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    'पर्याप्त आय अर्जित करने वाली महिला पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं', हिमाचल के फैमिली कोर्ट का फैसला

    By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Fri, 31 Jul 2026 06:39 AM (IST)

    हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में नौकरीपेशा पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण की अर्जी खारिज कर दी है। पर्याप्त आय अर्जित करने वाली मह ...और पढ़ें

    सुंदरनगर फैमिली कोर्ट ने एलिमनी पर अहम फैसला दिया है। प्रतीकात्मक फोटो

    सुंदरनगर फैमिली कोर्ट ने एलिमनी पर अहम फैसला दिया है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. सुंदरनगर फैमिली कोर्ट ने पत्नी की अर्जी खारिज की।

    2. नौकरीपेशा, सक्षम महिला गुजारा भत्ता की हकदार नहीं।

    3. सीआरपीएफ स्टाफ नर्स थी, 56 हजार से अधिक वेतन।

    जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सुंदरनगर की अदालत ने अपने एक फैसले में नौकरीपेशा पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमा खर्च की अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त आय अर्जित करने वाली और आर्थिक रूप से सक्षम महिला पति से रखरखाव भत्ता पाने की हकदार नहीं है। मामला हंसा देवी बनाम अमनदीप सिंह से जुड़ा है।

    पत्नी ने मांगा था 10000 भत्ता

    आवेदक हंसा देवी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत आवेदन दायर कर पति से 30,000 रुपये मुकदमा खर्च और 10,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी। आवेदक का तर्क था कि उसके पास मुकदमे का खर्च उठाने और जीवन यापन के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, जबकि उसका पति जिम चलाकर प्रतिमाह दो लाख रुपये से अधिक कमाता है। 

    महिला सीआरपीएफ में स्टाफ नर्स

    वहीं, पति अमनदीप सिंह के अधिवक्ता की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि महिला उच्च शिक्षित है और वर्तमान में भारतीय सीआरपीएफ में सब-इंस्पेक्टर (स्टाफ नर्स) के पद पर तैनात है। उसकी बेसिक सैलरी ही 56,000 रुपये प्रतिमाह से अधिक है।

    टिप्पणी करते हुए खारिज की याचिका

    अदालत ने दोनों पक्षों के संपत्ति व आय के हलफनामों और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आवेदक महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि जब महिला स्वयं सम्मानजनक वेतन प्राप्त कर रही है और अपना भरण-पोषण करने में पूरी तरह सक्षम है, तो उसे पति से अंतरिम रखरखाव या कानूनी खर्च दिलाने का कोई औचित्य नहीं बनता। इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने महिला की याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया।

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