यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Lok Sabha Election 2024: दुष्यंत नहीं लड़ेंगे लोकसभा चुनाव, हिसार में नैना तो कुरुक्षेत्र में दिग्विजय ठोंकेंगे ताल
Haryana Lok Sabha Election 2024 पूर्व मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। वहीं हिसार से नैना चौटाला तो कुरुक्षेत्र में दिग् ...और पढ़ें

अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। Haryana Lok Sabha Election 2024: हरियाणा में भाजपा से ताजा-ताजा अलग हुई जननायक जनता पार्टी (JJP) ने लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर होमवर्क लगभग पूरा कर लिया है। जेजेपी प्रदेश की चार लोकसभा सीटों हिसार, भिवानी-महेंद्रगढ़, सिरसा और कुरुक्षेत्र में जीतने के इरादे से चुनाव लड़ेगी, जबकि करनाल लोकसभा सीट का चुनाव पार्टी की दमदार उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लड़ा जाएगा।
इन सीटों पर उतारे जाएंगे उम्मीदवार
बाकी बची पांच लोकसभा सीटों गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला, सोनीपत और रोहतक में इसी साल अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी करने के इरादे से उम्मीदवार उतारे जाएंगे। जिला प्रभारियों, जिला अध्यक्षों और प्रदेश स्तरीय नेताओं से चर्चा कर चुकी पार्टी अब उम्मीदवारों के नाम को लेकर विधानसभा स्तरीय पदाधिकारियों के फाइनल विचार-विमर्श करने की प्रक्रिया में जुटी है।
पूर्व सीएम ने जानी कार्यकर्ताओं की राय
जेजेपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के नाते हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश की सभी 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं की राय जानी है। दिल्ली, हिसार, चंडीगढ़ और भिवानी में हर लोकसभा क्षेत्र के 100-100 प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ दुष्यंत चौटाला ने विस्तृत चर्चा की। अधिकतर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राय दी कि हिसार, भिवानी, सिरसा और कुरुक्षेत्र लोकसभा सीटों पर जीत के इरादे के साथ चुनावी रण में उतरना जरूरी है।
दुष्यंत चौटाला नहीं लड़ेंगे चुनाव
हिसार से दुष्यंत चौटाला और भिवानी से डॉ. अजय सिंह चौटाला स्वयं सांसद रह चुके हैं, जबकि सिरसा लोकसभा सीट ताऊ देवीलाल से जुड़ी है। इसलिए इन सीटों पर मजबूत उम्मीदवार दिए जाने चाहिए। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के स्वयं लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है, जबकि दो सीटों हिसार व कुरुक्षेत्र में उनके परिवार के सदस्यों को लड़वाया जा सकता है। दुष्यंत स्वयं चुनाव लड़वाने का काम करेंगे।
खबरें और भी
नैना सिंह चौटाला लड़ सकती हैं चुनाव
हिसार में दुष्यंत चौटाला की माता एवं बाढडा की विधायक नैना सिंह चौटाला को चुनावी रण में उतारे जाने की बात सामने आ रही है, जबकि कुरुक्षेत्र में जेजेपी के प्रधान महासचिव दिग्विजय चौटाला का नाम सामने आया है। कुरुक्षेत्र में इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला भी चुनाव लड़ रहे हैं। अभय सिंह ने साल 2004 में भी कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ा था, जबकि 2019 में उनके बेटे अर्जुन चौटाला ने ताल ठोंकी थी।
यह भी पढ़ें: Haryana News: अनिल विज सहित इन हस्तियों को मिलेगी Z Plus Security, पुलिस ने नए सिरे से की VIP सुरक्षा की समीक्षा
दिग्विजय चौटाला पूर्व में सोनीपत लोकसभा सीट से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। भिवानी-महेंद्रगढ़ में नांगल चौधरी के पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह का चुनाव लड़ना लगभग तय है। राव बहादुर के कांग्रेस छोड़कर हाल ही में जजपा में आने से इस सीट पर तैयारी कर रहे महेंद्रगढ़ के कांग्रेस विधायक राव दान सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
करनाल में मनोहर लाल के सामने हलका उम्मीदवार नहीं उतारेगी जेजेपी
करनाल में पूर्व सीएम मनोहर लाल लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। जेजेपी कार्यकर्ताओं ने दुष्यंत चौटाला को राय दी कि यहां यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि पार्टी ने जानबूझकर भाजपा यानी मनोहर लाल के सामने हलका उम्मीदवार उतारा है। करनाल के चुनाव को मजबूती से लड़ने पर सहमति बनी है। यहां जेजेपी नेता बृज शर्मा, देवेंद्र कादियान, सुरेश मित्तल और गुरदेव रंभा दावेदार हैं।
अंबाला में अशोक शेरवाल और कुसुम शेरवाल चुनाव की तैयारी कर हैं। फरीदाबाद में किसी दूसरे दल में सेंधमारी कर मजबूत उम्मीदवार लाने की तैयारी की जा रही है, जबकि गुरुग्राम में मुस्लिम उम्मीदवार उतारा जाने वाला है। सोनीपत में कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों को देखकर जेजेपी अपने पत्ते खोलेगी। सिरसा में उम्मीदवारों को लेकर चर्चा का दौर जारी है।
लोकसभा की तैयारी में छिपी विधानसभा चुनाव की रणनीति
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में जेजेपी और आम आदमी पार्टी ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था। जेजेपी ने सात और आम आदमी पार्टी ने फरीदाबाद, अंबाला और करनाल लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। तब जेजेपी को 5 प्रतिशत और आप को कुल मिलाकर 50 हजार वोट मिले थे।
साल 2024 का लोकसभा चुनाव कुछ सीटों पर जीतने के साथ ही विधानसभा चुनाव की तैयारी के हिसाब से भी लड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ने के सुझाव आए हैं। पार्टी यह जांच करना चाहती है कि लोकसभा चुनाव में आने वाले मतों के हिसाब से उसे किन विधानसभा क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है और कहां-कहां वह फायदे में रह सकती है।