बेहद दर्दनाक है कारगिल के पहले बलिदानी की शहादत, 22 दिन झेली थी दुश्मन की यातनाएं; आज भी न्याय के लिए जंग
कारगिल विजय दिवस पर कैप्टन सौरभ कालिया के बलिदान को याद किया गया, जिन्हें मई 1999 में पाकिस्तानी सैनिकों ने पकड़कर 22 दिनों तक अमानवीय यातनाएं दी थीं। ...और पढ़ें

बलिदानी कैप्टन सौरभ कालिया का फाइल फोटो और उनके पिता एनके कालिया।
HighLights
कैप्टन सौरभ कालिया कारगिल के पहले बलिदानी थे।
उन्हें 22 दिन अमानवीय यातनाएं दी गईं।
पिता न्याय के लिए ढाई दशक से लड़ रहे।
कुलदीप राणा, पालमपुर (कांगड़ा)। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश उन वीर जवानों को नमन कर रहा है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इन्हीं वीरों में शामिल हैं कारगिल के पहले बलिदानी कैप्टन सौरभ कालिया (4 जाट रेजिमेंट), जिनका बलिदान कारगिल युद्ध के इतिहास में एक दर्दनाक और कभी न भूलने वाला अध्याय है।
मई 1999 के मध्य में कारगिल सेक्टर में दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने के लिए कैप्टन सौरभ कालिया अपनी गश्ती टीम के साथ निकले थे। इस दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें और उनके पांच साथियों सिपाही अर्जुन राम, भंवर लाल, भीकाराराम, मूलाराम और नरेश सिंह को युद्धबंदी बना लिया था।
22 दिन तक दी अमानवीय यातनाएं
जिनेवा कन्वेंशन के नियमों की अनदेखी करते हुए उन्हें लगभग 22 दिनों तक अमानवीय यातनाएं दी गईं। 9 जून 1999 को उनके क्षत-विक्षत पार्थिव शरीर भारत को सौंपे गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उनके साथ हुई बर्बरता की पुष्टि हुई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
पिता ढाई दशक से लड़ रहे लड़ाई
कैप्टन सौरभ कालिया के पिता डा. एनके कालिया ढाई दशक से अधिक समय से अपने बेटे और अन्य बलिदानियों के साथ हुए युद्ध अपराध और मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की मांग को लेकर कानूनी प्रयास भी किए हैं।
जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन
डा. एनके कालिया ने पाकिस्तान की ओर से जिनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन और मानवाधिकार हनन के मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उठाने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि यह मामला सरकार, कूटनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के कारण जटिल विषय बना हुआ है। समय-समय पर संसद और अदालतों में भी इस मुद्दे पर चर्चा होती रही है।
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बलिदान युवाओं के लिए प्रेरणा
आज भी कारगिल विजय दिवस और अन्य राष्ट्रीय अवसरों पर देश के नागरिक, पूर्व सैनिक और सेना से जुड़े लोग कैप्टन सौरभ कालिया को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके परिवार के साथ खड़े नजर आते हैं। कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह लड़ाई भले ही लंबी चल रही हो, लेकिन कैप्टन सौरभ कालिया का नाम भारतीय सेना के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।
मेरे बेटे सौरभ का बलिदान केवल हमारे परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव है। हमारा प्रयास है कि उसके साथ हुए अन्याय को दुनिया के सामने रखा जाए। देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले हर सैनिक के सम्मान और न्याय की लड़ाई हमेशा जारी रहेगी।
-डा. एनके कालिया (पिता, कैप्टन सौरभ कालिया)।
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