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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 24, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Haryana News: हिसार के अस्पताल में बेड से बंधा मरीज बेटे की आंखों के सामने जिंदा जला, तड़प-तड़प कर हुई मौत

    By Jagran NewsEdited By: Prince Sharma
    Updated: Thu, 24 Aug 2023 08:56 AM (IST)

    Haryana News हरियाणा में हिसार के डाबड़ा चौक स्थित परिवर्तन अस्पताल के डीलक्स रूम में आग लगने से एक मरीज अपने बेटे की आंखों के सामने जिंदा जलकर मर गया ...और पढ़ें

    Haryana News: हिसार के अस्पताल में बेड पर बंधा मरीज बेटे की आंखों के सामने जिंदा जला
    Haryana News: हिसार के अस्पताल में बेड पर बंधा मरीज बेटे की आंखों के सामने जिंदा जला

    HighLights

    1. अस्पताल संचालक पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग को लेकर स्वजन धरने पर बैठे
    2. शराब की लत व मानसिक परेशानी के कारण मरीज को स्टाफ ने बेड से बांधे थे हाथ-पैर

    हिसार, जागरण संवाददाता। हरियाणा में हिसार के डाबड़ा चौक स्थित परिवर्तन अस्पताल के डीलक्स रूम में आग लगने से एक मरीज अपने बेटे की आंखों के सामने जिंदा जलकर मर गया। हादसा मंगलवार देर रात करीब 1:30 बजे हुआ। नशे की लत के कारण मरीज मानसिक रूप से परेशान रहता था।

    अस्पताल स्टाफ ने उसके हाथ-पैर बेड से बांधे हुए थे। चिल्लाने की आवाज सुनकर बेटा अपने पिता को बचाने दौड़ा। आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन अग्निशमन यंत्र काम नहीं कर रहा था।

    आग बुझी पर मरीज की चली गई जान

    पाइप से पानी डालकर जब तक आग बुझाई गई तब तक मरीज की जान जा चुकी थी। मरीज के बेटे का आरोप है कि स्टाफ कर्मी मदद करने के बजाय वहां से भाग गए। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। पुलिस ने धारा-304ए के तहत केस दर्ज किया है।

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    मरीज के स्वजन अस्पताल संचालक पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग पर अड़ गए हैं। उन्होंने पोस्टमार्टम के बाद स्वजन ने शव लेने से इन्कार कर दिया है और अस्पताल में ही धरने पर बैठ गए हैं। उपायुक्त उत्तम सिंह ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।

    20 अगस्त को हुआ था अस्पताल में भर्ती

    हादसे में जान गंवाने वाले 46 वर्षीय अमित शराब की लत के कारण काफी तनाव में रहते थे। उन्हें 20 अगस्त को परिवर्तन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अमित के बेटे ध्रुव ने बताया कि उनके पिता को अस्पताल के प्रथम तल पर डीलक्स रूम-2 में रखा गया था। मंगलवार रात 12 बजे के करीब पिता एक बार नीचे आ गए थे। इसके बाद स्टाफ कर्मियों ने बेल्ट व चादों से उनके हाथ-पांव बांध दिए थे और उसे बाहर भेज दिया था।

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    1 बजकर 26 मिनट पर आई धमाके की आवाज

    स्टाफ कर्मियों का कहना था कि वे मरीज को बांधेंगे, इसलिए वह देख नहीं पाएगा, इस पर वह नीचे चला गया था। पिता चिल्लाने लगे थे। कुछ देर में एक स्टाफ कर्मी ने उन्हें दवा दी और कमरे की लाइट बंद कर आया था। रात 1 बजकर 26 मिनट पर कमरे से धमाके की आवाज आई और ध्रुव ने चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनी।

    उस दौरान अफरा-तफरी मच गई। ऊपर देखा कि कमरे में धुआं था। ध्रुव ने पिता को देखा तो बेड सहित उनके कपड़ों में आग लगी हुई थी। वे बंधे हुए थे तो वहां से उठ नहीं पा रहे थे। वहां मौजूद तीनों स्टाफ कर्मी नीचे भाग गए।

    पिता को आंखों के सामने मरते देखा

    हादसे के कुछ देर बाद डाक्टर आए थे ध्रुव ने बताया कि सीढि़यों के पास रखा अग्निशमन यंत्र उठाया और अपने पिता को बचाने के लिए आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन वह काम नहीं कर रहा था। उसने सीढ़ियों के पास पड़ी पानी की पाइप से आग बुझाई, तब तक उसके पिता की मौत हो चुकी थी।

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    हादसे के कुछ देर बाद डाक्टर आए थे। अस्पताल के संचालक डॉ. करणजीत ने बताया कि मरीज ठीक हो गया था, लेकिन रात को उसकी हालत दोबारा बिगड़ गई थी। दवा न लेने पर एक हाथ-पैर बांधना पड़ा था। अग्निशमन यंत्र सारे दुरुस्त थे। उस कमरे प्रथम तल पर पांच मरीज थे। लग रहा है कि शार्ट सर्किट आग लगी है। डी-एडिक्शन सेंटर का लाइसेंस रिन्यू करवाना है।