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    CWG में कैसे गोल्ड मेडलिस्ट बनीं शर्मिला धनखड़? कोच टेकचंद ने बताया सफलता का राज

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 01:03 PM (IST)

    पैरा खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपने गुरु टेकचंद को गुरु पूर्णिमा का अनुपम उपहार दिया। ...और पढ़ें

    पैरा खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ और गुरु टेकचंद।

    पैरा खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ और गुरु टेकचंद।

    HighLights

    1. शर्मिला धनखड़ ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर गुरु को दिया उपहार।

    2. गुरु टेकचंद ने शर्मिला के खेल अनुशासन और समर्पण की सराहना की।

    3. शर्मिला ने अपने गुरु टेकचंद का नाम विश्व पटल पर पहुंचाया।

    जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। गुरु पूर्णिमा यानी गुरुओं के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करने के लिए समर्पित होने का दिन। बुधवार को गुरु पूर्णिमा है। इससे पहले पैरा खिलाड़ी शर्मिला धनखड़ (Sharmila Dhankar) ने राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर अपने गुरु टेकचंद को ऐसा उपहार दिया, जिससे न केवल उनका सीना चौड़ा हो गया, बल्कि अपने साथ-साथ प्रशिक्षक टेकचंद का नाम भी विश्व के पटल पर पहुंचा दिया।

    शर्मिला की सफलता पर भावुक हुए गुरु टेकचंद

    शर्मिला की सफला पर प्रशिक्षक टेकचंद भी फुले नहीं समा रहे हैं। टेकचंद कहते हैं कि जो मुकाम वह अपने खेल करियर में नहीं प्राप्त कर सके राष्ट्रमंडल खेलों में शर्मिला ने करके दिखा दिया। शर्मिला शुरू से ही अपने खेल के प्रति समर्पित और अनुशासित रही हैं। टेकचंद बोले, शर्मिला खेल की बारीकियां बहुत कम समय में समझने के साथ खामियों में सुधार कर लेती हैं।

    भले करीब दो साल से शर्मिला सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधीकरण (साईं) में अभ्यास कर रही हैं। इससे पहले वह रेवाड़ी के राव तुलाराम स्टेडियम में ही अभ्यास करती थीं। एक सड़क हादसे में शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बाद टेकचंद का जीवन अंधकारमय था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और खेलों में राष्ट्रीय ही नहीं अंतररष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

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    जब वर्ष 2020 में शर्मिला ने राव तुलाराम स्टेडियम में टेकचंद को व्हीलचेयर पर खेलते हुए देखा और उनकी खेल उपलब्धियों के बारे में जानकारी मिली तो शर्मिला के मन में विचार आया कि जो व्यक्ति शारीरिक दिव्यांगता के बावजूद इस मुकाम पर पहुंच सकता है तो वह तो इतनी लाचार भी नहीं है। बस यहीं से उन्हें अपना गुरु मानते हुए उनके सान्निध्य में अभ्यास करना शुरू कर दिया।

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    टेकचंद ने बताया कि शर्मिला ने वर्ष 2021 में पहली बार राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक के डिस्कस थ्रो में हिस्सा लिया और स्वर्ण पदक जीत गईं। यहां से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जीवन और खेल की इस यात्रा में शर्मिला के पति अजीत का भी मार्गदर्शन और सहयोग रहा, जिन्होंने शर्मिला को हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

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    बेटियां भी मानती हैं मां को गुरु

    जब शर्मिला राव तुलाराम स्टेडियम में अभ्यास करने जाती थीं तो साथ में दोनों बेटियां भी कभी कभार जाती थीं। जब मां ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए उपलब्धियां हासिल करना शुरू किया तो बेटियों ने भी खेलों में हिस्सा लेना शुरू किया। बड़ी बेटी अनुज ने सीबीएसई की उत्तरी क्षेत्र तक जेवलिन खेलते हुए पदक जीत चुकी हैं वहीं 10वीं में पढ़ रही दूसरी बेटी लक्ष्मी लंबी कूद की खिलाड़ी हैं।

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