क्या भारत में दिखेगा रिंग ऑफ फायर? 17 को साल का पहला सूर्य ग्रहण तो होलिका दहन वाले दिन लगेगा चंद्र ग्रहण
हरियाणा विज्ञान मंच के अनुसार, 17 फरवरी को पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जो भारत में अदृश्य रहेगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। वहीं, 3 मार्च को ह ...और पढ़ें

17 फरवरी को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा। फोटो: सांकेतिक
HighLights
17 फरवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण, भारत में अदृश्य रहेगा
3 मार्च होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण, भारत में दृश्य होगा
चंद्र ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा
जागरण संवाददाता, नारनौल। 17 फरवरी को खगोलीय घटना होने जा रही है। इस दिन लगने वाला ग्रहण साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा, जो एक वलयाकार (रिंग ऑफ फायर) सूर्य ग्रहण होगा।
हरियाणा विज्ञान मंच के जिला संयोजक धर्मपाल शर्मा ने बताया कि भारतीय समयानुसार दोपहर 3:26 बजे शुरू होकर शाम 7:57 बजे समाप्त होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, अर्जेंटीना, चिली और दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी हिस्सों में देखा जा सकेगा। यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
- सूतक काल: चूंकि भारत में यह दृश्य नहीं है, इसलिए इसका कोई धार्मिक सूतक काल (12 घंटे पहले) मान्य नहीं होगा।
- राशि प्रभाव: यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है। यह सूर्य ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, लेकिन चंद्रमा की आभासी व्यास सूर्य से छोटा होता है, जिससे सूर्य का केंद्र तो छिप जाता है, लेकिन बाहरी किनारा एक वलय या अंगूठी की तरह चमकता रहता है, जिसे 'आग का घेरा' कहा जाता है।
- सावधानी: ग्रहण वाले क्षेत्रों में, इसे नंगी आंखों से देखना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए विशेष सुरक्षात्मक चश्मे या सोलर फिल्टर का उपयोग किया जाना चाहिए।
क्या यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है?
ज्योतिष और विज्ञान की नजर में ग्रहण को भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में विशेष महत्व दिया गया है। कुछ लोग इसे अशुभ मानते हैं, जबकि वैज्ञानिक इसे सामान्य खगोलीय घटनाएं बताते हैं। साल 2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ने वाले हैं।
ज्योतिष के अनुसार ग्रहण को ऊर्जा परिवर्तन का समय माना जाता है। कहा जाता है कि इस दौरान ग्रहों की स्थिति मानव मन प्रकृति और सामाजिक घटनाओं को प्रभावित करती है। सूर्य ग्रहण 17 फरवरी फाल्गुन अमावस्या को सूर्य ग्रहण लग रहा है।
चंद्रग्रहण होलिका दहन के दिन लगेगा
चंद्र ग्रहण 3 मार्च होलिका दहन के दिन सूर्य ग्रहण के 15 दिन बाद लगेगा। चंद्रग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दिखाई देगा और इसका सूत्र काल भी मान्य होगा। होलिका दहन के समय और पूजा विधि में बदलाव की हालांकि संभावना नहीं होगी।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लगता है, जबकि चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक लग जात लग जाता है।इस समय को नकारात्मक ऊर्जा का काल माना जाता है। इसलिए कोई शुभ कार्य ही नहीं किए जाते। भगवान को छूने तक की मनाई होती है और इसलिए मंदिर सुतक लगते ही बंद हो जाते हैं।