सोनीपत में सामने आया अजीब वेतन घोटाला, रिटायरमेंट के बाद भी ले रहे सैलरी; 5 अफसरों ने रची साजिश
सोनीपत के गन्नौर खंड में एक वेतन घोटाला सामने आया है, जहाँ सेवानिवृत्त जलकर्मी रोहतास को 22 महीने अतिरिक्त वेतन मिला और श्रवण नामक जलकर्मी 75 वर्ष की ...और पढ़ें

पंचायती राज विभाग के निदेशक की ओर से जारी आदेशों में अब पांचों अधिकारियों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए हैं। एआई इमेज
HighLights
गन्नौर में सेवानिवृत्त जलकर्मी को 22 माह अतिरिक्त वेतन।
75 वर्षीय जलकर्मी 62 का दिखाकर ले रहा था सैलरी।
दो बीडीपीओ सहित पांच अधिकारी वेतन घोटाले में दोषी।
नंदकिशोर भारद्वाज, सोनीपत। गन्नौर खंड में हुए वेतन घोटाले में गांव शेखपुरा के जलकर्मी रोहतास अपनी रिटायरमेंट से 22 महीने अधिक समय तक वेतन लेते रहे थे। शिकायत के बाद जिला परिषद के सीईओ की ओर से की गई जांच में तत्कालीन बीडीपीओ पूनम चंदा, मौजूद बीडीपीओ राजेश टिवाणा, एक सहायक व दो लेखा लिपिक को दोषी पाया गया। पंचायती राज विभाग के निदेशक की ओर से जारी आदेशों में अब पांचों अधिकारियों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए हैं।
उम्र 75 और कागज में दिखाया 62
गांव कैलाना के जलकर्मी श्रवण की वर्तमान में आयु 75 साल है, जबकि उसे सरकारी रिकाॅर्ड में 62 वर्ष का दिखाया गया है। वह विभाग में काम करते हुए वेतन ले रहा है। शिकायत होने पर अधिकारियों ने गलत रिपोर्ट भेजते हुए इसकी आयु को सही बताया था। अब विभाग के अधिकारियों ने श्रवण की आयु संबंधी जांच दोबारा करने के आदेश जारी किए हैं।
कैसे कर रहे थे उम्र में हेरफेर?
दो सितंबर, 2025 को अधिकारियों को शिकायत देकर बताया गया कि गन्नौर ब्लाक में पंचायती राज विभाग में भारी अनियमितताएं बरती जा रही है, इससे विभाग को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। शिकायत में बताया गया गांव शेखपुरा के रहने वाले जलकर्मी रोहतास 22 महीने पहले ही रिटायरमेंट की तय आयु को पूरा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब भी विभाग की ओर से वेतन जारी किया जा रहा है। वहीं गांव कैलाना के रहने वाले जलकर्मी श्रवण वर्तमान में 75 वर्ष के हो चुके हैं, लेकिन आधार कार्ड व अन्य दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर वे अब भी विभाग में काम करते हुए वेतन ले रहे हैं।
खुद ही जमा कर दिया रुपया
शिकायत के बाद दोनों मामलों में जिला परिषद के सीईओ को जांच सौंपी गई। शेखपुरा के रोहतास को रिटायरमेंट की तय आयु से 22 महीने अधिक वेतन लेने का दोषी पाया गया। इसके बाद विभाग ने उनसे 2,91,720 रुपये की रिकवरी जमा कराई। सूत्राें का कहना है कि जलकर्मी गरीब आदमी है, उसने रिकवरी जमा कराने में असमर्थता जताई थी, इसके बाद अधिकारियों ने खुद को फंसता देखकर अपनी जेब से रिकवरी के रुपये जमा कराए थे।
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दोबारा जांच के आदेश जारी
दूसरे मामले में कैलाना के श्रवण की आयु के संबंध में अधिकारियों ने विभाग को रिपोर्ट भेजते हुए कहा कि श्रवण की आयु ठीक है, लेकिन अब उच्च अधिकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए और दोबारा जांच के आदेश जारी किए गए हैं। आधारकार्ड में जन्मतिथि के हिसाब से श्रवण अभी 62 वर्ष हैं, जबकि विभाग के आइकार्ड व अन्य दस्तावेजों में उसकी उम्र एक जनवरी, 1951 लिखी गई है, उसके अनुसार वह 75 साल के हैं। श्रवण अभी भी विभाग में काम करते हुए वेतन ले रहे हैं।
आयु की दोबारा जांच करने के आदेश
जिला परिषद के सीईओ की मुख्यालय को भेजी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार गन्नौर की तत्कालीन बीडीपीओ पूनम चंदा, मौजूदा बीडीपीओ राजेश टिवाणा, सहायक जयपन, लेखा लिपिक सुनील कुमार व जितेश कुमार को वेतन जारी करने का दोषी पाया गया।
सभी ने आरोपितों ने जांच अधिकारी के समक्ष दर्ज कराए अपने बयान में अज्ञानतावश यह गलती हो जाने की बात स्वीकारी और इस शिकायत को दफ्तर दाखिल करने का आग्रह किया। जांच अधिकारी ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट पंचायती राज विभाग के निदेशक को भेज दी।
अब पांचों अधिकारियों को वेतन घोटाले का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं। वहीं, जलकर्मी श्रवण की आयु संबंधी जांच दोबारा करने के आदेश दिए गए हैं।
"मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर जांच में सभी अधिकारी दोषी पाए गए हैं तो विभाग के उच्च अधिकारी ही तय करेंगे कि इनके खिलाफ क्या कार्रवाई अमल में लाई जानी है। कार्रवाई के आदेश आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।"
-मनीष मलिक, डीडीपीओ, सोनीपत।
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