हिमाचल जिला परिषद चुनाव: राजनीति के गुरु के गढ़ में चेलों की फील्डिंग, कौल के क्षेत्र में कांग्रेस का सूपड़ा साफ
मंडी के द्रंग क्षेत्र में जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस को करारी हार मिली है। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के गढ़ में पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया, जि ...और पढ़ें

कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर। जागरण आर्काइव
HighLights
द्रंग जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार।
कौल सिंह ठाकुर के गढ़ में पार्टी का सूपड़ा साफ।
भतीजे प्रवीण ठाकुर की राजनीतिक नैया बीच मझधार में डूबी।
जागरण संवाददाता, मंडी। कहते हैं राजनीति में न तो कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही दुश्मन, लेकिन मंडी के द्रंग क्षेत्र के नतीजों ने एक नई कहावत लिख दी है। राजनीति में गुरु हमेशा गुड़ ही रह जाता है और चेले शक्कर हो जाते हैं। हिमाचल कांग्रेस के दिग्गज एवं पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के अभेद्य माने जाने वाले गृह क्षेत्र में जिला परिषद के चुनावी नतीजों ने कांग्रेस के किले को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया है।
द्रंग की छह सीटों पर कांग्रेस का खाता तक न खुलना किसी बड़े राजनीतिक भूचाल से कम नहीं है।
भतीजे की 'नैया' बीच मझधार में डूबी
इस चुनावी दंगल में कौल सिंह ठाकुर के लिए प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा सवाल उनके भतीजे प्रवीण ठाकुर थे। पूर्व मंत्री ने भतीजे की नैया पार लगाने के लिए दिन-रात एक कर दिए थे, जनसभाओं में वादों की झड़ी लगा दी थी। लेकिन जनता जनार्दन के मूड के आगे एक न चली। भतीजे की राजनीतिक नैया बीच मझधार में ऐसी डूबी कि कांग्रेस के रणनीतिकार भी सन्न रह गए। भतीजा नगर निगम मंडी के खलियार वार्ड से कांग्रेस प्रत्याशी था।
चेलों के चक्रव्यूह में फंसे 'गुरुजी'
कभी कौल सिंह ठाकुर की अंगुली पकड़कर राजनीति का ककहरा सीखने वाले पूर्ण ठाकुर और जवाहर ठाकुर आज उन्हीं के लिए सबसे बड़ी फांस बन चुके हैं। कौल सिंह खुद विधानसभा के दो चुनाव अपने इन्हीं चेलों से हारकर हैट्रिक के मुहाने पर खड़े हैं। इस जिला परिषद चुनाव में भी इन चेलों ने ऐसी फील्डिंग सजाई कि 'गुरुजी' रन बनाना तो दूर, विकेट बचाने के लिए असहाय नजर आए।
कहीं कमल खिला, कहीं बागी की चली आंधी
द्रंग और जोगेंद्रनगर क्षेत्र की छह सीटों के जो नतीजे आए हैं, वे कांग्रेस के लिए किसी डरावने सपने जैसे हैं।बथेरी, नगवाईं, कटौला और नेरघरवासड़ा वार्डों में कमल पूरी शान से खिला। डलाह वार्ड में भाजपा के ही एक असंतुष्ट (बागी) उम्मीदवार ने बाजी मारी। कुफरी वार्ड से वामदल की शिवानी ठाकुर ने ऐसा दांव खेला कि कांग्रेस दौड़ से ही बाहर हो गई।
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सेमीफाइनल में 'क्लीन बोल्ड', फाइनल की राह हुई पथरीली
इन नतीजों को हिमाचल की सत्ता के 'फाइनल' (आगामी विधानसभा चुनाव) का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इस सेमीफाइनल में कांग्रेस की इस करारी हार ने साफ कर दिया है कि द्रंग में अब कौल सिंह का जादू फीका पड़ चुका है। जहां एक ओर भाजपा इस जीत से गदगद है, वहीं कांग्रेस के भीतर अब 'गढ़' बचाने को लेकर आत्मचिंतन का दौर शुरू हो गया है। देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी पटखनी के बाद कौल सिंह ठाकुर 'फाइनल' के लिए कौन सा नया पैंतरा आजमाते हैं।