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    दिल्ली-करनाल नमो भारत कॉरिडोर का काम तेज: सोनीपत पहुंची सॉइल टेस्टिंग टीम, कहां-कहां बनेंगे पिलर और स्टेशन

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 08:13 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली-करनाल नमो भारत कॉरिडोर का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसके तहत अब सोनीपत में भू-तकनीकी सर्वे के लिए मिट्टी परीक्षण शुरू हो गया है। ...और पढ़ें

    हुआ मिट्टी परीक्षण। जागरण

    हुआ मिट्टी परीक्षण। जागरण

    HighLights

    1. नमो भारत कॉरिडोर का भू-तकनीकी सर्वे सोनीपत में शुरू।

    2. मिट्टी परीक्षण से पिलर और स्टेशन की नींव तय होगी।

    3. सोनीपत को आर्थिक-सामाजिक लाभ, यात्रा समय में कमी।

    जागरण संवाददाता, सोनीपत। दिल्ली से करनाल तक बनने वाले नमो भारत कारिडोर (आरआरटीएस) धरातल पर तेजी से आकार लेता दिख रहा है। दिल्ली के आइटीओ क्षेत्र के बाद अब भू-तकनीकी सर्वे की टीम सोनीपत पहुंची चुकी है।

    टीम चार दिन से कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में सायल टेस्टिंग (मिट्टी परीक्षण) का काम कर रही है, जो संकेत है कि 136 किलोमीटर लंबा यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब अपने सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी चरण में प्रवेश कर चुका है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी हाई-स्पीड रेल कारिडोर के निर्माण से पहले जमीन की भार वहन क्षमता और भूगर्भीय संरचना की जांच करना अनिवार्य होता है।

    मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि एलिवेटेड ट्रैक के पिलर कितनी गहराई तक जाएंगे और स्टेशनों की नींव कैसी होगी।

    हरियाणा सरकार से मंजूरी मिलने के बाद सायल टेस्टिंग की प्रक्रिया पूरी होते ही स्टेशन और पिलर के स्ट्रक्चरल डिजाइन तैयार करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

    सोनीपत को मिलेगा सबसे बड़ा आर्थिक व सामाजिक लाभ

    इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से सबसे ज्यादा राहत सोनीपत और आसपास के इलाकों को मिलेगी। रोजाना दिल्ली आने-जाने वाले हजारों नौकरीपेशा, व्यापारियों व विद्यार्थियों को एनएच-44 के जाम और लोकल ट्रेनों की भीड़ से मुक्ति मिलेगी।

    दिल्ली और सोनीपत के बीच यात्रा के समय में अप्रत्याशित कमी आएगी। वहीं कुंडली, नाथूपुर, मुरथल और गन्नौर जैसे इलाकों में रियल एस्टेट, व्यावसायिक केंद्रों और औद्योगिक निवेश को नया उछाल मिलेगा।

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