भीषण गर्मी पर भारी पड़ रही आस्था, लाखों लाेग दे रहे बृज चौरासी कोस की परिक्रमा; 268 KM की परिक्रमा का विशेष महत्व
अधिक मास के शुभ अवसर पर मेवात के बिछौर व नवलगढ़ में बृज 84 कोसी परिक्रमा शुरू हो गई है। भीषण गर्मी के बावजूद देशभर से हजारों श्रद्धालु भक्तिभाव से परि ...और पढ़ें
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भीषण गर्मी में परिक्रमा करते हुए श्रद्धालु। जागरण
HighLights
अधिक मास में बिछौर-नवलगढ़ में बृज 84 कोसी परिक्रमा प्रारंभ।
भीषण गर्मी के बावजूद हजारों श्रद्धालु भक्तिभाव से कर रहे परिक्रमा।
स्थानीय लोग श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे, भंडारे व शिविर आयोजित।
योगेश सैनी, पुन्हाना (मेवात)। बिछौर व नवलगढ़ की पवित्र बृज भूमि एक बार फिर आस्था के महासंगम की साक्षी बन रही है। अधिक मास के शुभ अवसर पर विश्व प्रसिद्ध बृज 84 कोसी परिक्रमा शुरू होने के साथ ही देशभर से हजारों श्रद्धालु भाग परिक्रमा के दौरान बिछाैर व नवलगढ़ पहुंच रहे हैं। जहां पर लोगों की आस्था भीषण गर्मी पर भारी पड़ रही है। लोग भीषण गर्मी व अपनी उम्र को भी भूल कर परिक्रमा दे रहे हैं।
यह परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान जहां क्षेत्र में दिन-रात लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रात दिन राधे-राधे की गूंज भी उठ रही है।
करीब 80 वर्षीय व मध्य प्रदेश के रहने वाले महंत रामदास त्यागी ने बताया कि वो कई बार चौरासी कोस की परिक्रमा दे चूके हैं उन्हें उम्र व गर्मी से कोई फक्र नहीं पड़ता है। इस बार भी वो पूरे जोश से परिक्रमा कर रहे हैं।
बता दें कि बृज भूमि को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की पावन स्थली के रूप में जाना जाता है। यहां की धूल, कुंज, सरोवर और मंदिर आज भी श्रद्धालुओं को उस दिव्य युग की अनुभूति कराते हैं।
यही वजह है कि अधिक मास के दौरान यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है और पूरा बृज क्षेत्र भक्ति के रंग में रंगा नजर आता है। अधिक मास को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है।
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मान्यता है कि इस महीने में किए गए पूजा-पाठ, व्रत और परिक्रमा का फल कई गुना अधिक मिलता है। यही कारण है कि हर बार अधिक मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बृज पहुंचते हैं और इस परिक्रमा में शामिल होते हैं।
रास्ते में भरा पानी
परिक्रमा के रास्ते पर बिछौर गांव में कुछ जगह पर पानी भरा हुआ है। जहां से निकलने में श्रद्धालुओं को भारी परेशानी हो रही है। इसके साथ ही बिछौर गांव के सरकारी स्कूल से नीमका गांव तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई मेडिकल सुविधा नहीं दी जा रही है। जिससे भी श्रद्धालु परेशान दिख रहे हैं। हालांकि, विभाग द्वारा बिछौर गांव के मंदिर में यह सुविधा दी जा रही है।
इसके साथ ही जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए काफी स्थानों पर ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं कराई गई है।
लोगों की सेवा में जुट रहे हैं लोग
परिक्रमा कर रहे श्रद्धालुओं की सेवा में क्षेत्र के लोग जी-जान से जुटे हुए हैं। जिनके द्वारा श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह टैंट लगाने के साथ ही शिविर भी लगाए गए हैं। जहां पर उनको ठंडा पानी से लेकर शरबत व खाना भी खिलाया जा रहा है।
इसके साथ ही लाेगों के आराम करने के लिए पंखों व कृलरों की भी व्यवस्था कराई गई है। सबसे बड़ा शिविर बिछौर गांव के लक्ष्मण मंदिर में लगाया गया है। जहां पर प्रति दिन व रात लाखों श्रद्धालुओं के लिए भंडारा चलाया हुआ है।
268 किलोमीटर की परिक्रमा का विशेष महत्व
करीब 268 किलोमीटर में फैली 84 कोसी परिक्रमा का मार्ग मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बिछौर, डीग सहित कई पवित्र स्थलों से होकर गुजरता है। इस दौरान श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
भक्ति में डूबा पूरा बृज क्षेत्र
परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु क्षेत्र से लगते हुए बिछौर व नवलगढ़ में भजन-कीर्तन, कथा-श्रवण और सत्संग में भाग ले रहे हैं। जिससे पूरा ब्रज क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब रहा है। जगह-जगह भंडारों और सेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। जहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और विश्राम की व्यवस्था की गई है।
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आस्था और आत्मिक शांति का संगम
बृज 84 कोसी परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और ईश्वर से जुड़ने का माध्यम भी मानी जाती है। बृज की इस पावन भूमि पर शुरू हुई यह परिक्रमा श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति और गहरी आस्था का अद्भुत संगम बन गई है।