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    रेवाड़ी में खड़ी ‘मौत की हवेलियां’, प्रशासनिक लापरवाही से खतरे में शहर की सैकड़ों जानें

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 03:58 PM (IST)

    रेवाड़ी शहर में जर्जर भवन लोगों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। हाल ही में बहरोड़ में इमारत गिरने से हुई मौत ने चिंता बढ़ा दी है। कई 100 साल पुरानी इमार ...और पढ़ें

    मोहल्ल मुक्तिवाड़ा में खड़ी वर्षों पुरानी जर्जर हवेली। जागरण

    मोहल्ल मुक्तिवाड़ा में खड़ी वर्षों पुरानी जर्जर हवेली। जागरण

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। शहर में जर्जर हो चुके भवन लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। अधिकतर जर्जर हो चुके भवनों के स्वामी अपना आशियाना दूसरी जगह बना चुके हैं। कुछ भवनों में अभी भी कई परिवार रह रहे है।

    बुधवार को जिले की सीमा से सटे राजस्थान के बहरोड़ शहर में वर्षों प़ुरानी इमारत गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। करीब चार वर्ष पूर्व शहर के भाडावास गेट का मलबा गिरने से भी एक शिक्षक की मौत हो चुकी है।

    ऐसे में शहर के बीच खड़ी वर्षों पुरानी जर्जर इमारतें लोगों के जीवन पर भारी पड़ सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी जर्जर इमारतों को उदासीनता बरते हुए है।

    दरअसल, शहर के मोहल्ला मुक्तिवाड़ा, शुक्रपुरा, तेजपुरा, बास सिताबराय, चौधरीवाड़ा के अलावा अन्य जगह पर 100 साल से अधिक पुरानी इमारतें हैं, जो पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं, जो लंबे समय से बंद हैं।

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    थोड़े मुनाफे के सुरक्षा से खिलवाड़

    भवन मालिकों ने थोड़े मुनाफे के लिए जर्जर भवनों में किरायेदार बसा दिए हैं। कुछ लोगों ने इसकी शिकायत नगर परिषद में की, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अब किरायेदार इन भवनों को खाली करने को तैयार नहीं हैं।

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    इस कारण नप प्रशासन भी दबाव में रहता है। प्रशासन ने भी करीब 20 खंडहर बन चुकीं हवेलियों को चिह्नित कर खतरनाक घोषित कर रखा है। इसके बावजूद कुछ भवनों को लोगों ने अपना आसरा बनाया हुआ है।

    बाजार के अंदर भी कई ऐसे भवन हैं, जो जर्जर हो चुके हैं। ये कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। इस दौरान वहां से गुजरने वाले लोगों की जिंदगी पर भी खतरा मंडरा रहा है।

    नागरिक सुरक्षा के तहत ऐसे जर्जर भवनों को ध्वस्त करने का जिम्मा नगर परिषद व लोक निर्माण विभाग का है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही से लोगों की जिंदगी खतरे में है।

    लोक निर्माण विभाग देता है नप को निर्देश

    जर्जर भवनों को गिराने के लिए नगर परिषद में शिकायत की जाती है। नगर परिषद के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी मौके का मुआयना करके लोक निर्माण विभाग को स्थिति से अवगत कराते हैं।

    इसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भवन का निरीक्षण कर उसे ध्वस्त करने अथवा नहीं कराने के निर्देश देते हैं, लेकिन इसी काम में दोनों ही विभाग के अधिकारी महीनों लगा देते हैं। वर्तमान में ऐसे कई भवन हैं, जिनकी शिकायत पर ऐसी ही नाममात्र कार्रवाई चल रही है।

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    नप की तरफ से ऐसे भवनों को चिन्हित कर लिया गया है। पहले भी नोटिस जारी किए गए थे। फिर से इन्हें तोड़ने के लिए मकान मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।

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    सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद