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    मेवात: खरखरी पंचायत की करोड़ों की प्याऊ जमीन पर हेरफेर, ग्रामीणों ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 04:36 PM (IST)

    तावडू के खरखरी गांव में करोड़ों रुपये की प्याऊ भूमि के अवैध पंजीकरण पर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों और ग्राम पंचायत ने आरोप लगाया है कि राजस्व रिकॉर्ड ...और पढ़ें

    तावडू के खरखरी गांव में करोड़ों रुपये की प्याऊ भूमि के अवैध पंजीकरण पर विवाद गहरा गया है। सांकेतिक तस्वीर

    तावडू के खरखरी गांव में करोड़ों रुपये की प्याऊ भूमि के अवैध पंजीकरण पर विवाद गहरा गया है। सांकेतिक तस्वीर

    HighLights

    1. खरखरी गांव में करोड़ों की प्याऊ भूमि का अवैध पंजीकरण।

    2. राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर निजी नामों पर दर्ज।

    3. ग्रामीणों ने पुलिस, सीएम विंडो में शिकायत दर्ज कराई।

    जागरण संवाददाता, तावडू। सोहना रोड पर स्थित खरखरी ग्राम पंचायत की करोड़ों रुपये की ज़मीन—जिसे सार्वजनिक पेयजल सुविधा (प्याऊ) के लिए निर्धारित किया गया था। उसको लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और ग्राम पंचायत ने आरोप लगाया है कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करके, चार कनाल से अधिक की प्याऊ ज़मीन को अवैध रूप से निजी नामों पर पंजीकृत करवा लिया गया है।

    इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है; उन्होंने तावडू शहर पुलिस स्टेशन और 'CM विंडो' पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिसमें दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

    सोमवार को, खरखरी ग्राम पंचायत के सरपंच अशफाक सहित दर्जनों ग्रामीण जिनमें शहाबुद्दीन, इस्माइल और रमजानी भी शामिल थे। शहर पुलिस स्टेशन परिसर पहुंचे और एक लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में कहा गया है कि मौजा खरखरी, तहसील तावडू (नूंह) के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कुल लगभग 19 कनाल और 14 मरला जमीन में से, 4 कनाल और 18.5 मरला का एक विशिष्ट भूखंड आधिकारिक तौर पर प्याऊ जमीन के रूप में निर्धारित था।

    एक ऐसी संपत्ति जिसका रखरखाव और देखरेख ग्राम पंचायत और ग्रामीण वर्षों से करते आ रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2012-2013 के दौरान, कुछ व्यक्तियों ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके, 'विरासत इंतकाल' के माध्यम से जमीन का स्वामित्व अपने नाम करवा लिया, जबकि स्थापित नियमों के अनुसार, प्याऊ जमीन पर इस तरह के इंतकाल लागू नहीं हो सकते।

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    ग्रामीणों ने बताया कि नूंह के उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) ने पहले ही आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि उक्त ज़मीन का इंतकाल नियमों का उल्लंघन है, और इसमें शामिल व्यक्ति किसी भी समय प्याऊ के संरक्षक या देखभालकर्ता नहीं रहे थे। इस निर्देश के बावजूद, राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करके ज़मीन को गलत तरीके से 'खुद काश्त' के तहत दर्शाया गया, जिसके बाद, 23 फरवरी 2026 को, उक्त ज़मीन की एक बिक्री विलेख तावडू निवासी पवन कुमार के पक्ष में निष्पादित कर दी गई।

    शिकायत में अनिल कुमार, सुनील कुमार, पवन कुमार, वाहिदा नंबरदार, संजय गोयल, संबंधित हल्का पटवारी (स्थानीय राजस्व क्लर्क), गिरदावर (राजस्व निरीक्षक), तहसीलदार, विभिन्न अन्य कर्मचारियों और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (DTP) कार्यालय के अधिकारियों के खिलाफ मिलीभगत के सीधे आरोप लगाए गए हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि विवादित जमीन जो सोहना-तोरू मुख्य सड़क के किनारे स्थित है। उसकी मौजूदा बाजार कीमत करोड़ों रुपये है। इस संपत्ति पर लंबे समय से "भूमि माफिया" की नजर रही है, जिन्होंने पहले भी दो बार इस पर कब्जा करने की कोशिश की है।

    ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच करें, दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करें और पंचायत की जमीन को सुरक्षित रखने के लिए जमीन की फर्जी रजिस्ट्रियों को रद करवाएं।

    इस बीच, तोरू के सिटी पुलिस स्टेशन के SHO, नरेश कुमार ने पुष्टि की कि उन्हें एक शिकायत मिली है और उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित दस्तावेजों की फिलहाल जांच की जा रही है, और जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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