सुरक्षा में पुलिस तैनात है।
साल 2012 की वारदात हो गईं ताजा
बता दें कि 12 साल पहले, जुलाई 2012 में मानेसर स्थित मारुति सुजूकी के प्लांट में मजदूरों के आंदोलन के दौरान एक हिंसक घटना घटी थी। इसमें मैनेजमेंट के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसका आरोप आंदोलन कर रहे मजदूरों पर लगाया गया।
जांच से पहले ही सैकड़ों मजदूरों को काम से निकाल दिया गया था। बाद में अधिकांश मजदूर बेकसूर साबित हुए थे। गुरुवार को हुई यह हिंसा उसी आंदोलन की याद ताजा कर रहा है। स्थानीय लोगों को अब भी उस समय की बातें सिहरने को मजबूर कर देती हैं।