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    मन्नत मांगी तो लौटी आंखों की रोशनी, महिला ने श्रीनयना देवी जी के दर पहुंच अर्पित किए चांदी के नेत्र

    By Shubham Rahi Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 24 Dec 2025 06:32 PM (IST)

    बिलासपुर की दलिपी देवी का दावा है कि श्री नयना देवी मंदिर में मन्नत मांगने के बाद उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई, जो 80% तक चली गई थी। शिमला आईजीएमसी औ ...और पढ़ें

    आंखों की रोशनी लौटने पर परिवर सहित श्रीनयना देवी मंदिर पहुंची महिला। जागरण

    आंखों की रोशनी लौटने पर परिवर सहित श्रीनयना देवी मंदिर पहुंची महिला। जागरण

    HighLights

    1. दलिपी देवी की आंखों की 80% रोशनी चली गई थी

    2. अस्पतालों में इलाज के बाद भी नहीं मिला आराम

    3. मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए चांदी के नेत्र

    संवाद सहयोगी, बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नयना देवी मंदिर में एक बार फिर आस्था का चमत्कार देखने को मिला है। बिलासपुर शहर के कोसरियां वार्ड की रहने वाली दलिपी देवी ने दावा किया है कि माता के दरबार में मन्नत मांगने के बाद उनकी आंखों की खो चुकी रोशनी वापस आ गई है।

    चली गई थी 80 प्रतिशत रोशनी

    दलिपी देवी के अनुसार, बीते छह महीनों से उनकी आंखों की लगभग 80 प्रतिशत रोशनी चली गई थी। उपचार के लिए वह शिमला आईजीएमसी, एम्स बिलासपुर और अन्य निजी अस्पतालों में लगातार इलाज करवाती रहीं, लेकिन दवाइयों से उन्हें कोई विशेष आराम नहीं मिला।

    उपचार से भी नहीं हुए ठीक तो माता से लगाई अरदास

    चिकित्सकों ने उनकी आंखों में इंफेक्शन बताया था, परंतु उपचार के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था। उन्हीं दिनों उन्होंने माता श्री नयना देवी जी के दरबार में आकर मन्नत मांगी और चांदी के नेत्र चढ़ाने का संकल्प लिया। दलिपी देवी का कहना है कि माता से अरदास करने के बाद धीरे-धीरे उनकी आंखों की रोशनी लौटनी शुरू हो गई और अब उनकी आंख पूरी तरह ठीक है। 

    मन्नत पूरी हुई चांदी के नेत्र किए अर्पित

    मन्नत पूरी होने पर वह परिवार सहित मंदिर पहुंचीं और माता के चरणों में चांदी के नेत्र चढ़ाए। इस दौरान उनके बेटे नरेश और सुरेश भी साथ मौजूद रहे। उनका कहना है कि परिवार ने कठिन समय में माता से सच्चे मन से प्रार्थना की थी और आज उनका विश्वास और भी मजबूत हो गया है। 

    वहीं, मंदिर में श्रद्धालुओं ने भी इस घटना को आस्था का प्रतीक बताते हुए कहा कि विश्वास और श्रद्धा के साथ मांगी गई दुआ कभी व्यर्थ नहीं जाती।

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