अधूरा रह गया वैज्ञानिक बनने का सपना, PhD छात्रा ज्योति को दी गई अंतिम विदाई; फफक-फफक कर रोए पिता
पंजाब यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रही 28 वर्षीय शोध छात्रा ज्योति की करंट लगने से मौत हो गई। बुधवार को उनके पैतृक गांव ककराला में नम आंखों से अंतिम संस् ...और पढ़ें

गांव में शोध छात्रा ज्योति का अंतिम संस्कार किया गया। सौ- ग्रामीण
HighLights
पंजाब यूनिवर्सिटी में करंट लगने से ज्योति की मौत।
ककराला गांव में गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार।
मेधावी छात्रा का वैज्ञानिक बनने का सपना अधूरा रहा।
संवाद सहयोगी, (कनीना) महेंद्रगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में करंट लगने से जान गंवाने वाली गांव ककराला की 28 वर्षीय शोध छात्रा ज्योति का बुधवार सुबह पैतृक गांव में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। होनहार बेटी को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और परिचित पहुंचे। नम आंखों से सभी ने उसे श्रद्धांजलि दी।
परिवार के आंसुओं के बीच पूरे गांव में शोक का माहौल रहा। ज्योति की मौत की खबर मंगलवार को गांव पहुंची थी, जिसके बाद से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बुधवार सुबह करीब 10 बजे उसका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की जुबान पर यही बात थी कि गांव की एक प्रतिभाशाली बेटी असमय दुनिया छोड़ गई।

बेटी के अंतिम संस्कार के बाद बिलखता पिता। सौ.- सोशल मीडिया
बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी कर रही थी ज्योति
ज्योति एक साधारण किसान परिवार से थी। उसके पिता रविंद्र खेती-बाड़ी के साथ एक निजी स्कूल में बस चालक का काम करते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। ज्योति ने गांव के एसडी स्कूल ककराला से 12वीं, इसके बाद एमडीयू से बीएससी और हिसार से एमएससी करने के बाद पीयू में बायोटेक्नोलॉजी विषय में पीएचडी कर रही थी।
स्वजन के अनुसार ज्योति शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी थी। उसका सपना बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध कर वैज्ञानिक बनने का था। वह घर आने पर भी अधिकांश समय किताबों और रिसर्च में बिताती थी। पेड़-पौधों और वैज्ञानिक प्रयोगों में उसकी विशेष रुचि थी। दो महीने पहले जब वह घर आई थी, तब उसने अपने शोध कार्य और भविष्य की योजनाओं को लेकर परिवार से उत्साहपूर्वक चर्चा की थी।
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शादी की तैयारी कर रहा था परिवार
स्वजन ने बताया कि पीएचडी का कार्य लगभग अंतिम चरण में था। इसी कारण परिवार अब उसकी शादी के लिए योग्य वर की तलाश भी कर रहा था। माता-पिता चाहते थे कि पढ़ाई पूरी होने के बाद बेटी का घर बसा दें, लेकिन एक हादसे ने उनके सभी सपनों को हमेशा के लिए तोड़ दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि रविंद्र ने कठिन परिस्थितियों में भी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिस बेटी को वैज्ञानिक बनते देखने का सपना परिवार ने वर्षों तक संजोया था, आज उसी बेटी को नम आंखों से अंतिम विदाई देनी पड़ी।