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    जल्द ही दिल्ली तक दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, धुएं की जगह छोड़ेगी पानी; रेल मंत्री ने बताईं खूबियां

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 01:02 PM (IST)

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से दिल्ली तक चलने को तैयार है, जिसका परीक्षण सोनीपत से दिल्ली के बीच चल रहा है। यह ट्रेन धुआं नहीं, बल्कि सिर्फ पानी ...और पढ़ें

    HighLights

    1. भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से दिल्ली तक चलेगी

    2. यह ट्रेन धुआं नहीं, बल्कि केवल पानी का उत्सर्जन करेगी

    3. पूरी तकनीक भारत में विकसित, आईपीआर देश के पास सुरक्षित

    डिजिटल डेस्क, सोनीपत। भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन अब जींद से दिल्ली तक दौड़ने की तैयारी में है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। फिलहाल ट्रेन की टेस्टिंग सोनीपत से दिल्ली के बीच चल रही है।

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस तकनीक के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन ट्रेन की पूरी तकनीक विकसित हो चुकी है। खास बात यह है कि इस ट्रेन से धुआं नहीं निकलेगा, बल्कि इसका उत्सर्जन सिर्फ पानी होगा।

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    सोनीपत से दिल्ली तक चल रही टेस्टिंग

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण अभी सोनीपत से दिल्ली के बीच किया जा रहा है। आने वाले समय में यह ट्रेन जींद से दिल्ली तक चलेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के जरिए भारत हरित परिवहन के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा रहा है।

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    हाइड्रोजन फ्यूल सेल से बनेगी बिजली

    रेल मंत्री के मुताबिक, ट्रेन को चलाने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल किया गया है। फ्यूल सेल हवा से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को मिलाकर बिजली पैदा करता है, जिससे ट्रेन के मोटर चलते हैं।

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    शिव नादर विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हरप्रीत सिंह अरोरा के अनुसार, यही तकनीक इस ट्रेन को पारंपरिक ईंधन से अलग बनाती है।

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    धुएं की जगह सिर्फ पानी का उत्सर्जन

    हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी पर्यावरण अनुकूल तकनीक है। ट्रेन से किसी भी तरह का कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और इसमें धुएं की जगह केवल पानी निकलता है। इसके लिए जींद में पानी से हाइड्रोजन तैयार करने का विशेष प्लांट भी स्थापित किया गया है।

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    देश में बनी तकनीक, हैं सभी अधिकार

    अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि पूरी तकनीक भारत में विकसित की गई है और इसके सभी बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) देश के पास सुरक्षित हैं।

    उन्होंने बताया कि इस तकनीक की जांच और प्रमाणीकरण दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एजेंसियों ने किया है, जिससे इसकी सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।

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    समुद्र और सड़कों तक पहुंचेगी तकनीक

    रेल मंत्री के अनुसार, रेलवे में इस्तेमाल होने के बाद इस तकनीक का उपयोग अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा। इसका छोटा संस्करण ट्रकों में लगाया जा सकता है, जबकि समुद्री क्षेत्र में छोटी और मध्यम आकार की नौकाओं में भी इसका इस्तेमाल संभव है।

    उनका कहना है कि तकनीक का स्वदेशी विकास भारत को भविष्य में दूसरे देशों पर निर्भर होने से बचाएगा।

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    हरियाणा में18 हजार करोड़ की रेलवे परियोजनाएं

    अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में हरियाणा को रेलवे के लिए सिर्फ 300 करोड़ रुपये मिलते थे, जबकि अब केंद्र सरकार ने रेलवे बजट में 11 गुना वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि इस समय हरियाणा में करीब 18 हजार करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

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    विशेषज्ञों ने जताई उम्मीद, लेकिन रखी शर्त

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ रेलवे को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से बाहर निकालने की दिशा में अहम कदम है।

    हालांकि, उनका कहना है कि इसका दीर्घकालिक भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि नवीकरणीय ऊर्जा से तैयार सस्ता हरित हाइड्रोजन कितनी आसानी से उपलब्ध हो पाता है और यह आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक साबित होता है।

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