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    नूंह में परिवहन संकट: 18 लाख आबादी पर सिर्फ 90 बसें, यात्री जान जोखिम में डालने को मजबूर

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 04:57 PM (IST)

    नूंह जिले की 18 लाख आबादी को मात्र 90 रोडवेज बसों से पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन नहीं मिल पा रहा है, जिससे हजारों यात्री निजी और डग्गामार वाहनों में जान ...और पढ़ें

    AI जनरेटेड।

    AI जनरेटेड।

    HighLights

    1. नूंह में 18 लाख आबादी के लिए केवल 65 रोडवेज बसें उपलब्ध।

    2. यात्री निजी और डग्गामार वाहनों में अधिक किराया देकर यात्रा करते।

    3. केएमपी आर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना भी निर्धारित समय से पीछे।

    शिशपाल सहरावत, नूंह। नूंह जिले की 18 लाख से अधिक आबादी आज भी पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन सुविधा से वंचित है। हरियाणा रोडवेज की बसों की भारी कमी के कारण हजारों यात्रियों को रोजाना निजी बसों और डग्गामार वाहनों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

    इसका खामियाजा यात्रियों को अधिक किराया चुकाने और जान जोखिम में डालकर यात्रा करने के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

    परिवहन सुविधा देना चुनौती बना

    परिवहन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के पास कुल 90 रोडवेज बसें हैं। इनमें से दो दर्जन से अधिक बसें सरकारी विद्यालयों में बालिका शिक्षा वाहिनी योजना के तहत संचालित हैं। ऐसे में नियमित सार्वजनिक परिवहन के लिए करीब 65 बसें ही उपलब्ध रह जाती हैं। इतनी कम बसों से जिले की विशाल आबादी को समुचित परिवहन सुविधा देना चुनौती बना हुआ है।

    रेल नेटवर्क से भी नहीं जुड़ पाया

    स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि नूंह जिला अब तक रेल नेटवर्क से भी नहीं जुड़ पाया है। ऐसे में सड़क परिवहन ही लोगों का प्रमुख सहारा है। केएमपी के साथ प्रस्तावित आर्बिटल रेल कॉरिडोर से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन करीब 5,456 करोड़ रुपये की यह परियोजना निर्धारित समय से पीछे चल रही है। जुलाई 2025 तक पूरा होने का लक्ष्य होने के बावजूद अब तक लगभग 60 से 70 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है।

    पिछले वर्ष जून में जिले को पांच नई बीएस-6 रोडवेज बसें मिली थीं, लेकिन उसी दौरान पुरानी डी-4 श्रेणी की बसों के बेड़े से बाहर होने के कारण वास्तविक संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप बसों का संकट जस का तस बना हुआ है।

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    खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही

    बसों की कमी का सीधा फायदा निजी बस संचालक और डग्गामार वाहन उठा रहे हैं। चार सवारी क्षमता वाले आटो में 18 से 20 यात्रियों को बैठाकर खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है। इससे आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में लोग इन्हीं वाहनों का सहारा लेने को विवश हैं।

    स्थानीय निवासी विजयपाल, अमित, धर्मपाल, बीर सिंह सहरावत और राजपाल चौधरी का कहना है कि जिले में रोडवेज बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि पर्याप्त सरकारी बसें उपलब्ध होने से लोगों को सुरक्षित, सस्ती और समयबद्ध परिवहन सुविधा मिल सकेगी और डग्गामार वाहनों पर भी अंकुश लगेगा।

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    आमजन को समय पर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कई बार लोग जल्दबाजी में निजी बसों या आटो में बैठ जाते हैं। नूंह जिले में अन्य रोडवेज डिपो की बसें भी सेवाएं दे रही हैं और विभाग लगातार बेहतर परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। - प्रदीप अहलावत, महाप्रबंधक हरियाणा रोडवेज, नूंह