चिनाब-ब्यास लिंक टनल: रिकॉर्ड समय में तैयार होगा पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाला प्रोजेक्ट, NHPC का पूरा प्लान तैयार
एनएचपीसी 2,254 करोड़ रुपये की लागत से चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग परियोजना को रिकॉर्ड 1,096 दिनों में पूरा करेगा। यह परियोजना चंद्रा नदी के पानी को मढ़ी तक ...और पढ़ें

चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट का कार्य जल्द शुरू होगा। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग पर 2,254 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
एनएचपीसी 1,096 दिनों में परियोजना को पूरा करेगा।
400 मेगावाट बिजली उत्पादन, सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ों के बीच देशहित की बेहद महत्वपूर्ण परियोजना को गति मिलने जा रही है। चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर 2,254 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। एनएचपीसी की ओर से जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार टेंडर खुलने की तिथि को बढ़ाकर 12 अगस्त दोपहर 02:30 बजे किया गया है। पहले यह तिथि 29 जुलाई थी।
अनुबंध मिलने के बाद संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी को परियोजना का निर्माण कार्य 1,096 दिन (लगभग तीन वर्ष) के भीतर पूरा करना होगा। पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाला यह प्रोजेक्ट रिकॉर्ड समय में तैयार होगा।
आनलाइन बोलियां जमा करने की शुरुआत चार अगस्त दिन में 11:00 बजे से होगी। बिड सबमिशन की अंतिम तिथि 10 अगस्त सायं 5:30 बजे तक तय की है।
आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण
लाहुल स्पीति के कोकसर और मनाली के मढ़ी के बीच आकार लेने वाले प्रोजेक्ट में आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण देखने को मिलेगा। इसके तहत मुख्य सुरंग का निर्माण, बैराज व स्टिलिंग बेसिन की स्थापना, पावर इनटेक स्ट्रक्चर्स, अपस्ट्रीम प्लास्टिक कटआफ ट्रेंच और एडिट प्लग सहित तमाम हाइड्रो-मैकेनिकल कार्य किए जाएंगे।
पारदर्शिता के लिए स्वतंत्र बाहरी मानिटर नियुक्त
परियोजना में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने दो सेवानिवृत्त अधिकारियों प्रभाष सिंह (आइटीएस) और उपेंद्र मलिक को स्वतंत्र बाहरी मानिटर नियुक्त किया है।
सुरंग से मढ़ी पहुंचेगा पानी, बनेगी 400 मेगावाट बिजली
योजना के अनुसार, कोकसर में एक बांध का निर्माण कर चिनाब नदी की सहायक चंद्रा नदी के पानी को सुरंग के माध्यम से मनाली के मढ़ी पहुंचाया जाएगा। यहां 400 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा।
भाखड़ा और पौंग बांध में पहुंचेगा पानी
इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल ऊर्जा उत्पादन में भारी बढ़ोतरी होगी, बल्कि भाखड़ा और पौंग बांध के जलस्तर की आवश्यकता भी पूरी होगी।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में छाएगी हरियाली
गर्मी के मौसम में भी पर्याप्त पानी मिलेगा। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होगा, जिससे कृषि और हरियाली को एक नया विस्तार मिलेगा। वहीं पाकिस्तान पानी के लिए तरसेगा।