अटेली-नारनौल रेल दोहरीकरण: 15 फरवरी को CRS निरीक्षण, बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार
अटेली से नारनौल के बीच 14 किलोमीटर रेलखंड का दोहरीकरण पूरा हो गया है, जिस पर ट्रायल रन जारी है। 15 फरवरी को सीआरएस निरीक्षण के बाद नियमित रेल संचालन श ...और पढ़ें

पटीकरा के पास दोहरीकरण के बाद आवश्यक कार्य करते श्रमिक। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
विपिन कुमार, नारनौल। रेवाड़ी-नारनौल रेलखंड के दोहरीकरण कार्य को बड़ी उपलब्धि मिली है। अटेली से नारनौल के बीच 14 किलोमीटर लंबे खंड का दोहरीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में इस पर ट्रायल रन जारी है।
15 फरवरी को इस खंड का कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण सफल रहने के बाद इस ट्रैक पर नियमित रेल संचालन का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
बता दें कि रेवाड़ी से नारनौल तक 52 किलोमीटर लंबे दोहरीकरण कार्य पर कुल 666.72 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। यह परियोजना दो प्रमुख खंडों में विभाजित है जिसमें रेवाड़ी से काठुवास तथा काठुवास से नारनौल।
अटेली में पूरा हो चुका है काम
इससे पहले अटेली से कुंड तक करीब 10.3 किलोमीटर का दोहरीकरण कार्य पूरा किया जा चुका है। वहीं काठुवास (कुंड) से रेवाड़ी तक का कार्य लगभग 60 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। परियोजना के चरणबद्ध क्रियान्वयन से क्षेत्र में रेल अवसंरचना को मजबूत आधार मिल रहा है।
यह भी पढ़ें- Holi Special Train: होली पर रेलवे का तोहफा, छपरा होकर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें
हालांकि बताया जा रहा है कि काठुवास से रेवाड़ी तक के बचे हुए कार्य को खाटूश्याम जी के फाल्गुनी मेले के बाद गति मिलेगी।रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दोहरीकरण से ट्रेनों को क्रासिंग के लिए स्टेशनों पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे यात्री और मालगाड़ियों की औसत गति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इससे समय की बचत के साथ-साथ परिचालन क्षमता भी बढ़ेगी। इस परियोजना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके बाद नारनौल-रींगस-फुलेरा रेलखंड (163.57 किमी) के दोहरीकरण का प्रस्ताव है।
यह पूरा कारिडोर तैयार होने पर दिल्ली से रींगस, जयपुर और आगे अहमदाबाद तक एक वैकल्पिक और तेज मार्ग उपलब्ध कराएगा। वर्तमान दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर मुख्य मार्ग की तुलना में यह रूट लगभग 65 से 70 किलोमीटर छोटा होगा, जिससे जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई की यात्रा में भारी समय बचत संभव होगी।
धार्मिक और शैक्षणिक दृष्टि से साबित होगी वरदान
रेल दोहरीकरण का यह कार्य केवल ट्रैक विस्तार नहीं, बल्कि दक्षिण हरियाणा और शेखावाटी क्षेत्र की आर्थिक, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को नई गति देने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। धार्मिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी यह परियोजना क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी।
खबरें और भी
खाटू श्याम और सालासर बालाजी जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। शेखावाटी क्षेत्र के शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तथा सेना में कार्यरत जवानों के लिए भी ट्रेनों की संख्या और आवृत्ति बढ़ने की संभावना है।