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    हिमाचल में दरक रहे पहाड़ से पूरा गांव खतरे में, कभी भी मच सकती है तबाही; एक मकान हुआ क्षतिग्रस्त

    By Dinesh Katoch Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Thu, 23 Jul 2026 05:06 PM (GMT+05:30)

    हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में लगातार बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। जवाली उपमंडल की नियांगल पंचायत में जमोला पहाड़ी के दरकने से पूरा गांव खत ...और पढ़ें

    कोटला के नियांगल गांव में पहाड़ी से दरके मलबे की चपेट में आया मकान। जागरण

    कोटला के नियांगल गांव में पहाड़ी से दरके मलबे की चपेट में आया मकान। जागरण

    HighLights

    1. जमोला पहाड़ी के लगातार दरकने से नियांगल गांव खतरे में।

    2. कई घर क्षतिग्रस्त, 15 कनाल कृषि भूमि बर्बाद हुई।

    3. ग्रामीण 2023 से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

    संवाद सहयोगी, कोटला (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में बरसात की बारिश आफत लाई है। जिला कांगड़ा में इस बार ज्यादा नुकसान हो रहा है। शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने से 18 घर जमींदोज हो गए हैं। वहीं जवाली उपमंडल की नियांगल पंचायत में आपदा नहीं थम रही है। यहां पूरे गांव पर खतरा मंडरा रहा है। जमोला पहाड़ी लगातार दरक रही है, जो कभी कहर ढहा सकती है। नाले का बहाव मुड़ने से हुए नुकसान के बाद अब मियोली में जमोला पहाड़ी से लगातार आ रहे मलबे से लोग दहशत में हैं।

    मलबे के कारण गांव के सागर सिंह की गौशाला तथा प्यारू राम का स्लेटपोश मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। करीब 15 कनाल उपजाऊ कृषि भूमि भी बाढ़ की चपेट में आ गई, जिससे मक्की और धान की फसल बर्बाद हो गई। दो दिन पहले जमोला पहाड़ी से आए फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई थी। 

    15 घरों पर खतरा

    मलबे में आए कीचड़, पत्थर, रेत और पेड़ पौधों से भरा मलबा घरों और पशुशालाओं में घुस गया था। कई परिवारों को जान बचाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार छह घर गिरने के कगार पर हैं, जबकि नौ अन्य घर खतरे की जद में आ गए हैं।

    नाले को गहरा किया

    प्रशासन ने स्थानीय पटवारी के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्य शुरू करवाया और जेसीबी मशीन लगाकर नाले को अस्थायी रूप से गहरा किया, ताकि पानी का बहाव निकाला जा सके। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल अस्थायी है और अगली बारिश में फिर वही हालात पैदा हो सकते हैं।

    2023 से लगातार खतरा

    ग्रामीणों का कहना है कि नियांगल पंचायत की जमोला घाटी में यह संकट नया नहीं है। वर्ष 2023 से लगातार पहाड़ी खिसक रही है और हर बरसात में लोग दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं।

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    कोई समाधान नहीं कर पाए सरकार व प्रशासन 

    नवनिर्वाचित वार्ड सदस्य मदन लाल ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों से गरीब जनजातीय परिवार अपने बच्चों और परिजनों के साथ हर बारिश में मौत के डर के बीच जीवन बिता रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय विधायक एवं कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार, जिलाधीश कांगड़ा तथा एसडीएम जवाली से कई बार मांग की गई कि जमोला पहाड़ी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करवाया जाए, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। 

    उनका आरोप है कि हर बार बारिश के बाद केवल खानापूर्ति के तौर पर कुछ घंटों के लिए जेसीबी लगाकर मलबा हटाया जाता है, जबकि पहाड़ी लगातार खिसक रही है।

    खतरा बरकरार, स्थायी समाधान हो

    स्थानीय पंचायत उपप्रधान डा. कुलदीप सिंह ने कहा कि प्रशासन ने नाले को गहरा कर आंशिक राहत तो दी है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है। पीड़ित मदन लाल, चैन सिंह, किरु राम, पवन सिंह, सागर सिंह, कृष्ण चंद, संजीव कुमार, गार्ड सिंह, बबली देवी और चंचलो देवी सहित अन्य प्रभावित परिवारों ने सरकार और प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग करते हुए कहा कि उनका भविष्य भगवान भरोसे है और वे हर पल जान के खतरे के बीच जीने को मजबूर हैं।

    डीसी कांगड़ा से जायजा लेने की मांग

    नियांगल पंचायत की प्रधान शीला देवी और बीडीसी सदस्य दविंद्र बंटी ने जिलाधीश कांगड़ा से स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तथा लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। वहीं पंचायत सचिव हरबंस लाल ने बताया कि प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

    क्या कहता है प्रशासन

    एसडीएम जवाली नरेंद्र जरियाल ने कहा कि जमोला पहाड़ी लगातार खिसक रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से जो भी अस्थायी राहत संभव है, वह उपलब्ध करवाई जा रही है। यदि आवश्यकता पड़ी तो प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा तथा हालात के अनुसार उन्हें दूसरी जगह बसाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।

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