बड़ा सवाल: रोज 95 लाख की टोल वसूली, फिर भी मौत के गड्ढों में तब्दील करोड़ों के फ्लाईओवर
पलवल में दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर प्रतिदिन 95 लाख रुपये की टोल वसूली के बावजूद, सड़कें और फ्लाईओवर जानलेवा गड्ढों से बदहाल हैं। ...और पढ़ें
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मौत के गड्ढों में तब्दील करोड़ों के फ्लाईओवर। जागरण
HighLights
दिल्ली-आगरा NH-19 पर 95 लाख प्रतिदिन टोल वसूली।
पलवल में फ्लाईओवर और सड़कें जानलेवा गड्ढों से बदहाल।
अधिकारियों की लापरवाही से बढ़ रहा दुर्घटनाओं का खतरा।
कुलवीर चौहान, पलवल। पलवल में दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर सफर करने वाले राहगीरों के लिए सुहाना सफर अब एक जानलेवा मुसीबत बन चुका है।
गदपुरी और करमन टोल प्लाजा पर प्रतिदिन करीब 95 लाख रुपये की भारी-भरकम टोल वसूली के बावजूद, जिले की 45 किलोमीटर की परिधि में यह राजमार्ग पूरी तरह बदहाल है।
स्थानीय निवासियों से लेकर वृंदावन और ताज नगरी आगरा जाने वाले देशी-विदेशी सैलानियों को इस मार्ग पर कदम-कदम पर अव्यवस्थाओं और जानलेवा गड्ढों का सामना करना पड़ रहा है। करोड़ों की लागत से बने फ्लाईओवर अब सुविधाओं के बजाय हादसों का गवाह बन रहे हैं और यह गड्डों में डूबे हुए हैं। जिम्मेदार अधिकारी इस भयावह स्थिति पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
करोड़ों की लागत, लेकिन गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
करीब आठ वर्ष पहले लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत से इस राजमार्ग को चार से छह लेन में परिवर्तित किया गया था, ताकि राहगीरों को जाम से मुक्ति और सुगम सफर मिल सके। हाईवे को सिग्नल-फ्री घोषित कर इसकी देखरेख का जिम्मा क्यूब हाईवे कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया था। लेकिन हकीकत यह है कि निर्माण के कुछ समय बाद ही फ्लाईओवरों की सूरत बिगड़ गई।

पलवल शहर में पड़ने वाला हुडा फ्लाईओवर और पृथला गांव स्थित फ्लाईओवर वर्ष 2021 में क्रमशः 18 करोड़ और 22 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए थे। पृथला फ्लाईओवर की तो कुछ मरम्मत की गई है, लेकिन मरम्मत के नाम पर लगाई गई पट्टियों से गाड़ियां हिचकोले खाने को मजबूर होती हैं।
वहीं हुडा फ्लाईओवर की हालत तो बेहद खतरनाक बनी हुई है। इसकी सड़क पर दर्जनों गड्डे बन गए हैं। वहीं बघौला फ्लाईओवर की सड़क की बीचों बीच बने बड़े-बड़े हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। इस फ्लाईओवर का निर्माण चौधरी कंस्ट्रक्शन एजेंसी द्वारा 50 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था, जो पिछले साल अक्टूबर माह में पूरा हुआ था। मरम्मत के नाम पर पट्टियां लगाने के बाद भी यह फ्लाईओवर लगातार टूट रहा है।
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सड़क पर आई दरारों और उखड़ी रोड़ी पर प्रशासन ने मरम्मत की लीपापोती तो की, लेकिन वह भी टिक नहीं सकी। आज इस नवनिर्मित फ्लाईओवर के बीचों-बीच गहरे गड्ढे गाड़ियों की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लगाने को मजबूर कर रहे हैं।
फ्लाईओवरों की बदहाल हालत राहगीरों की मुसीबतें बढ़ा रही है और दुर्घटनाओं को निमंत्रण दे रही है। लाइट नहीं जलने से रात के समय अंधेरे के कारण राहगीरों को उखड़ी सड़क और यह गड्ढे दिखाई भी नहीं देते हैं। ऐसे में कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
बैठकों में सिर्फ आश्वासन, समाधान धरातल पर गायब
सड़कों की इस बदहाली और सुरक्षा में चूक का मुद्दा जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में हर महीने होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में प्रमुखता से उठता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी बैठकों में इन मुद्दों को सुनते जरूर हैं, लेकिन धरातल पर समाधान के नाम पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अधिकारियों की यह लापरवाही किसी दिन बड़े हादसे का सबब बन सकती है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग की लगातार मरम्मत के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर मिल सके। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित पड़ने वाले फ्लाईओवरों पर जहां भी गड्डे बने हुए हैं, उन्हें जल्द भरा जाएगा। किसी भी यात्री को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। - डा जयेन्द्र सिंह छिल्लर, जिला उपायुक्त