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    नारनौल में बूंद-बूंद को तरस रहे राहगीर, भीषण गर्मी में सूखी पड़ीं प्याऊ; कब टूटेगी जिम्मेदारों की नींद?

    Updated: Mon, 25 May 2026 01:51 PM (IST)

    नारनौल में भीषण गर्मी के कारण सार्वजनिक प्याऊ और पानी की टंकियां खराब पड़ी हैं, जिससे राहगीरों को पीने के पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ...और पढ़ें

    बस स्टेंड नारनौल के बाहर बनी पानी की टंकी का नल टूटा हुआ। जागरण

    बस स्टेंड नारनौल के बाहर बनी पानी की टंकी का नल टूटा हुआ। जागरण

    जागरण संवाददाता, नारनौल। नारनौल जिले में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और लू के बीच शहर की सार्वजनिक प्याऊ और पानी की टंकियां लोगों को राहत देने के बजाय खुद बदहाली का शिकार बनी हुई हैं।

    कभी राहगीरों, मजदूरों और यात्रियों की प्यास बुझाने वाली ये टंकियां अब टूट-फूट, बंद नलों और पानी के अभाव के कारण बेकार पड़ी हैं। ऐसे में आमजन को इस तपती गर्मी में पीने के पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

    कहीं नल टूटे हैं तो कहीं टंकियां सूखी पड़ी

    शहर के बस स्टैंड के बाहर रेवाड़ी रोड, महेंद्रगढ़ रोड, पुरानी कचहरी के पास, पुरानी मंडी रोड, बहरोड़ रोड और रेलवे स्टेशन रोड सहित कई प्रमुख स्थानों पर बनी सार्वजनिक पानी की टंकियां लंबे समय से खराब हालत में पड़ी हैं। कहीं नल टूटे हुए हैं तो कहीं टंकियां सूखी पड़ी हैं।

    कई स्थानों पर टंकियों के आसपास गंदगी जमा होने से लोग वहां रुकना भी पसंद नहीं करते। स्थानीय लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी में सबसे अधिक परेशानी मजदूरों, रिक्शा चालकों, यात्रियों और बाहर से आने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है।

    पहले लोग रास्ते में बनी प्याऊ से पानी पीकर राहत महसूस करते थे, लेकिन अब अधिकांश स्थानों पर पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाजार से महंगी बोतलबंद पानी खरीदनी पड़ रही है।

    लोगों का कहना है कि नगर परिषद और संबंधित विभागों द्वारा समय रहते टंकियों की मरम्मत और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई। कई स्थानों पर पाइप लाइन और नल खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

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    सामाजिक संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं ने भी चिंता जताते हुए कहा कि गर्मी के इस दौर में सार्वजनिक जल व्यवस्था को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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    नागरिकों ने प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं से मांग की है कि शहर के मुख्य मार्गों और बाजारों में बंद पड़ी प्याऊ को दोबारा शुरू कराया जाए और टंकियों में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाया जाए, ताकि राहगीरों को राहत मिल सके।