हिमाचल के प्राइमरी शिक्षकों का सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का एलान, बगलामुखी से शिमला की पैदल यात्रा करेंगे
हिमाचल प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक 'न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम' के विरोध में 11 जुलाई से बगलामुखी से शिमला तक पैदल यात्रा निकालेंगे। फेडरेशन ने सरकार को 7 ...और पढ़ें

बिलासपुर में पत्रकार वार्ता करते प्राथमिक शिक्षक संघ के पदधिकारी। जागरण
HighLights
प्राथमिक शिक्षक 'न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम' के खिलाफ करेंगे बड़ा आंदोलन।
11 जुलाई से बगलामुखी मंदिर से शिमला तक पैदल मार्च।
सरकार को 7 जुलाई तक बातचीत का अंतिम अवसर दिया।
जागरण संवाददाता, बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग की ओर से लागू किए जा रहे 'न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम' ने प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों के भीतर एक बड़े असंतोष को जन्म दे दिया है। इस नीति के विरोध में राजकीय प्राथमिक शिक्षक फेडरेशन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। बिलासपुर में फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने पत्रकार वार्ता में सरकार की शिक्षा नीति पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने साफ कर दिया कि यह विरोध केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं है, यदि सरकार ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी, तो यह आंदोलन आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव तक एक निरंतर मशाल की तरह जलता रहेगा।
'प्राथमिक शिक्षा बचाओ' का शंखनाद
फेडरेशन ने धरातल पर उतरकर एक बेहद अनूठे और व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है, जिसे 'प्राथमिक शिक्षा बचाओ' नाम दिया गया है। आंदोलन की शुरुआत आगामी 11 जुलाई को ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व रखने वाले मां बगलामुखी मंदिर से होगी। यहां से शिक्षक एक विशाल पैदल यात्रा का आगाज करेंगे, जो दुर्गम रास्तों और पहाड़ों को नापती हुई 25 जुलाई को सूबे की राजधानी शिमला पहुंचेगी।
इसके अगले ही दिन, यानी 26 जुलाई को शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में प्रदेशभर के हजारोंप्राथमिक शिक्षक जुटेंगे और सरकार की नीतियों के खिलाफ एक गगनभेदी महाधरना का आयोजन किया जाएगा।
7 जुलाई की समयसीमा: टूट सकता है संवाद का सेतु
पत्रकार वार्ता के दौरान रमेश शर्मा के तेवरों से यह साफ था कि शिक्षक संगठन अब खोखले आश्वासनों से बहलने वाला नहीं है। उन्होंने सरकार को चेताते हुए 7 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा, "यदि 7 जुलाई तक सरकार ने फेडरेशन को एक गंभीर और निर्णायक वार्ता के लिए नहीं बुलाया, तो इसके बाद संगठन बातचीत के सारे रास्ते बंद कर देगा। इसके बाद केवल आंदोलन की भाषा में ही बात होगी।"
शिक्षक नेताओं ने दर्द बयां करते हुए कहा कि इससे पहले मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने उन्हें बैठक के लिए बुलाकर मीठे आश्वासन तो दिए, लेकिन जब नीतियां धरातल पर उतरीं, तो वे वादों के बिल्कुल विपरीत थीं। सरकार के इस दोहरे रवैये ने शिक्षकों के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है।
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स्कूलों का थम जाएगा विकास
फेडरेशन ने न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम के उन स्याह पहलुओं को भी उजागर किया जो सीधे तौर पर नौनिहालों के भविष्य से जुड़े हैं। आरोप है कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की खेलकूद गतिविधियों को लगभग बंद कर दिया गया है और अब एक नया कैलेंडर थोप दिया गया है, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को अवरुद्ध करता है।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की रीढ़ मानी जाने वाली स्कूल प्रबंधन समितियों को भी धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। एसएमसी के कमजोर होने से स्कूलों को मिलने वाली ग्रांट में भारी कटौती हो रही है। इसका सीधा असर यह होगा कि स्थानीय स्तर पर जो छोटे-मोटे विकास कार्य या जरूरतें तुरंत पूरी हो जाती थीं, वे अब पूरी तरह ठप हो जाएंगी और सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसने लगेंगे।
5000 पद खाली
उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस समय जेबीटी के लगभग 5,000 पद खाली हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश के 3,000 स्कूल ऐसे हैं, जो 'सिंगल टीचर' यानी महज एक शिक्षक के सहारे सांसें ले रहे हैं। यदि वह एक शिक्षक छुट्टी पर चला जाए, तो स्कूल पर ताला लटकने की नौबत आ जाती है।
शिक्षक संगठन का तर्क है कि एक तरफ जहां सरकार इन बुनियादी कमियों को दूर करने में पूरी तरह नाकाम रही है, वहीं दूसरी तरफ न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम जैसे प्रयोग थोपकर बचे-खुचे ढांचे को भी ध्वस्त करने पर आमादा है।
इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा के साथ फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राम सिंह और मंडी जिला के प्रधान दौलत राम कौंडल उपस्थित रहे।