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    फारेक्स ट्रेडिंग धोखाधड़ी के आरोपितों की 9.31 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी ने की कुर्क, UP का है मुख्य सरगना

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 06:08 PM (IST)

    Forex Trading Scam प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग घोटाले में 9.31 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ कुर्क की हैं। मुख्य आरोपित नवाब उर्फ लविश चौ ...और पढ़ें

    ईडी ने फारेक्स ट्रेडिंग घोटाले में आरोपितों की संपत्ति कुर्क की है।
    ईडी ने फारेक्स ट्रेडिंग घोटाले में आरोपितों की संपत्ति कुर्क की है।

    HighLights

    1. मुख्य आरोपित नवाब उर्फ लविश चौधरी, राजेंद्र कुमार सूद समेत अन्य एजेंटों पर कार्रवाई
    2. मंडी के बल्ह थाना में केस दर्ज होने के बाद सभी आरोपित दुबई व आबूधाबी हो गए थे फरार

    जागरण संवाददाता, मंडी। Forex Trading Scam, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फारेक्स ट्रेडिंग (क्यूएफएक्स) घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपितों की 9.31करोड़ रुपये की संपत्तियों को अंतरिम रूप से कुर्क कर लिया है। चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई 26 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की है।

    कुर्क की गई संपत्तियों का संबंध मुख्य आरोपित उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के शामली के नवाब उर्फ लविश चौधरी, मंडी के जोगेंद्रनगर उपमंडल के गुम्मा के राजेंद्र कुमार सूद समेत अन्य एजेंटों व उनके स्वजन से बताया जा रहा है।

    छह राज्यों में फैला फारेक्स ट्रेडिंग

    देश के छह राज्यों में फैले फारेक्स ट्रेडिंग का मामला दैनिक जागरण ने प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद नेरचौक के एक निवेशक राजेश कुमार ने थाना बल्ह में आरोपितों के विरुद्ध धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया था।

    केस दर्ज होने पर दुबई भाग गए थे आरोपित

    केस दर्ज होने की भनक लगते ही राजेंद्र कुमार सूद,विनीत कुमार व संतोष कुमार दुबई भाग गया था। राजेंद्र कुमार सूद की पत्नी नीतू करीब दो वर्ष से न्यायिक हिरासत में है। प्रदेश हाई कोर्ट से उसकी जमानत याचिका खारिज हाे चुकी है।

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    आवूधाबी टी-10 क्रिकेट टीम का मालिक है लविश चौधरी

    नवाब उर्फ लविश चौधरी का ठिकाना ईडी ने कुछ माह पहले ढूंढ निकाला था। वह आबूधाबी टी-10 क्रिकेट टीम का मालिक पाया गया था। 

    45 अचल संपत्तियां व बैंक बैलेंस कुर्क

    कुर्क की गई संपत्तियों में 45 अचल संपत्तियां शामिल हैं, इसमें  आवासीय फ्लैट, प्लाट व कृषि भूमि प्रमुख हैं। यह संपत्तियां हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब व हरियाणा जैसे राज्यों में थीं। इसके अलावा बैंक खातों में रखी चल संपत्तियां (लगभग 1.1 करोड़ रुपये) भी इस कुर्की में शामिल हैं। जांच से खुलासा हुआ कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच इन संपत्तियों को निवेशकों से ठगी कर जुटाए गए धन से खरीदा गया था।

    पोंजी स्कीम का खेल

    ईडी के अनुसार क्यूएफएक्स ग्रुप ने निवेशकों को फारेक्स ट्रेडिंग से हर माह पांच से छह प्रतिशत तक मुनाफा देने का लालच दिया था, लेकिन वास्तव में कोई ट्रेडिंग नहीं की गई। निवेशकों के धन को विभिन्न बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। अंततः रियल एस्टेट व स्वजन के नाम पर संपत्तियों में निवेश कर दिया गया। इस अवैध नेटवर्क में क्यूएफएक्स डिजिटल सर्विस,क्यूएफएक्स एजुकेशन, एटलान्योर स्पोर्ट्स एंड मीडिया प्राईवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों का नाम सामने आया है।

    पूर्व कार्रवाई की कड़ी

    यह कार्रवाई ईडी की पहले की गई कार्रवाई का हिस्सा है। इससे पहले 11 फरवरी व चार जुलाई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय ने देशभर में छापामारी कर क्यूएफएक्स ग्रुप से जुड़े 194 बैंक खातों को फ्रीज किया था। जिनमें 394 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली थी।

    कई राज्यों में दर्ज हैं केस

    क्यूएफएक्स घोटाले से जुड़े कई मामले हिमाचल प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं। इन पर आइपीसी, बीएनएस व प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम (बैनिंग) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

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