हिमाचल की पंचायतों में लंबित ऑडिट वसूलियों पर सख्त हुई सरकार, समीक्षा समितियों का गठन कर चलेगा अभियान
हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में लंबित अंकेक्षण आपत्तियों और वसूलियों के समाधान के लिए एक विशेष अभियान जुलाई में तीन चरणों में चलेगा। जिला पंचायत अधिकारी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश सरकार पंचायतों में लंबित ऑडिट की वसूली करेगी। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
पंचायतों में लंबित अंकेक्षण आपत्तियों के समाधान हेतु अभियान।
जुलाई में तीन चरणों में चलेगा यह विशेष अभियान।
विकास खंड स्तर पर समीक्षा समितियां गठित, बीडीओ अध्यक्ष।
संवाद सहयोगी, जसवां परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में लंबे समय से लंबित अंकेक्षण आपत्तियों के समाधान और अंकेक्षण वसूलियों में तेजी लाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। पंचायती राज विभाग हिमाचल प्रदेश के निर्देशों का पालन करते हुए जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा की ओर से इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी किए गए हैं। इस विशेष मुहिम को सुचारू रूप से चलाने के लिए विकास खंड स्तर पर विशेष समीक्षा समितियों का गठन किया गया है जो निर्धारित तिथियों में गहनता से मामलों की जांच करेंगी।
तीन चरण में चलेगा अभियान
विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार यह विशेष अभियान जुलाई माह में तीन अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा। प्रथम चरण का अभियान छह जुलाई से आठ जुलाई तक संचालित होगा जिसमें लंबागांव, बैजनाथ, रैत, सुराणी, परागपुर, इन्दौरा, देहरा, बड़ोह और कांगड़ा जैसे विकास खंडों को शामिल किया गया है।
अंतिम दो चरण का शेड्यूल
द्वितीय चरण का अभियान नौ जुलाई और दस जुलाई को विशेष रूप से धर्मशाला विकास खण्ड के लिए चलाया जाएगा। इसके पश्चात तृतीय चरण का अभियान 13 से 15 जुलाई तक आयोजित होगा। इसके तहत पंचरुखी, सुलह, नगरोटा-सूरियां, फतेहपुर, नूरपुर, पालमपुर, भवारना और नगरोटा-बगवां विकास खण्डों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में लंबित आडिट मामलों की समीक्षा की जाएगी।
बीडीओ को बनाया समीक्षा समिति का अध्यक्ष
प्रत्येक विकास खंड के लिए गठित समीक्षा समिति में संबंधित खंड विकास अधिकारी को अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है जबकि पंचायत निरीक्षक और उप-निरीक्षक इसके सदस्य होंगे। इन समितियों के सहयोग के लिए विशिष्ट अधिकारियों और सहायकों को भी नामित किया गया है। यह समितियां निर्धारित तिथियों पर विकास खण्ड स्तर पर पंचायत सचिवों से महालेखाकार कार्यालय के आडिट की अनुवर्तन रिपोर्ट और सभी आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगी। समितियां में जिले के ऑडिटरों को भी शामिल किया गया है।
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पंचायत सचिव करेंगे परीक्षण
पंचायत सचिव द्वारा तैयार की गई प्रश्नोत्तर रूप की अनुवर्तन रिपोर्ट का गहनता से परीक्षण किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसमें कोई कमी न रहे। इसके साथ ही खण्ड स्तर पर लंबित मामलों की अनुवर्तन रिपोर्ट को 'प्रारूप-ब' में तैयार किया जाएगा जिसे खण्ड विकास अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जाना अनिवार्य होगा।
पूर्व प्रतिनिधियों को भी रहना होगा उपस्थित
अंकेक्षण आपत्तियों के उचित निराकरण के लिए किसी भी कार्य या दस्तावेज के भौतिक सत्यापन और मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम तथा अन्य विकास कार्यों से संबंधित रिपोर्ट की आवश्यकता पड़ने पर ग्राम पंचायत के पूर्व एवं वर्तमान प्रधान, कनिष्ठ अभियंता, तकनीकी सहायक और ग्राम रोजगार सेवक को विशेष अभियान के दौरान अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि समीक्षा के दौरान कोई पंचायत सचिव, कनिष्ठ अभियंता, तकनीकी सहायक या ग्राम रोजगार सेवक अनुवर्तन कार्य के संबंध में गंभीर नहीं पाया जाता है या लापरवाही बरतता है तो उसके विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस आदेश की प्रतियां पंचायती राज विभाग के सचिव, जिला उपायुक्त और समस्त संबंधित अधिकारियों को आगामी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दी गई हैं। ऑडिट वसूलियां औऱ निपटारा करने की खबर पर जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा सचिन ठाकुर ने बताया कि इस संदर्भ में उनके द्वारा समीक्षा समितियों का गठन कर दिया गया है।