PHOTOS: पलवल में आफत की बारिश! 3 घंटे में डूबा शहर, 29 करोड़ के नाले फेल; 'दो करोड़' पानी में बहे
पलवल में तीन घंटे की मूसलाधार बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी, जिससे प्रमुख सड़कें, सरकारी कार्यालय और रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए। ...और पढ़ें

नागरिक अस्पताल में जलभराव से डूबी पुलिस चौकी और गाड़ियां। जागरण
HighLights
तीन घंटे की बारिश में पलवल शहर जलमग्न हुआ।
करोड़ों रुपये के नाले और सफाई व्यवस्था फेल साबित हुई।
शहरी जीवन अस्त-व्यस्त, किसानों को बारिश से लाभ।
जागरण संवाददाता, पलवल। बृहस्पतिवार सुबह से शुरू हुई मूसलधार वर्षा ने महज तीन घंटे में पलवल शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी। शहर की प्रमुख सड़कें, सरकारी कार्यालय और रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए।
नालों की सफाई पर इस वर्ष खर्च किए गए करीब दो करोड़ रुपये और दो वर्ष पहले 29 करोड़ रुपये की लागत से बने नाले बारिश के सामने पूरी तरह बेअसर साबित हुए। जलभराव के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित रहा, जबकि आमजन को घंटों भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

रेलवे रोड पर जलभराव से निकलते लोग। जागरण
मौसम विभाग के येलो अलर्ट के बीच हुई तेज वर्षा से जिला नगर आयुक्त कार्यालय, लघु सचिवालय, पुराना कोर्ट परिसर, बिजली कार्यालय, सरकारी स्कूल परिसर और अस्पताल स्थित पुलिस पोस्ट में तीन से चार फुट तक पानी भर गया।
बस अड्डा परिसर भी पानी से घिर गया, जिससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित रही। कमेटी चौक, सेक्टर-दो चौक, माल गोदाम रोड, रेलवे रोड, अलावलपुर रोड, नया गांव, अलीगढ़ रोड और रसूलपुर चौक समेत शहर के अधिकांश हिस्सों में सड़कें तालाब बन गईं।

शिव कॉलोनी में 22 फुट गली में स्कूली बच्चे की हालत बयान कर रही है कितना पानी है। जागरण
कई घरों में घुसा एक से दो फुट तक पानी
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के कई घरों में एक से दो फुट तक पानी घुस गया, जबकि कैलाश नगर में नाला ओवरफ्लो होने से गलियों में गंदा पानी भर गया। रेलवे रोड पर जलभराव रोकने के लिए बनाए गए कैचपिट भी नाकाम साबित हुए।
जलभराव के कारण कई वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए। सड़कें डूबने से न तो वाहन सुचारु रूप से चल सके और न ही पैदल लोगों की आवाजाही संभव हो पाई। व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित रहीं और कई दुकानों व मकानों में पानी घुसने से लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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स्थानीय लोगों ने नगर परिषद और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर वर्ष नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज वर्षा में पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से स्थायी समाधान की मांग की।
शहरों के लिए आफत गांवों के लिए राहत है बारिश
हालांकि शहर के लिए आफत बनी यही वर्षा ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए राहत लेकर आई। किसानों का कहना है कि धान, गन्ना, कपास और चारे की फसलों को इस वर्षा से बड़ा लाभ मिलेगा। लगातार ट्यूबवेल चलाने की जरूरत कम होने से सिंचाई पर होने वाला डीजल और बिजली का खर्च भी घटेगा।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय पर हुई यह बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है और बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है।
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