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    सोनीपत में लीक पाइपलाइन ने घोला पेयजल में 'जहर', नलों में पहुंच रहा सीवर का पानी

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 02:09 AM (GMT+05:30)

    सोनीपत में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हजारों परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। क्षतिग्रस्त पाइपलाइनें, सीवर का रिसाव और अवैध कनेक्शन इस समस् ...और पढ़ें

    सारंग रोड अंडरब्रिज के नीचे भरा सीवर का पानी। यहां से कई क्षेत्रों की पेयजल लाइन होकर गुजरती है। जागरण

    सारंग रोड अंडरब्रिज के नीचे भरा सीवर का पानी। यहां से कई क्षेत्रों की पेयजल लाइन होकर गुजरती है। जागरण

    HighLights

    1. करोड़ों खर्च के बावजूद सोनीपत में दूषित पेयजल की गंभीर समस्या।

    2. क्षतिग्रस्त पाइपलाइनें और सीवर का रिसाव मुख्य कारण।

    3. अवैध कनेक्शन, WTP खराबी से पानी की गुणवत्ता प्रभावित।

    जागरण संवाददाता, सोनीपत। शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नगर निगम ने पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन धरातल पर हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। करोड़ों की रुपये की लागत से तैयार रेनीवेल परियोजना और महलाना रोड वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) के बावजूद शहर के हजारों परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। शहर में करीब 350 किलोमीटर सीवरेज लाइन है।

    वहीं, 35 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट राठधाना में और 25 एमएलडी का ककरोई रोड पर है। रूटीन में शहर 35 से 40 एमएलडी तक पानी उगल रहा है। शहर में सीवरेज लाइनों की सफाई नहीं हुई है, जिसके चलते सीवर का पानी उफान मारकर बाहर आता है।

    यह पानी आसपास से गुजर रही लीक हो चुकी पेयजल पाइपलाइन में मिल जाता है। कई क्षेत्रों में सप्लाई के पानी में बदबू, मटमैला और सीवर का पानी मिला होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

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    शहर में भूजल पीने लायक नहीं है। पानी में टीडीएस की मात्रा ज्यादा होने की वजह से बिना शोधित जल पीना खतरे से खाली नहीं है। शहर के बीचोंबीच स्थित ईदगाह कालोनी सहित गोहाना रोड पर बसी कालोनियों में टीडीएस की मात्रा 1200 के पार है।

    यमुना के पानी का टीडीएस 300 के पार

    रोहतक रोड पर बसी बाबा कालोनी और मोहन नगर में भी स्थित खराब है। यहां टीडीएस 2000 के पार जा चुका है। शहर की पूर्वी कालोनियों में रेनीवेल के जरिए सप्लाई हो रहे यमुना के पानी का टीडीएस भी 350 के पार है। यह खतरनाक श्रेणी में हैं।

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    शुद्ध पेयजल में टीडीएस की अधिकता नहीं होनी चाहिए। ऐसे में शहर लोग रेनीवेल ओर अन्य माध्यमों से की जाने वाली पानी की सप्लाई पर आश्रित है, जिसके चलते शहर में 45 हजार से अधिक पानी कनेक्शनों पर रेनीवेल परियोजना से पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन पाइप लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त और लीक होने से शुद्ध पानी लोगों तक पहुंचने से पहले ही दूषित हो रहा है। सीवर और नालों का दूषित पानी पाइपलाइन में मिलकर लोगों के घरों तक पहुंच रहा है।

    अमृत में ''जहर'' घोल रही क्षतिग्रस्त पाइप लाइन 

    अमृत योजना में 28 किलोमीटर की नई पेयजल लाइन को बिछाया गया था। फेज-2 के शुरुआती सर्वे में करीब 5 किलोमीटर की लाइन क्षतिग्रस्त पाई गई।

    शहर के तारानगर, डबल स्टोरी, पंचशील कालोनी, सुंदर सांवरी, न्यू मिशन कालोनी, भगत सिंह कालोनी, विकास नगर, मालवीय नगर, वेस्ट रामनगर, शिव कालोनी, गढ़ी घसीटा, ककरोई रोड, कोट मोहल्ला, कलां मोहल्ला, मसद मोहल्ला, न्यू महावीर कालोनी, सुदामा नगर, बाबा कालोनी, मोहन नगर, लक्ष्मण कालोनी में सबसे दूषित पेयजल की समस्या बनी रहती है।

    अवैध तरीके हो रहे कनेक्शन, जिससे बढ़ रही लीकेज 

    नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर में 1,35,757 भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, जबकि केवल करीब 51 हजार ने ही अधिकृत जल एवं सीवर कनेक्शन लिए हुए हैं। यानी 62.44 प्रतिशत भवनों में अवैध कनेक्शन होने का अनुमान है।

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    विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध तरीके से पाइप लाइन जोड़ने के दौरान मुख्य लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे लीकेज बढ़ता है और सीवर का दूषित पानी पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश कर जाता है।

    ट्रीटमेंट प्लांट में भी पर्याप्त पानी नहीं हो रहा साफ 

    महलाना रोड वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) के जेनरेटर की भी सर्विस की जरूरत है। यहां बिजली का ट्रांसफार्मर बार-बार ख़राब हो जाता है। जिसके चलते नहरी पानी को ट्रीट कर आगे बूस्टरों तक भेजने में दिक्कत आ रही है, जिसके चलते महलाना रोड पर बसी कालोनियों के साथ ही लाइन पार क्षेत्र में पेयजल की पर्याप्त सप्लाई नहीं है।

    दूषित पानी की वजह से लोगों की जेब पर पड़ रहा बोझ

    शहर के प्रभावित इलाकों के लोगों का कहना है कि नलों से आने वाले पानी में बदबू आती है और उसका रंग भी अक्सर पीला या मटमैला होता है। दूषित पानी के कारण त्वचा रोग और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

    ऐसे में अधिकांश परिवार पीने के लिए कैंपर या आरओ का पानी खरीदने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि यदि एक दिन पानी का कैंपर न पहुंचे तो घरों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता है।

    व्यवस्था सुधार के लिए टीमें गठित, ठेकेदारों पर लेगा जुर्माना : मेयर

    शहर में बढ़ रही दूषित पेयजल और सीवर जाम की समस्या के समाधान के लिए टीमें गठित की हैं। इसके लिए हर दो वार्ड पर एक टीम को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बुधवार को नगर निगम में समस्या के समाधान को लेकर मंथन हुआ।

    पार्षदों, ठेकेदारों एवं अधिकारियों के बीच हुई बैठक में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि काम में कोताही करने वाले ठेकेदारों पर जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही बूस्टरों पर मोटरों की व्यवस्था और मैनपावर बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए।

    वहीं, गठित की गई टीमें तय वार्डों में ही काम करेगी। मेयर ने पार्षदों को भी कहा वह सुपरवाइजर को अपने वार्ड की शिकायत दर्ज करवाएं ताकि समस्या का समय पर हल हो सकें।

    नंबर गेम 

    - 100 करोड़ के रेनीवेल प्रोजेक्ट की पाइपलाइन भी जगह-जगह लीक
    - 22.33 करोड़ के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के बावजूद नहीं सुधरे हालात
    - 2000 तक पहुंच चुका है भूमिगत जल का टीडीएस, जो पीने लायक नहीं
    - 50 से ज्यादा शिकायत हर रोज दर्ज हो रही हैं नगर निगम में

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