'मेरी मां ने दुनिया के ताने सुनकर भी मेरा साथ दिया...', कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर बोलीं शर्मिला
शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी मां संतोष देवी को समर्पित किया, जिन्होंने जीवनभर संघर्ष किया। दृष्टिबाधित मां ने बेटी की उप ...और पढ़ें

स्वर्ण पदक जीतने के बाद तिरंगा लहराकर खुशी व्यक्त करती शर्मिला। सौ. स्वयं
HighLights
शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ में जीता स्वर्ण पदक।
गोल्ड मेडल मां संतोष देवी को समर्पित किया।
परिवार ने इसे संघर्ष की जीत बताया।
जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल जीतकर ग्लासगो की धरती पर तिरंगा फहराने वाली शर्मिला धनखड़ ने पदम जीतने के बाद कहा, ‘मेरी मां ने दुनिया के ताने सुनकर भी मेरा साथ दिया। यह पदक मेरी मां को समर्पित है, जिन्होंने इतने संघर्ष के बाद भी मुझे इतना प्यार दिया’।
दरअसल, शर्मिला की तरह की उनकी बुजुर्ग मां संतोष देवी ने भी जीवनभर संघर्ष किया। जन्म से ही दृष्टिबाधित संतोष देवी ने तंग हालातों के बीच शर्मिला की परवरिश की।

गांव छितरौली में शर्मिला के घर के बाहर बैठे हुए ग्रामीण। जागरण
दो भाई बहनों में सबसे छोटी शर्मिला का परिवार शुरू से ही संघर्ष करता आया है। शर्मिला का भाई नवीन भी रेवाड़ी में आटो चलाता है। उनके दिव्यांग पिता जयलाल का दो वर्ष पहले निधन हो गया था।
वर्तमान में उनकी मां संतोष देवी भाई नवीन और भाभी के साथ रेवाड़ी में किराये के मकान में रहती हैं। हालांकि गांव छीतरौली से उनका लगाव आज भी बना हुआ है और हर सप्ताह गांव में उनका आना-जाना रहता है।

मां शर्मिला के स्वर्ण पदक जीतने के बाद खुशी करती बेटी अनुज व लक्ष्मी। जागरण
फिलहाल संतोष देवी गांव में ही है। शर्मिला की मां संतोष देवी, भले ही आंखों से देख नहीं सकतीं, लेकिन बेटी के हाथों में स्वर्ण पदक की जानकारी मिलने पर भावुक हो उठीं। उनकी आंखें नम हो गई।
उन्होंने कहा, 'मुझे ज्यादा नहीं बोलना आता, बस बेटी ने नाम कमाया है... इसकी बहुत खुशी है’। भाई नवीन ने बहन की इस उपलब्धि को पूरे परिवार के संघर्ष की जीत बताया है।
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